जूस जैकिग और रैनसमवेयर से हो सकता है आपका बैंक खाता खाली

पिछले कुछ समय से दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आनलाइन तकनीक की ओर आमजनों का रुझान बढ़ा है।

JagranFri, 03 Dec 2021 08:33 PM (IST)
जूस जैकिग और रैनसमवेयर से हो सकता है आपका बैंक खाता खाली

जागरण संवाददाता, नारनौल:

पिछले कुछ समय से दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आनलाइन तकनीक की ओर आमजनों का रुझान बढ़ा है। आज के इंटरनेट युग की दुनिया में हर व्यक्ति कंप्यूटर व मोबाइल फोन से जुड़ा हुआ है। नौकरी और पढ़ाई भी मोबाइल व कंप्यूटर तकनीकी संसाधनों से जुड़ गई है। इसके कारण अपराधी साइबर धोखाधड़ी को एक संगठित अपराध के रूप में अंजाम दे रहे हैं, जिससे हमें सावधान व सुरक्षित रहने की जरूरत है। पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन ने साइबर ठगी से बचने के लिए नई एडवाइजरी जारी की है।

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कैसे कैसे हो रही है ठगी

जूस जैकिग: जूस जैकिग एक तरह का साइबर फ्राड है। इसमें यूएसबी चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है। यह पोर्ट वास्तव में डेटा कलेक्शन और चार्जिंग दोनों के लिए उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग करके स्मार्ट फोन, टैबलेट या अन्य कंप्यूटर उपकरणों से डेटा कापी किया जाता है। पीड़ित यह सोचता है कि यह केवल चार्जिंग पोर्ट है।

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बचाव के सुझाव

1.मोबाइल चार्ज करते समय अपने फोन का डाटा ट्रांसफर को आफ करके रखें।

2. सार्वजनिक स्थानों पर चार्ज करने से पहले अपने डिवाइस को स्विच आफ कर दें।

3. अपने साथ पोर्टेबल पावर पैक या पावर बैंक लेकर चलें।

4. मोबाइल चार्ज करने के लिए डेटा डिसेबल्ड चार्जिंग केबल का प्रयोग कर सकते हैं ------

रैनसमवेयर हमला- रैनसमवेयर एक प्रकार का हानिकारक साफ्टवेयर है। इसको चलाने पर कंप्यूटर या डिवाइस की कार्यशैली बाधित हो जाती है। इससे स्क्रीन पर एक मैसेज प्रकट होने लगता है। संबंधित कंप्यूटर या डिवाइस की कार्यशैली को वापस शुरू कराने के लिए पैसों का भुगतान करने के लिए कहा जाता है। अन्य शब्दों में यह एक प्रकार की आनलाइन फिरौती है। रैनसमवेयर मुख्यत: फिशिग ईमेल या अनजाने में किसी संक्रमित वेबसाइट के इस्तेमाल से फैलता है।

बचाव के लिए सुझाव

1. किसी भी अज्ञात स्त्रोत से प्राप्त ईमेल जिसमें संदिग्ध फाइल या लिक को ना खोलें।

2. अपने कंप्यूटर में हमेशा एंटीवायरस को अपडेट रखें एवं सुनिश्चित करें कि विडोज फायरवाल चालू हो वह ठीक से कांफिगर किया गया हो।

3. अपने अति महत्वपूर्ण दस्तावेजों का नियमित अंतराल पर किसी अन्य स्थान पर बैकअप बनाते रहें।

4. अपने ईमेल अकाउंट में उचित स्पैम फिल्टर को सक्रिय रखें। --------

एटीएम और डेबिट कार्ड क्लोनिग फर्जीवाड़ा- प्रत्येक एटीएम व डेबिट कार्ड में एक मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है, जिसमें कार्ड से संबंधित महत्वपूर्ण गोपनीय जानकारी होती है। साइबर अपराधी द्वारा स्कीमिग डिवाइस के माध्यम से इस गोपनीय जानकारी को कार्ड से संग्रह कर लिया जाता है। इसे किसी खाली कार्ड पर कापी कर असली एटीएम कार्ड का क्लोन बना लिया जाता है। पीड़ित के द्वारा एटीएम कार्ड पिन अंकित करते समय पिन होल, स्पाई कैमरा, एटीएम की-पैड के ऊपर ओवरले डिवाइस इत्यादि का प्रयोग कर साइबर अपराधी पीड़ित के एटीएम कार्ड का पिन प्राप्त कर खाते से रकम निकाल ली जाती है।

बचाव के लिए सुझाव

1. एटीएम हमेशा स्वयं अंकित करें एवं यह सुनिश्चित करें कि कोई इसे देख नहीं सके।

2. रुपये निकालने के पूर्व छुपे हुए कैमरा, स्कीमर डिवाइस की जांच कर ले।

3. एटीएम की-पैड की जांच कर यह आश्वस्त हो ले कि किसी भी प्रकार का ओवरले डिवाइस की-पैड में ना लगे हो।

4. एटीएम से पैसे निकालते समय अपने अगल-बगल या पीछे किसी को खड़ा ना होने दें।

5. एटीएम पिन को हमेशा बदलते रहें और ऐसा पिन न रखे जो आसानी से अनुमान लगाया जा सके।

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