सरस्वती तीर्थ स्थल पिपली में ब्रह्मसरोवर की तर्ज पर की जाएगी आरती

सरस्वती तीर्थ स्थल पिपली में ब्रह्मसरोवर की तर्ज पर की जाएगी आरती

हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड पिपली सरस्वती तीर्थ स्थल पर ब्रह्मसरोवर की तर्ज पर आरती करेगा। साथ ही इस स्थल को राज्य सरकार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी। आरती भी इसी का एक स्वरूप होगी। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच इसके प्रयास में लग गए हैं।

Publish Date:Sat, 16 Jan 2021 06:07 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड पिपली सरस्वती तीर्थ स्थल पर ब्रह्मसरोवर की तर्ज पर आरती करेगा। साथ ही इस स्थल को राज्य सरकार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी। आरती भी इसी का एक स्वरूप होगी। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच इसके प्रयास में लग गए हैं।

पिपली ग्राम पंचायत ने शुक्रवार को हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच का गांव की चौपाल में स्वागत किय। सरपंच ने इस पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह का आभार जताया। पिपली के सरपंच गुरमीत सिंह, बीड़ पिपली सरपंच पति दिनेश कुमार, हरमेश सिंह सैनी, मास्टर सतप्रकाश सैनी, माणक सिंह, पंजाबी सभा के प्रधान प्रदीप कुंद्रा, राम नारायण मदान, पंच इकबाल सिंह नितिन ने उपाध्यक्ष को पुष्प गुच्छ भेंट किए।

धुम्मन सिंह किरमच ने पिपली वासियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि पिपली सरस्वती स्थल को एक पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इससे स्थल को एक पहचान मिलेगी। सरकार इस स्थल को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की तैयारी की रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है। 100 करोड़ की है योजना

धुम्मन सिंह किरमच ने बताया कि पिपली से पिहोवा तक सरस्वती नदी तट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना है। इसके लिए बोर्ड ने करीब 100 करोड़ की योजना तैयार की है। तकनीकी सलाहकार को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। सरस्वती नदी में फिर से स्वच्छ जल की धारा बहाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। डीसी भी दो बार बैठक ले चुकी हैं। संबंधित अधिकारियों को दूषित पानी नाले में जाने से रोकने के आदेश दिए गए हैं। विभिन्न तकनीकी संस्थाओं के शोध से कई आश्चर्यजनक तथ्य भी सामने आए हैं। इन तथ्यों के अनुसार गांव ईशरगढ़ में 14 हजार वर्ष प्राचीन पानी मिलने की पुष्टि की गई है।

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