करनाल में मिले ब्लैक फंगस के दो आशंकित, जांच के लिए सैंपल भेजे, हड़कंप

जिले में ब्लैक फंगस के दो आशंकित मिले हैं। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के आइसीयू में दाखिल दोनों मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। दोनों मरीजों को विशेष निगरानी में रखा गया है। आशंकित मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। आशंकितों की तादाद और बढ़ने का भी अंदेशा है।

JagranFri, 14 May 2021 06:20 AM (IST)
करनाल में मिले ब्लैक फंगस के दो आशंकित, जांच के लिए सैंपल भेजे, हड़कंप

जागरण संवाददाता, करनाल: जिले में ब्लैक फंगस के दो आशंकित मिले हैं। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के आइसीयू में दाखिल दोनों मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। दोनों मरीजों को विशेष निगरानी में रखा गया है। आशंकित मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। आशंकितों की तादाद और बढ़ने का भी अंदेशा है।

कोरोना के साथ ब्लैक फंगस का खतरा मंडराता देख कालेज प्रबंधन ने चिकित्सकों को अलर्ट मोड में कर दिया है। कालेज में इस समय 90 आइसीयू बेड पर कोरोना के मरीज दाखिल हैं। यदि ब्लैक फंगस की पुष्टि होती है तो बाकी मरीजों को इसके प्रकोप से बचाना बड़ा चुनौतीपूर्ण होगा। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

क्या है ब्लैक फंगस

कोरोना मरीजों में फंगल इन्फेक्शन को ब्लैक फंगस कहा जा रहा है। इसके मामले बढ़ रहे हैं। करनाल में पहली बार इस फंगस की सूचना है। इसमें सबसे बड़ा डर है कि यह तेजी फैलता है और आंखों की रोशनी चली जाती है। इसके अलावा कुछ अंग काम करना भी बंद कर सकते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि ब्लैक फंगस इनफेक्शन रहस्यमयी नहीं है। यह केवल बहुत दुर्लभ था। लेकिन फिलहाल इसकी संख्या बढ़ रही है।

क्या हैं ब्लैक फंगस के कारण

इस बीमारी के बढ़ने के तीन प्रमुख कारण हैं। कोरोना, डायबिटीज और स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमाल।

1. किसी को कोरोना हो जाए, साथ में दूसरी बीमारियां पहले से हों तो उसकी रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। बाहरी इंफेक्शन से शरीर मुकाबला नहीं कर पाता। इसी स्थिति में यह फंगस का हमला करता है।

2. दूसरा खतरा डायबिटीज के मरीजों को है। उन्हें कई ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जिनसे उनके इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है। इसके अलावा कोरोना के गंभीर मरीजों में उनकी संख्या ज्यादा है, जो पहले से डायबिटीज से पीड़ित हैं। यानी इन पर दोगुना खतरा मंडरा रहा है।

3. स्टेरॉयड की अधिकता : कोरोना के इलाज में भी इनका इस्तेमाल होता है। इससे भी प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है। एम्स की ओर से रिपीट गाइडलाइन में स्टेरॉयड की डोज अधिक लेने से इम्यूनिटी तेजी से घट जाती है और व्यक्ति के शरीर में संक्रमण तेजी से मल्टीप्लाई होता है।

ये हैं ब्लैक फंगस के लक्षण

म्यूकोरमाइकोसिस यानि ब्लैक फंगल एक जानलेवा बीमारी है। अगर समय रहते पता चल जाए तो इलाज भी संभव है। इसके लक्षण हैं नाक जाम होना। आंखों और गालों पर सूजन या पूरा चेहरे पर सूजन। कई बार नाक पर काली पपड़ी जम जाती है। आंखों के नीचे दर्द होता है, सिरदर्द रहता है और बुखार आता है। यह इंफेक्शन नाक से शुरू होता है। यहां से ऊपरी जबड़े तक जाता है और फिर दिमाग तक पहुंचता है। इसका एक ही समाधान है, लक्षणों को जल्द से जल्द पहचानें और डॉक्टर से संपर्क करें। कैसे कर सकते हैं बचाव?

केसीजीएमसी के कोविड-19 के नोडल अधिकारी डा. अभिनव डागर ने कहा कि कोरोना केस में साफ-सफाई बेहद जरूरी है। अस्पताल का माहौल कई बार इंफेक्शन के लिहाज से ज्यादा खतरनाक होता है। उन मरीजों पर खास निगरानी रखने की जरूरत है। जिन्हें ऑक्सीजन लगी होती है। कोरोना मरीज को यदि ऑक्सीजन लगी होने पर ह्यूमिडिफायर से पानी लीक नहीं होना चाहिए। फंगल इंफेक्शन नमी वाली जगहों से बढ़ता है। कई केस में कोविड ठीक हो गया, लेकिन किसी दूसरे संक्रमण की वजह से मौत हो गई। ऐसे में गंभीर बीमारी से उबरे लोगों पर और ध्यान देने की •ारूरत है। जिले में क्या है कोरोना की स्थिति

सिविल सर्जन की रिपोर्ट के अनुसार बताया गया कि वीरवार को कोरोना से संक्रमित 760 मरीज ठीक होकर घर गए जबकि 521 लोग संक्रमित हुए। जिले में कोरोना वायरस से संक्रमित अब तक लिए गए 337398 में से 301126 सैम्पल की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। जिले में अब तक 34982 संक्रमित केस सामने आए थे, जिनमें 29385 मरीज ठीक होकर घर चले गए। जिले का पॉजिटिविटी रेट 8.5 प्रतिशत और रिकवरी रेट 84 प्रतिशत तथा मृत्यु दर 1.09 प्रतिशत है। वीरवार को कोरोना संक्रमण से सात लोगों की मौत हुई। अब तक 381 कोरोना संक्रमण से जान गवा चुके हैं। कोरोना वायरस के 5216 एक्टिव केस हैं। डीसी ने कहा कि सभी नागरिक लॉकडाउन के नियमों का पालन करें तथा घर पर रहें। पैनिक न बनाएं। वर्जन

आइसीयू में ब्लैक फंगस के दो आशंकित मरीज दाखिल हैं। इन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। दो दिन तक रिपोर्ट आ जाएगी, जिसके बाद ही पुष्टि की जा सकती है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण मे हैं। हमारी टीमें 24 घंटे मरीजों की निगरानी कर रही हैं।

डा. अभिनव डागर, नोडल अधिकारी, कोविड-19, केसीजीएमसी करनाल।

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