महापुरुषों की जाति पर विवाद खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण: डा. चौहान

शहीद भगत सिंह ने ऐसे क्रांतिकारी परिवार में जन्म लिया जिसकी तीन पीढि़यों ने स्वाधीनता संग्राम में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। सरदार भगत सिंह का जन्म अविभाजित भारत के बंगा नामक स्थान (अब पाकिस्तान में स्थित) में हुआ था।

JagranTue, 28 Sep 2021 09:05 PM (IST)
महापुरुषों की जाति पर विवाद खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण: डा. चौहान

करनाल (विज्ञप्ति): शहीद भगत सिंह ने ऐसे क्रांतिकारी परिवार में जन्म लिया जिसकी तीन पीढि़यों ने स्वाधीनता संग्राम में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। सरदार भगत सिंह का जन्म अविभाजित भारत के बंगा नामक स्थान (अब पाकिस्तान में स्थित) में हुआ था। जिस परिवार की तीन-तीन पीढि़यों ने स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया हो, उस परिवार की देश के प्रति समर्पण भावना का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह देखना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश पर मर मिटने वाले इस शहीद का नाम आज रास्ता रोककर देश में अराजकता फैलाने वाले लोग भी अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए लेते हैं। यह विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के लाइव कार्यक्रम में ग्रामीणों से संवाद के दौरान व्यक्त किए।

डा. चौहान ने कहा कि भगत सिंह में देश प्रेम कूट-कूट कर भरा था और वह बाल्यावस्था से ही एक अद्भुत बालक थे। भगत सिंह के व्यक्तित्व का चित्रण हरियाणवी रागिनियों में भी देखने को मिलता है। एक प्रसंग के अनुसार भगत सिंह जब छोटे बच्चे थे तो उन्हें खेतों में कुछ खोदते हुए देखा गया। जब उनसे इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि मैं खेतों में बंदूकें बो रहा हूं। जब खेत में फसलों के तौर पर बंदूकें लहलहाएंगी, तो वह इनकी मदद से अंग्रेजों को देश से बाहर मार भगाएंगे।

डा. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भगत सिंह सिर्फ एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक अच्छे पत्रकार भी थे। यह उनके व्यक्तित्व का एक अनछुआ पहलू है। यह महान क्रांतिकारी मात्र 23 वर्ष की उम्र में असेंबली में बम फेंककर फांसी के फंदे पर झूल गया था।

संवाद के दौरान गांव गोंदर से जुड़े ग्रामीण विजेंद्र सिंह के एक सवाल पर डा. चौहान ने कहा कि महापुरुषों को जाति विशेष में बांटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। महापुरुष पूरे समाज के नायक होते हैं, किसी जाति विशेष के नहीं। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार मिहिरभोज एक प्रतिहार राजपूत राजा थे, लेकिन समाज का एक वर्ग उन्हें गुर्जर साबित करने की कोशिश कर रहा है। उनकी जाति पर यह विवाद अनावश्यक और निरर्थक है।

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