सड़कों को पशुमुक्त बनाने का अभियान बेअसर, जोखिम में वाहन चालकों की जान

सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु थानेसर नगर परिषद के काबू नहीं आ रहे। वर्ष 2017 से पशुओं को सड़कों से गोशालाओं में शिफ्ट करने का अभियान नप ने चला रखा है जो जुलाई 2021 तक पूरा नहीं हुआ।

JagranMon, 02 Aug 2021 07:27 AM (IST)
सड़कों को पशुमुक्त बनाने का अभियान बेअसर, जोखिम में वाहन चालकों की जान

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र :

सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु थानेसर नगर परिषद के काबू नहीं आ रहे। वर्ष 2017 से पशुओं को सड़कों से गोशालाओं में शिफ्ट करने का अभियान नप ने चला रखा है, जो जुलाई 2021 तक पूरा नहीं हुआ। नप बीच में कई बार शहर की सड़कों को पशुमुक्त करने का दावा कर चुकी है, मगर कुछ दिन बीतते नहीं कि सड़कों पर बेसहारा पशु फिर से वाहन चालकों के लिए जोखिम बन जाते हैं। हाल ही में दो दिन पहले डीसी मुकुल कुमार ने एक बार फिर नगर परिषद को शहर की सड़कों से पशुओं को हटाने के आदेश दे चुके हैं। नप ने अभियान भी चलाया, मगर असल स्थिति सचमुच खतरनाक हो रही है। शहर की ऐसी कोई सड़क नहीं जिन पर बेसहारा पशु बैठकर वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा न कर रहे हों।

दैनिक जागरण की टीम ने जब ग्राउंड रिपोर्ट की तो पता चला कि केडीबी रोड, रेलवे रोड, गुलजारी लाल नंदा मार्ग, सेक्टर हर उन सड़कों पर जहां से वाहन गुजरते हैं, वहां ये पशु बैठे रहते हैं। बारिश होने के बाद प्लाटों में जलभराव और मच्छर होने की वजह से ये पशु सड़कों पर आ जाते हैं। नजदीक से वाहन गुजरने की वजह से इन्हें मच्छर कम लगते हैं, जिसकी वजह से ये कुछ दिन के लिए सड़कों पर आकर बैठ जाते हैं, जबकि बीच में सड़क पर इनकी कम तादाद होने के पीछे नप का अभियान नहीं बल्कि मच्छर कम होना होता है। जब मच्छर कम होने शुरू हो जाते हैं तो ये पशु वापस कालोनियों के खाली प्लाटों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में नप को इन पशुओं के लिए स्थायी व्यवस्था करने की जरूरत है, क्योंकि गोशालाएं पहले से पशुओं की भरमार है।

वर्ष 2017 से चल रहा अभियान

थानेसर नगर परिषद ने वर्ष 2017-18 में हजारों बेसहारा गोवंश को पकड़कर निजी और सरकारी सहायता से बनी मथाना स्थित गोशाल में शिफ्ट किया था। एक बार जिला प्रशासन ने तमाम गोवंश को सड़कों से स्थानांतरित करने का दावा भी कर दिया था, लेकिन पूरी तरह से सड़कें बेसहारा पशुओं से मुक्त नहीं हो पाई। अब भी हजारों की तादाद में पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। इस कारण सड़कों पर आ जाते हैं।

यह है मुख्य कारण

दरअसल बारिश के बाद खाली प्लाटों में जलभराव होने की वजह से मक्खी व मच्छर बढ़ जाते हैं। खाली प्लाटों में बैठे रहने वाले पशुओं को जब मच्छर मक्खी परेशान करने लगते हैं तो वे प्लाटों से सड़कों का रुख कर लेते हैं। सड़कों के बीच या किनारे पर बैठ जाते हैं। इससे आने-जाने वाले वाहनों से हवा लगती रहती है, जिससे पशुओं को मच्छर नहीं लगते। मगर रात्रि के समय काले रंग वाले पशु सड़कों पर बैठे हुए दिखाई नहीं देते। जब तक वाहन चालकों की नजर पशु पर पड़ती है तब तक वह दुर्घटना का शिकार हो चुके होते हैं। इन मुख्य मार्गो पर संभल कर चलें

यहां दिखाई दिए पशु

पिपली से थर्ड गेट तक, सलारपुर रोड, सेक्टर दो, सात, पांच व 13, पिहोवा रोड, कैथल रोड, झांसा रोड, थर्ड गेट से लेकर पिपली, मुख्य बाजार, पुराना बस अड्डा, केडीबी रोड, सेक्टर-13 में गोवंश घूम रहे हैं।

50 पशु मथाना गोशाला में शिफ्ट

डीसी मुकुल कुमार दे चुके हैं हिदायत

डीसी मुकुल कुमार ने थानेसर नगर परिषद के अधिकारियों को सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को गोशाला में शिफ्ट करने के आदेश दिए। उनके आदेश के बाद शनिवार को पहले दिन 50 पशुओं को मथाना गोशाला में शिफ्ट किया गया है।

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