नगर परिषद में चल रहे घमासान से शहर को हो रहा नुकसान

नगर परिषद में चल रहे घमासान से शहर को हो रहा नुकसान
Publish Date:Sat, 31 Oct 2020 07:50 AM (IST) Author: Jagran

कई माह से नहीं हुई हाउस की मीटिग, मंजूर हुए कामों के भी नहीं लगे टेंडर

प्रॉपर्टी टैक्स के बिल बांटने और स्कीम पांच-छह की सड़कों के टेंडर भी मांगे जा सके

17 जुलाई को प्रधान पति का ईओ के साथ हुआ था विवाद

फोटो : 30

जागरण संवाददाता, जींद : नगर परिषद प्रधान पूनम सैनी और ईओ डा. एसके चौहान के बीच चल रही खींचतान का खामियाजा शहरवासी भुगत रहे हैं। नगर परिषद की तरफ से ना तो नए टेंडर मांगे जा रहे हैं और ना ही पहले हाउस में पास हुए काम शुरू हो रहे हैं। पिछले कई महीने से विकास कार्यों पर चर्चा के लिए हाउस की मीटिग भी नहीं हुई है। स्कीम नंबर पांच-छह की सड़कें करीब दो साल पहले उखाड़ी गई थी। इनकी स्पेशल रिपेयरिग होनी है। लेकिन नगर परिषद इसके टेंडर नहीं लगा रही है। वहीं प्रॉपर्टी टैक्स के बिल बांटने का भी टेंडर नहीं हो पाया। सरकार ने जब बकाया टैक्स जमा करने पर छूट की घोषणा की थी। उस समय नगर परिषद ने प्रॉपर्टी टैक्स के बिल ठेके पर बंटवाने के लिए टेंडर लगाने की बात कही थी। सरकार द्वारा छूट की सीमा बार-बार बढ़ाई भी गई। अब छूट के केवल दो दिन का समय बाकी है। लेकिन नगर परिषद आज तक टेंडर भी नहीं मांग पाई। चार साल से नगर परिषद ने प्रॉपर्टी टैक्स के बिल नहीं बांटे हैं। प्रॉपर्टी सर्वे का काम भी समय पर पूरा नहीं हुआ। बिल ना मिलने से लोगों ने भी टैक्स जमा कराने में ज्यादा रुचि नहीं ली। नगर आयुक्त ने टेंडर लगाने के दिए थे निर्देश

शहर का पॉश इलाका स्कीम नंबर पांच-छह में सड़कों की स्पेशल रिपेयरिग का काम पिछले साल शुरू हुआ था। लेकिन ठेकेदार की मौत के कारण काम बीच में रुक गया। उसके बाद नगर परिषद ने दोबारा टेंडर मांगे थे। लेकिन टेंडर विवादों में आने के कारण रद कर दिया गया। जिला नगर आयुक्त डा. सुशील कुमार ने कार्यभार संभालने के बाद यहां का दौरा किया था। जहां लोगों ने बदहाल सड़कों का मुद्दा उठाया था। उसके बाद जिला नगर आयुक्त ने नगर परिषद अधिकारियों को दो मुख्य सड़कों को तारकोल से दोबारा बनाने और बाकी सड़कें जो ठीक हालत में हैं, उन पर मास्टिक एस्फाल्ट लेयर बिछाने के निर्देश दिए थे। लेकिन नगर परिषद में चल रही आपसी खींचतान के कारण इसकी प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई। प्रधान-ईओ एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप

17 जुलाई को प्रधान पूनम सैनी के पति जवाहर सैनी और पार्षद काला सैनी का ईओ डा. एसके चौहान के साथ एक फाइल पर हस्ताक्षर करने को लेकर विवाद हुआ था। ईओ की शिकायत पर जवाहर सैनी और पार्षद काला सैनी के खिलाफ सिविल लाइन थाना में मामला दर्ज है। तभी से प्रधान और ईओ में खींचतान चल रही है। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। कई बिलों में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए प्रधान हस्ताक्षर नहीं कर रही। ईओ की गाड़ी के निजी कार्यों में प्रयोग होने और कुछ टेंडर ईओ के रिश्तेदारों को देने के आरोप लगाए हैं। वहीं ईओ भी प्रधान पर जान-बूझ कर बुलों को अटकाने और नगर परिषद के कामों में अनियमितता के आरोप लगा रहे हैं। पिछली हाउस की मीटिग में हुए काम कराएं अधिकारी : प्रधान

विरोधी पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए डीसी को शपथ पत्र दिए हुए हैं। जिस पर छह को वोटिग होनी है। ऐसे में हाउस की मीटिग कैसे बुलाई जा सकती है। पहले हुई हाउस की मीटिग में गलियों का निर्माण, शहर के कई चौक का जीर्णोद्धार समेत करोड़ों रुपये के काम मंजूर हुए थे। ये काम अधिकारियों को कराने हैं।

पूनम सैनी, प्रधान, नगर परिषद, जींद प्रधान के कार्यालय ना आने से व्यवस्था प्रभावित हो रही : ईओ

प्रधान लंबे समय से कार्यालय नहीं आ रही हैं। हाउस में मंजूर हुए कामों को अधिकारियों से कराने की उनकी भी जिम्मेदारी है। घर बैठ कर केवल कहने से ही काम नहीं चलता। प्रधान के ना आने से कार्यालय के भी काम प्रभावित हो रहे हैं। वह अपना काम कर रहे हैं। प्रधान की तरफ से उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं।

डा. एसके चौहान, ईओ, नगर परिषद, जींद

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