डीएपी के साथ यूरिया लेने को भी किसानों को लगानी पड़ रही लाइन

डीएपी के साथ यूरिया लेने को भी किसानों को लाइन लगानी पड़ रही है।

JagranMon, 29 Nov 2021 05:46 PM (IST)
डीएपी के साथ यूरिया लेने को भी किसानों को लगानी पड़ रही लाइन

जागरण संवाददाता, झज्जर : डीएपी के साथ यूरिया लेने को भी किसानों को लाइन लगानी पड़ रही है। जिससे किसानों को दिक्कत होती है। जिले में रविवार को छह हजार बैग यूरिया के पहुंचे। जिन्हें खरीद केंद्रों पर सप्लाई किया गया। ताकि किसानों के लिए यूरिया खाद आसानी से उपलब्ध रहे और किसी भी प्रकार की कोई परेशानी ना उठानी पड़े। बता दें कि यूरिया की कमी के कारण पिछले कई दिनों से किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिसकी वजह से किसानों को खरीद केंद्रों के बाहर लंबी लाइन भी लगानी पड़ती है। ताकि यूरिया समय पर मिल जाए, लेकिन यूरिया की किल्लत के चलते खेती भी प्रभावित हो रही है। जिसकी चिता किसानों के चेहरों पर साफ देखने को मिलती है। फसलों की सिचाई के बाद यूरिया खाद डाली जाती है, खासकर गेहूं में, ताकि फसल में अच्छी बधवार (ग्रोथ) हो। वहीं जो किसान सिचाई कर चुके हैं, उन्हें यूरिया खाद की चिता है। वहीं डीएपी की बात करें तो डीएपी के लिए भी मारामारी देखने को मिली। अभी भी खरीद केंद्रों पर डीएपी पहुंचने के बाद किसानों की लाइनें लग जाती है। सरसों बिजाई की शुरूआत से ही डीएपी की किल्लत किसानों को उठानी पड़ी। लंबी-लंबी लाइनों में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा था। यही स्थिति अभी भी बनी हुई है। डीएपी की कमी के कारण गेहूं की बिजाई में देरी हो रही है। जिले में कुल करीब 13 हजार टन डीएपी की आवश्यकता रबी फसलों के लिए होती है। जबकि, अब तक जिले में करीब छह हजार टन डीएपी पहुंच चुकी है। जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि आवश्यकता से आधी डीएपी भी जिले के किसानों को नहीं मिल पाई। जिस कारण किसानों की परेशानी भी बढ़ी।

-जिला गुणवत्ता नियंत्रक जसबीर सिंह ने बताया कि रविवार को छह हजार बैग यूरिया के झज्जर पहुंचे हैं। जिन्हें खरीद केंद्रों पर सप्लाई किया गया है। ताकि किसानों को उपलब्ध हो सके। किसानों की सुविधा को देखते हुए जैसे ही डीएपी व यूरिया का स्टाक पहुंचता है, उसे खरीद केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।

-डीडीए इंद्र सिंह ने बताया कि विभागीय टीम खरीद केंद्रों पर भी निगरानी रख रही है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो खाद खरीद केंद्रों पर पहुंचती है वह पूरी किसानों को उपलब्ध रहे। जिससे कि किसानों को कोई दिक्कत ना हो। साथ ही किसानों से भी जरूरत अनुसार ही खरीदने के लिए आह्वान किया।

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