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वेदांता स्कूल के छात्रों ने पराली न जलाने को लेकर निकाली जागरूकता रैली

संवाद सूत्र, नरवाना : वेदांता इंटरनेशनल स्कूल, कलौदा खुर्द के विद्यार्थियों द्वारा पराली न जलाने को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए गांव कलौदा में एक जागरूकता रैली निकाली। विद्यार्थियों ने धरती पुत्र आगे बढ़ो, मां की कोख बचाओ, चलो चले हाथ मिलाए, पराली प्रदूषण को जड़ से मिटाएं के गगनभेदी नारों से पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में ग्रामीणों में जागृति लाने का प्रयास किया। स्कूल के निदेशक प्रदीप नैन, चेयरमैन रवि श्योकंद व प्राचार्या वीना डारा ने जागरूक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। निदेशक प्रदीप नैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें पराली न जलाकर वैकल्पिक उपाय खोजने चाहिए। व्यक्ति को जीवन में स्वच्छ रहने के लिए पर्यावरण को स्वच्छ रखना होगा। उन्होनें किसानों को समझाया कि पराली केा जलाने से नुकसान होता है, इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित होने से बचेगा, बल्कि आग लगने के कारण जमीन की जो उपजाऊ शक्ति भी कमजोर नहीं होगी। चेयरमैन रवि श्योकंद ने कहा कि सरकार पराली जलाने के मामले को गंभीर है। इसलिए किसानों को चाहिए कि वो पराली जलाकर लगने वाले जुर्माना से बचे और उससे हो रहे प्रदूषण से बचकर रहे। प्राचार्या वीना डारा ने कहा कि पराली जलाने से धरती में मौजूद मित्र कीट भी मर जाते हैं, जिससे फसल को भी नुकसान होता है। सरकार द्वारा पराली को नष्ट करने के लिए यंत्रों पर सब्सिडी दी जा रही है। इस अवसर पर काफी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।

पराली जलाने से अपना ही नुकसान

छात्रा ज्योति ने कहा कि पराली जलाकर किसान अपना ही नुकसान करता है, क्योंकि एक तो जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है और दूसरा पराली जलाने से जुर्माना भी लगता है। इसलिए किसान को चाहिए कि पराली को न जलाकर उसको धरती में मिलाएं, ताकि उसकी खाद बनकर जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ सके।

सांस लेने में होती दिक्कत

छात्रा रंजना ने कहा कि पराली जलाने से प्रदूषण काफी मात्रा में होता है, जिस कारण सांस लेने में काफी दिक्कत होती है और आंखों में जलन होती है। सरकार ने पराली न जलाने के लिए किसानों को कृषि यंत्र उपलब्ध करवाये हुए हैं, जिनका उपयोग कर फायदा उठाया जा सकता है। जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाना है, तो पराली न जलाएं।

चारे के रूप में करें पराली का उपयोग

छात्रा समरजीत कौर ने कहा कि किसानों द्वारा पराली जलाना एक गैरकानूनी कार्य है, इससे स्वयं को नुकसान उठाना पड़ता है। किसान पराली को जलाकर इसका उपयोग चारे के रूप में कर सकता है और इसको बेचकर आमदनी भी होती है। किसान को चाहिए कि वो पराली से होने वाले नुकसान के बारे में सचेत हो।

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