निजी डीलर्स के पास बचे हैं केवल 11929 डीएपी के बैग, कैसे होगी गेहूं की बिजाई

किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। जिसके कारण लोग खाद के लिए दूसरे जिलों में अपने रिश्तेदारों को भी फोन कर रहे हैं। जिले में करीब 2.17 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल की बिजाई होती है। जिसके लिए 31 हजार मीट्रिक टन यानि करीब सवा छह लाख डीएपी के बैग चाहिएं। 94 हजार बैग ही किसानों को मिले हैं।

JagranThu, 28 Oct 2021 07:03 PM (IST)
निजी डीलर्स के पास बचे हैं केवल 11929 डीएपी के बैग, कैसे होगी गेहूं की बिजाई

जागरण संवाददाता, जींद : किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। जिसके कारण लोग खाद के लिए दूसरे जिलों में अपने रिश्तेदारों को भी फोन कर रहे हैं। जिले में करीब 2.17 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल की बिजाई होती है। जिसके लिए 31 हजार मीट्रिक टन यानि करीब सवा छह लाख डीएपी के बैग चाहिएं। 94 हजार बैग ही किसानों को मिले हैं। जिले में वीरवार शाम तक कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 11929 डीएपी के बैग ही निजी डीलर्स के पास बाकी हैं। कृषि अधिकारी जल्द डीएपी का स्टाक आने की संभावना जता रहे हैं। अगर जल्द डीएपी नहीं मिलता है, तो परेशानी बढ़ेंगी। सरकारी दुकानों पर पिछले करीब तीन सप्ताह से से डीएपी खाद नहीं है। इससे एक तरफ जहां किसान परेशान हैं। वही निजी डीलर्स की भी मनमानी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि प्राइवेट डीलर्स डीएपी तभी देते हैं, जब उनके यहां से गेहूं का बीज खरीदें। इस कारण सरकारी दुकानों पर आया बीज नहीं बिक पा रहा है। सरकारी दुकान पर निजी डीलर्स की तुलना में बीज का बैग 100 से 150 रुपये सस्ता है। लेकिन सरकारी दुकान पर डीएपी ना होने की वजह से किसान केवल गेहूं का बीज नहीं खरीद रहे। किसानों का कहना है कि अगर वह सरकारी दुकान से गेहूं का बीज खरीद लेंगे, तो डीएपी कहां से लाएंगे। डीलर तभी डीएपी देंगे, जब उनके यहां से गेहूं का बीज खरीदेंगे। दी जींद कोआपरेटिव मार्केटिग कम प्रोसेसिग सोसाइटी लिमिटेड केंद्रों पर जिले में आठ हजार से ज्यादा गेहूं के बीज के बैग आए हुए हैं। जिनमें से अभी तक 500 गेहूं के बीज के बैग भी नहीं बिक पाए हैं। जबकि हर साल जींद पुरानी अनाज मंडी में सोसाइटी की दुकान पर ही 17 से 18 हजार गेहूं के बीज के बैग बिकते थे। -------------- निजी डीलर्स की मनमानी बढ़ी सोसाइटी के प्रधान संजय पहल का कहना है कि सरकारी दुकान पर डीएपी उपलब्ध ना होने से किसानों को परेशानी हो रही है। इससे निजी डीलर्स की मनमानी भी बढ़ रही है अगर जल्दी सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं आया, तो इस बार गेहूं के बीज के बैग नहीं बिक पाएंगे। जब प्राइवेट डीलर्स के पास डीएपी खाद पहुंच सकता है, तो सरकार व प्रशासन को सरकारी दुकानों पर भी डीएपी उपलब्ध कराना चाहिए। -------------- प्रतिदिन 100 से ज्यादा किसान डीएपी के लिए आते हैं सोसाइटी के सेल्समैन अंकित ने बताया कि प्रतिदिन उनके यहां 100 से ज्यादा किसान डीएपी लेने के लिए आते हैं और खाली हाथ वापस लौट जाते हैं। यह स्थिति पूरे जिले की है प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। नवंबर के पहले सप्ताह में गेहूं की बिजाई का सीजन जोर पकड़ेगा। अगर उस समय किसानों को डीएपी नहीं मिल पाया, तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं। --------------- खाद के लिए काट रहे चक्कर लुदाना गांव के किसान सत्यवान ने बताया कि पुरानी अनाज मंडी में सरकारी दुकान पर डीएपी के लिए वह कई बार आ चुका है। हर बार कहा जाता है कि तीन-चार दिन में डीएपी आ जाएगा। प्राइवेट डीलर्स के पास जाते हैं, तो वे डीएपी के साथ गेहूं का बीज भी खरीदने के लिए कहते हैं। उसे गेहूं के बीज की जरूरत नहीं है। गेहूं का बीज घर पर ही तैयार किया हुआ है। ---------------- सरकारी दुकानों के लिए भेजी हुई है डिमांड कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर नरेंद्र पाल का कहना है कि इस सीजन में 31 हजार मीट्रिक टन डीएपी की डिमांड भेजी हुई है। फिलहाल निजी डीलर्स के पास 11929 डीएपी के बैग उपलब्ध हैं। इफको का रैक जल्द पहुंच जाएगा, जो सरकारी दुकानों पर भेजा जाएगा। चंबल का डीएपी का रैक भी दिवाली के आसपास आने की उम्मीद है। जिसके बाद जिले में डीएपी की कोई कमी नहीं रहेगी। ------------------------- किसान डीएपी खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर नगूरां पैक्स में कई माह से नहीं डीएपी, कैसे होगी बिजाई संवाद सहयोगी, अलेवा : नगूरां तथा आसपास के किसानों ने नगूरां पैक्स में डीएपी खाद नहीं मिलने के चलते सरकार के खिलाफ रोष जताया। किसान विकास, सत्यनारायण, जोगिद्र, राममेहर ने इस दौरान सरकार की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसान डीएपी खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। लेकिन सरकार किसानों को डीएपी खाद का एक दाना भी उपलब्ध नहीं करवा रही है। गेंहू की बिजाई के लिए उनके खेत पूरी तरह से तैयार है। अगर उनको बिजाई के लिए डीएपी खाद ही नहीं मिला, तो उनके खेत बिना बिजाई के खाली रह जाएंगे। किसान करीब 15 से 20 दिनों से डीएपी खाद के लिए नगूरां पैक्स में जा रहे हैं। लेकिन कर्मचारियों द्वारा पीछे से डीएपी खाद नहीं आने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है। पैक्स पर डीएपी खाद नहीं मिलने के कारण उनको मजबूरी में प्राइवेट दुकानों से खाद के साथ कीटनाशक दवा व बीज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अगर किसान कीटनाशक दवा तथा बीज लेने से मना करते हैं, तो दुकानदार डीएपी का स्टाक खत्म होने की बात कहकर वापस लौटा देते हैं। किसानों ने बताया कि नगूरां पैक्स के अधीन नगूरां, कुचराना कलां, कुचराना खुर्द, बधाना, डाहौला, चांदपुर, हसनपुर, शामदो, दिल्लूवाला, मांडी, रायचंदवाला, मोहम्मद खेड़ा गांवों के किसानों का लेनदेन होता है। -------------- पीछे से नहीं मिल रहा डीएपी : पैक्स मैनेजर नगूरां गांव स्थित पैक्स मैनेजर रोहतास ने बताया कि पीछे से कई माह से पैक्स में डीएपी खाद नहीं आ रहा है। इसके लिए डिमांड भेजी हुई है। आए दिन किसान पैक्स में डीएपी खाद लेने के लिए पहुंच रहे हैं। डीएपी खाद के लिए इफको तथा कृभको एरिया मैनेजर को सूचित किया हुआ है। कृभको एरिया मैनेजर अश्वनी ने बताया कि देखते हैं सरकार कब डीएपी खाद उपलब्ध करवाती है। नवंबर के पहले सप्ताह में डीएपी का स्टाक आ सकता है।

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