सावन आज से, बम भोले का पूजन अनंत फलदायी

कुरुक्षेत्र सावन महीना भगवान शिव का होता है। इस महीने भगवान शिव की अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसती है। गुरु पूर्णिमा के बाद रविवार 25 जुलाई को सावन शुरू हो जाएगा और यह 22 अगस्त तक रहेगा।

JagranSun, 25 Jul 2021 07:17 AM (IST)
सावन आज से, बम भोले का पूजन अनंत फलदायी

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : सावन महीना भगवान शिव का होता है। इस महीने भगवान शिव की अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसती है। गुरु पूर्णिमा के बाद रविवार 25 जुलाई को सावन शुरू हो जाएगा और यह 22 अगस्त तक रहेगा।

भारत साधु समाज के प्रदेशाध्यक्ष एवं स्थाणवीश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर बंसीपुरी महाराज ने बताया कि सावन महीने की संपूर्ण तिथियां विशेष महत्व रखती हैं। इस महीने शिव की पूजा कर मनवांछित फल पाया जा सकता है। भारतीय संस्कृति में शिव को अनादि देव के रूप में पूजित माना जाता है। भगवान शिव की साधना के बिना किसी भी काम में सफलता प्राप्त करना असंभव होता है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा है कि इच्छित फल बिन शिव अवराधे, लहे कोढी जोग जप साधे। यानी भगवान शिव की कृपा के बिना योग ध्यान हवन, अनुष्ठान, संपूर्ण विषय शिव की कृपा से ही सुलभ हैं। शिव को आदि गुरु माना गया है।

शिवलिग में दिव्य शक्ति

बंसीपुरी महाराज ने बताया कि शिवलिग में दिव्य शक्ति होती है। इसमें तीन देवताओं ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास माना गया है। शिवलिग में जलेरी के अंदर का हिस्सा ब्रह्मावली होता है। मध्य के भाग को विष्णुवली होता है। ऊपर का भाग भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। कुरुक्षेत्र में अनंत शिवलिग व शिव मंदिरों का वर्णन है। अधिष्ठात्री भगवान स्थाणवीश्वर महादेव मंदिर का विशिष्ट स्थान है। इसके अलावा दुखभंजनेश्वर, कालेश्वर, सर्वेश्वर और भी प्राचीन शिवलिग स्थित हैं।

इस मंत्र का जाप करें

गवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ऊं नम: शिवाय: का सच्चे मन से जाप करना चाहिए। इस बार सावन में चार सोमवार आएंगे। इस महीने कई त्योहार भी हैं। तीन अगस्त रविवार को हरियाली अमावस्या रवि पुष्य योग में है। 11 अगस्त बुधवार को सिधारा तीज, 13 अगस्त शुक्रवार को नाग पंचमी और 22 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर्व है।

विशेष पूजा अर्चना और संकल्प

सावन मास में प्रतिदिन अपने घर के पूजा स्थान या घर के नजदीक मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित शिवलिग के पास भगवान शिव का बीज मंत्र, पंचाक्षरी मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, रुद्राभिषेक, जाप ,ध्यान ,पूजा और अर्चना करें। मन, वचन और शुभ कर्म से निष्काम सेवा करें। इसके साथ जीव जंतुओं और पक्षियों के लिए अन्न व जल दान करें।

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