गांव लुखी में 40 साल से बंद पड़ा खरीद केंद्र शुरू, किसानों ने बांटे लड्डू

गांव लुखी व आसपास के गांव के किसानों को उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बड़ी सौगात दी है। किसानों की मांग को देखते हुए उपमुख्यमंत्री के आदेश पर गांव में पिछले 40 सालों से बंद पड़ा खरीद केंद्र केवल 11 दिनों में ही शुरू कर दिया गया है।

JagranSat, 09 Oct 2021 11:58 PM (IST)
गांव लुखी में 40 साल से बंद पड़ा खरीद केंद्र शुरू, किसानों ने बांटे लड्डू

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : गांव लुखी व आसपास के गांव के किसानों को उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बड़ी सौगात दी है। किसानों की मांग को देखते हुए उपमुख्यमंत्री के आदेश पर गांव में पिछले 40 सालों से बंद पड़ा खरीद केंद्र केवल 11 दिनों में ही शुरू कर दिया गया है। इस केंद्र के शुरू होने पर अब गांव लुखी सहित आसपास के गांवों के सैंकड़ों किसान अपनी फसल इसी खरीद केंद्र पर बेच सकेंगे। इस केंद्र के शुरू होने पर शनिवार को किसानों ने खरीद केंद्र पर पहुंच कर लड्डू बांटे।

गौरतलब है कि ग्रामीणों की इस मांग को शुगरकेन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य एवं जजपा के युवा जिलाध्यक्ष डा. जसविद्र खैहरा ने बीते 28 सितंबर को उपमुख्यमंत्री को सौंपा था और आठ अक्टूबर को विभाग की ओर से फसल खरीद केंद्र को चालू करने का पत्र भी आ गया है। इसे लेकर शनिवार को ही किसान फसल खरीद केंद्र पर पहुंचे और डा. जसविद्र खैहरा का आभार जताया और मिठाई बांटकर खुशी मनाई। किसान हीरा सिंह और करनैल सिंह ने कहा कि सरकार उनकी समस्या को देखते हुए उनकी मांग को समय पर पूरा किया है। इस मौके पर किसान सुशील राणा, पूर्व सरपंच सतीश राणा, अजमेर सिंह, नीरज शर्मा, बिट्टू संतोखपुरा, जरनैल, अनिल राणा व गुलजार सिंह मौजूद रहे।

महर्षि मारकंडेश्वर आइटीआइ में मनाया भारतीय प्रादेशिक सेना दिवस

संवाद सूत्र, बाबैन : महर्षि मारकंडेश्वर आइटीआइ में शनिवार को भारतीय प्रादेशिक सेना दिवस मनाया गया। प्राचार्य रणबीर सिंह ने बताया कि प्रादेशिक सेना भारतीय सेना की एक इकाई सेवा है। इसके स्वयंसेवकों को प्रतिवर्ष कुछ दिनों का सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर देश की रक्षा के लिए उनकी सेवाएं ली जा सकें। भारतीय संविधान सभा ने सितंबर 1948 में पारित प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948 के अनुसार भारत में अक्टूबर 1949 में प्रादेशिक सेना स्थापित हुई। इसका उद्देश्य संकटकाल में आंतरिक सुरक्षा दायित्व लेना और आवश्यकता पड़ने पर नियमित सेना को यूनिट प्रदान करना और इस प्रकार नवयुवकों को देश सेवा का अवसर प्रदान करना है। प्रादेशिक सेना के कार्मिकों को कठिन परिश्रम और सराहनीय कार्यों में प्रोत्साहित करने के लिए भविष्य में राष्ट्रीय रक्षा सेना के सैनिक विभाग की यथार्थ रिक्तियों के प्रतिशत पदों के लिए आरक्षित किए जाएंगे।

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