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दो-तिहाई घरों में शिक्षक, ईक्कस है मास्टरों का गांव

कर्मपाल गिल, जींद:

जींद से हांसी रोड पर शहर से सटा है गांव ईक्कस। जिलेभर में इस गांव की पहचान मास्टरों के गांव से होती है। गांव के दो-तिहाई घरों में मास्टर हैं। अंग्रेजी शासन में ही वर्ष 1925 में गांव में चौथी तक का स्कूल खुल गया था। फिर पांचवीं और आठवीं तक अपग्रेड हुआ। इसका फायदा यह हुआ कि जब देश आजाद हुआ, तब गांव के गणेशी, धर्म सिंह, भूप सिंह सहित छह तहसीलदार थे। सेना में जयलाल कर्नल, उनका बेटा राजेंद्र ब्रिगेडियर, सतपाल सिंह ब्रिगेडियर सहित कई कैप्टन बने। इन शिक्षित लोगों और ग्रामीणों के प्रयास से 1980 में गांव का स्कूल 12वीं तक अपग्रेड हो गया। तब कई गांवों के बच्चे यहां पढ़ने आते थे। सरपंच हरपाल सिंह कहते हैं कि शुरू में गांव के दसवीं पास युवा जींद के जाट स्कूल में जेबीटी करके टीचर बने। कंवल सिंह गांव के पहले प्राइवेट शिक्षक थे, जबकि ओम सिंह और धज्जा सिंह पहले सरकारी टीचर बने। फिर गांव के लोगों ने शिक्षित होने का फायदा उठाते हुए 1984 में दस एकड़ पंचायती जमीन में डाइट सेंटर खुलवा लिया। इसका गांव को बहुत फायदा हुआ और हर बैच में जेबीटी की पांच सीट गांव के बच्चों के लिए आरक्षित हो गई। कुछ बच्चे मेरिट में आ जाते थे। इस तरह हर बैच में 10 से 15 बच्चों ने जेबीटी की। गांव में लगभग 200 मास्टर हैं। शिक्षित गांव में बिजली पावर हाउस, पशु अस्पताल और पीएचसी भी है। खेल में भी गांव काफी आगे रहा है। बास्केटबॉल के खिलाड़ी ओमप्रकाश ढुल को अर्जुन अवार्ड मिला चुका है। मास्टर ओम सिंह पेप्सू की कबड्डी टीम के कप्तान रहे हैं। मास्टर बलबीर सिंह सुघड़ भी कबड्डी के बड़े खिलाड़ी रहे हैं।

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