सिलाई सीखकर स्वावलंबी बनें लड़कियां : अल्पना सरना

उद्योग पति अल्पना सरना ने कहा कि रोटरी क्लब की ओर से महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। क्लब की ओर से खोले जा रहे सिलाई सेंटर भी इन्हीं प्रोजेक्टों का हिस्सा हैं।

JagranMon, 13 Sep 2021 06:37 AM (IST)
सिलाई सीखकर स्वावलंबी बनें लड़कियां : अल्पना सरना

संवाद सहयोगी, शाहाबाद : उद्योग पति अल्पना सरना ने कहा कि रोटरी क्लब की ओर से महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। क्लब की ओर से खोले जा रहे सिलाई सेंटर भी इन्हीं प्रोजेक्टों का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इन सिलाई सेंटरों में पर जरूरतमंद महिलाएं और लड़कियां निश्शुल्क सिलाई सीख सकती हैं। वह रविवार को शाहाबाद के देवी मंदिर में रोटरी क्लब की ओर से खोले गए सिलाई केंद्र का शुभारंभ करते हुए बोल रही थी।

उनके साथ उद्योगपति अमित सिघल ने भी बतौर मुख्यातिथि केंद्र का शुभारंभ किया। क्लब की ओर समाज सेवी गोल्डी ओजला व कुलदीप कक्कड़ की ओर से किरण व अलीशा को सिलाई मशीन भी भेंट की गई। इसके अलावा समाजसेवी संदीप गर्ग, राजकुमार गर्ग व सुरेश गोगिया की ओर से इन युवतियों की शिक्षा के लिए 30 हजार रुपये की राशि का चेक उनके स्वजनों को सौंपा गया। इसी मौके पर अनुष्का शर्मा को एकेएमवी रोट्रेक्ट क्लब की नई प्रधान नियुक्त किया गया। इस मौके पर क्लब के प्रधान राजकुमार गर्ग, प्रोजेक्ट चेयरमैन एससी सिगला, जितेंद्र गिल, पवन, प्रभजोत कौर, पवन गर्ग, सुनीता पाहवा, पूनम सिवाच, महेश गोयल व अक्षय कक्कड़ मौजूद रहे।

रीति रिवाजों व प्राचीन संस्कारों को जेहन में रखना जरूरी : सुधा

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि प्रदेश में रीति-रिवाजों व प्राचीन संस्कारों को अपनाना जरूरी है। इन संस्कारों के कारण आज हमारी पहचान पूरे विश्व में बनी हुई है। सुभाष सुधा रविवार को वार्ड नंबर-25 की विवेकानंद कालोनी में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

इससे पहले विधायक सुभाष सुधा ने विवेकानंद कालोनी में दादा खेड़ा की स्थापना और पूजा अर्चना की। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की धरा से हजारों वर्ष पहले पवित्र सरस्वती नदी बहती थी। इस नदी के किनारे ही संस्कृति और संस्कारों तथा शिक्षा का जन्म हुआ। इस शिक्षा और संस्कारों को पूरे विश्व में ग्रहण किया। आज आधुनिकता की दौड़ में युवा पीढ़ी संस्कृति और संस्कारों को भूलती जा रही है। आज हमें फिर से अपनी संस्कृति को अपनाने की जरूरत है। इस मौके पर जसमेर, सुरेश शर्मा, रामकर्ण शर्मा, रोशन लाल, सुल्तान, राजा राम, चंद्रभान, गुलाब सिंह, महिपाल, जसबीर, बलवान, डा. जसपाल, राजेश शर्मा, सतीश कुमार व मास्टर जोगिद्र मौजूद रहे।

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