लुभाने लगी है किचन गार्डनिग, महिलाओं का बढ़ा रुझान

लुभाने लगी है किचन गार्डनिग, महिलाओं का बढ़ा रुझान

महंगाई के युग में जहरीली सब्जियों से बचने के लिए घरों में किचन गार्डनिग की ओर गृहणियों का ध्यान बढ़ा है।

Publish Date:Tue, 24 Nov 2020 05:59 PM (IST) Author: Jagran

होशियार सिंह, कनीना: महंगाई के युग में जहरीली सब्जियों से बचने के लिए घरों में किचन गार्डनिग की ओर गृहणियों का ध्यान बढ़ा है। सरकार ने विभिन्न सरकारी स्कूलों में मिड डे मील के लिए भी किचन गार्डन जरूरी कर दिया है। ऐसे में स्कूलों में भी किचन गार्डन लगे हुए हैं। कोरोना काल के चलते भी घरों की सब्जी उगाना सेहत के लिए अच्छा माना जा रहा है। कनीना में करीब आधा दर्जन गृहणियां एवं लोग इस ओर ध्यान दे रहे हैं। कनीना के रविद्र कुमार पूर्व अध्यापक, राजेंद्र सिंह, अजीत कुमार, कमला देवी कनीना मंडी, आशा कनीना ने बेहतर किचन गार्डनिग कर दूसरों की प्रेरणा बने हुए हैं।

कनीना के वार्ड एक की आशा नामक गृहणी ने तो अपना पूरा घर ही किचन गार्डन में बदल दिया है। उन्होंने अपने दो घरों में किचन गार्डन बना रखे हैं और पालक, गोभी, मटर, गाजर, धनिया, मूली के अलावा मेथी उगा रखी है वहीं फलों के रूप में अमरूद, अनार आदि उगा रखे हैं। घर में विशिष्ट स्थानों पर तुलसी उगा रखी है। उन्होंने बताया कि बाजार की जहरीली सब्जियों की बजाय वे अपने गार्डन में उगाई गई सब्जी को प्रयोग करती आ रही है। बाजार से कुछ रुपयों के सब्जी के बीज मंगवाकर प्रयोग कर रही हैं।

सबसे बड़ी विशेषता उन्होंने बताई कि जब कभी मेहमान घर में आ जाता है तो तुरंत गार्डन की सब्जी तोड़कर बनाई जाती है और मेहमान ताजी सब्जी को खाकर प्रसन्न हो जाता है। आस पास के घरों में जब किसी हरी पत्तेदार सब्जी की जरूरत होती है तो वे भी यहां से सब्जी ले सकते हैं। उनका गार्डन 24 घंटे मुफ्त सब्जी की दुकान की भांति काम करती है।

पूर्व खंड कृषि अधिकारी डा. देवराज का कहना है कि घर में सब्जी उगाकर न केवल धन की बचत की जा सकती है, वहीं ताजा सब्जी खाने को मिल सकती है। प्रत्येक गृहणी को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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गाजर की खेती बन रही है वरदान

संवाद सहयोगी, कनीना: कोरोना की मार को देखते हुए इस वर्ष गाजर एवं मूली की पैदावार कम होने से भाव अच्छे मिल रहे हैं। कनीना उपमंडल के मोड़ी गांव के किसान सर्दी के मौसम में गाजर उगाकर लाखों रुपये का मुनाफा ले रहे हैं। वे एक नहीं अपितु दो-दो फसल ले रहे हैं। गाजर उखाड़ने के बाद मेथी, मटर, टमाटर, मिर्च लगाकर अतिरिक्त लाभ कमाते हैं।

मोड़ी के गजराज सिंह एवं अजय कुमार आदि ने बताया कि उन्होंने गाजर की खेती की है और वर्ष 2008 से लगातार गाजर उगाते आ रहे हैं। इसे उखाड़ने के बाद मेथी, टमाटर, मिर्च की फसल पैदावार बतौर रबी फसल ले रहे हैं। जिसमें भी मुनाफा होता है। वर्तमान में आधा एकड़ में गाजर की बिजाई की गई है। बाजार में गाजर के भाव 20 रुपये किलो तक तथा मूली उगाने वाले गाहड़ा के सत्येंद्र शास्त्री ने बताया कि भाव 30 रुपये किलो तक मिले हैं और अब भाव घट रहे हैं।

किसान अक्टूबर-नवंबर में उखाड़ कर उसके स्थान पर दूसरी पैदावार लेते हैं। इस फसल सब्जी में हजारों रुपये तक आय प्राप्त होती है, लेकिन अब तो सरकार ने भावांतर भरपाई योजना शुरू कर रखी है। इस योजना के तहत नुकसान की भरपाई सरकार कर सकती है।

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