मां के जयकारों से गूंजी धर्मनगरी, 108 फुट ऊंचे गुंबद पर आतिशबाजी

मां के जयकारों से गूंजी धर्मनगरी, 108 फुट ऊंचे गुंबद पर आतिशबाजी

मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना के साथ चैत्र नवरात्र यानि वासंतिक नवरात्रों का शुभारंभ हो गया। भारतीय नववर्ष के शुभारंभ अवसर पर धर्मनगरी के मंदिरों में सुबह घट स्थापना के साथ मां भगवती के प्रथम रूप शैल पुत्री की पूजा अर्चना हुई।

JagranWed, 14 Apr 2021 07:03 AM (IST)

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना के साथ चैत्र नवरात्र यानि वासंतिक नवरात्रों का शुभारंभ हो गया। भारतीय नववर्ष के शुभारंभ अवसर पर धर्मनगरी के मंदिरों में सुबह घट स्थापना के साथ मां भगवती के प्रथम रूप शैल पुत्री की पूजा अर्चना हुई। मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा और धर्मनगरी मां भगवती के जयकारों से गूंज उठी। हरियाणा के एकमात्र प्राचीन शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली मंदिर की ओर से निकली शोभायात्रा से धर्मनगरी का वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर से पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने झंडी दिखाकर शोभायात्रा का रवाना किया। रात को मंदिर में दुबई के बुर्ज खलीफा जैसी भव्य आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रही।

हरियाणा के एकमात्र प्राचीन शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली मंदिर में कोरोना गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए नवरात्र महोत्सव का शुभारंभ हुआ। प्रथम नवरात्र पर प्रातकालीन मंगला आरती हुई। भक्तों ने मंदिर परिसर में बनाए निर्धारित शारीरिक दूरी के गोलों में खड़े होकर कपाट खुलने की प्रतीक्षा की। मां भद्रकाली सेवक मंडल के अध्यक्ष नरेंद्र वालिया व पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने सभी सेवकों के साथ कलश स्थापना की। गणेश द्वार पर ध्वजारोहण किया। परंपरा को निभाते हुए निकली शोभायात्रा

मंदिर की परंपरा को निभाते हुए 52 शक्तिपीठों के प्रतीक शोभायात्रा में अबकि बार सिर्फ 52 झंडे, 52 त्रिशुल, 52 कलश, 10 पताका, ज्योति रथ, मां भद्रकाली रथ और भारत माता रथ ने ही नगर परिक्रमा की। हालांकि पहले 5100 कलशधारी महिलाओं सहित 52 भव्य झांकियों को शोभायात्रा में शामिल किया जाता था। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह तोरण द्वार लगा कर मां भद्रकाली की पावन-पवित्र ज्योत का स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा को रोक कर मां भद्रकाली का पूजन किया और मंदिर के निर्देशानुसार केवल पैकेट बंद प्रसाद ही वितरित किया। शहर की परिक्रमा कर मंदिर पहुंची शोभायात्रा

मंदिर से शुरू होकर कर शोभायात्रा झांसा रोड, पुराना बस अडडा, गोल बैंक चौक, न्यू कालोनी, रेलवे रोड, मीरी-पीरी चौक, मुख्य बाजार से छोटा बाजार होती हुई सायं मंदिर में पहुंची। मंदिर में मां की ज्योति प्रतिस्थापित की गई। मां की पावन पवित्र ज्योति से धर्मनगरी प्रकाशमान हो गई। भक्तों को दिया सरकार की गाइड लाइन अपनाने का संदेश

मंदिर के पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने सभी भक्तों को सरकार की निर्धारित गाइड लाइन को अपनाने का संदेश दिया। सभी मास्क पहनें और शारीरिक दूरी बना कर रखें। उन्होंने कहा कि नवरात्रों में कन्या पूजन करें तथा कन्या भ्रूण हत्या रोकने का संकल्प लें। मां भद्रकाली अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करती हैं। शोभायात्रा में प्रो. हेमराज शर्मा, शिमला देवी, स्नेहिल शर्मा, डा. संजय शर्मा, डा. अन्नु, कर्नल डा. आनंद स्वरूप, सुनील शर्मा, सीआर मोदगिल, एमके मोदगिल, निरंजन लाल, विजय, हाकम चौधरी, संजीव मित्तल, रामपाल लाठर, आशीष, अनिल व राजेश मौजूद रहे। फूलों व फ्रूट्स से सजा मां भद्रकाली का दरबार

मां भद्रकाली मंदिर को देश-विदेश से 31 प्रजातियों के 35 विभिन्न रंगों के 31 लाख फूलों से की जा रही सजाया गया है। इन फूलों में नागालैंड से कंकरिया लॉन्ग, हाय डेंजर, थाईलैंड से आर्केट डेजे, बेंगलुरु से एथेरियम और जरबेरा सहित 31 प्रकार के फूलों का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही गेंदा, गुलाब इत्यादि भी महामाई के दरबार में अपनी खुशबू बिखेरे रहे हैं। मंदिर की सजावट मुंबई और कलकत्ता से आए कलाकारों ने की है। मंदिर मुख्य भवन को विशेषकर फ्रूट्स, जिसमें ड्रैगन फ्रूट से सजाया गया है। मंदिर की विशेष लाइटों की सजावट दिल्ली से कराई गई है। पांच मिनट तक हुई भव्य आतिशबाजी

दुबई के बुर्ज खलीफा जैसी भव्य आतिशबाजी इस बार हरियाणा के एकमात्र प्राचीन शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप मां भद्रकाली मंदिर के 108 फुट ऊंचे गुंबद पर नजर आई। प्रथम नवरात्र पर सायं महाआरती के बाद भव्य आतिशबाजी शुरू हुई। यह आतिशबाजी न केवल मंदिर परिसर बल्कि दूर दूर तक दिखाई दी। आतिशबाजी ऑटोमेटिक रिमोट कंट्रोल से चली जिससे चारों दिशाओं में अपनी रंग बिरंगी रोशनी बिखेरी। मंदिर में दिनभर भंडारा चला।

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