छठी-सातवीं कक्षा के बच्चे बुलाए, एक बेंच पर दो-दो व बिना मास्क बैठे मिले

छठी-सातवीं कक्षा के बच्चे बुलाए, एक बेंच पर दो-दो व बिना मास्क बैठे मिले
Publish Date:Tue, 29 Sep 2020 06:10 AM (IST) Author: Jagran

संवाद सूत्र, नरवाना : प्रदेश सरकार ने सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को अभिभावकों की सहमति से परामर्श कक्षाएं लगाने की मंजूरी दी है। लेकिन कई निजी स्कूलों में छठी और 7वीं की कक्षाएं लगाई जा रही है। खतरनाक बात यह है कि इन कक्षाओं में शारीरिक दूरी व मास्क लगाने के नियमों का भी पालन नहीं हो रहा है।

नरवाना की खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. ज्योति श्योकंद के संज्ञान में जब यह मामला आया तो सोमवार को उन्होंने शिव शिशु हाई स्कूल, आर्य कन्या महाविद्यालय, आदर्श स्कूल, एसडी कन्या स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान एक स्कूल में कोरोना महामारी के दौरान जारी की गई एडवाइजरी की पालना होती नजर नहीं आई। स्कूल में 9वीं से 12वीं कक्षा के बच्चों को ही बुलाया जाना था, लेकिन स्कूल में छठी और 7वीं कक्षा के बच्चें भी मिले। छोटे बच्चों को एक ही बेंच पर 2-2 की संख्या में बैठाया गया था और उनके मुंह पर मास्क भी नहीं थे। यहीं नहीं, सातवीं कक्षा के 30 बच्चों को नीचे टाट पर बैठाया गया था। अध्यापक ने भी मुंह पर मास्क नहीं लगाया था, जिस पर बीईओ ने उनको कड़ी फटकार लगाई। बीईओ डॉ. ज्योति श्योकंद ने अध्यापकों द्वारा कोरोना टेस्ट करवाने के बारे में पूछा तो उन्होंने टेस्ट से इनकार किया। बीईओ ने अध्यापकों को कहा कि जब आपने कोरोना टेस्ट ही नहीं करवाया है, तो बच्चों को कैसे पढ़ा सकते हो। बीईओ ने कहा कि जिन स्कूलों में कोरोना के नियमों का पालन नहीं हो हुआ, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

हाई स्कूल की है मान्यता, 12वीं कक्षा तक लग रही है कक्षा

खंड शिक्षा अधिकारी डा. ज्योति श्योकंद ने जब एक स्कूल का निरीक्षण किया, तो पाया कि स्कूल को मान्यता हाई स्कूल तक मिली हुई है, जबकि कक्षाओं में 11वीं व 12वीं कक्षा के विद्यार्थी बैठे हुए हैं। उन्होंने जब स्कूल के प्राचार्य से इसका जवाब पूछा, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये। बीईओ ने कहा कक्षा में बच्चों में 6 फीट की दूरी होनी चाहिए, लेकिन वहां भी कोई पालना नहीं की गई है। उन्होंने इस विषय पर चिता जताई।

प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों से कोरोना टेस्ट की फीस लेना गलत

सरकार ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए सभी राजकीय व प्राइवेट स्कूलों को कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए कुछ शर्तों के साथ परामर्श कक्षाएं लगाने की अनुमति दी है। इन शर्तों में इन कक्षाओं को पढ़ाने वाले शिक्षकों का कोरोना टेस्ट भी अनिवार्य है। पर हरियाणा शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का टेस्ट तो नि:शुल्क कर रहे हैं, परंतु प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों से 650 रुपये वसूल रहे हैं। प्राइवेट स्कूल संघ के ब्लाक प्रधान सतीश कुमार ने बताया कि प्राइवेट स्कूल सरकार के हर दिशा-निर्देश को मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोरोना टेस्ट की फीस लेने का संघ विरोध करता है। उनकी सरकार से अपील की है कि सरकारी और प्राइवेट स्कूल दोनों के लिए समान दिशा निर्देश जारी किये जाएं।

वर्जन

नरवाना में प्राइवेट स्कूलों के निरीक्षण के दौरान खामियां मिली हैं। एक स्कूल में छठी व 7वीं कक्षा के बच्चे बैठे मिले थे। स्कूल के संचालक को चेतावनी दी गई है, कि आगे शिकायत मिलने पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। रही बात हाई स्कूल तक मान्यता होने की और 11वीं, 12वीं कक्षा लगाने की। इस बारे में जांच की जाएगी और उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जाएगा।

-डा. ज्योति श्योकंद, बीईओ, नरवाना

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