कोरोना काल में बेसहारा बच्चों का सहारा बनेगी परिषद : डीसी

कोरोना काल में बेसहारा बच्चों का सहारा बनेगी परिषद : डीसी

जिला बाल कल्याण परिषद कोरोना काल में जरूरतमंद बचों का सहारा बनते हुए उन्हें हर संभव सहयोग देगी।

JagranMon, 10 May 2021 06:20 AM (IST)

जागरण संवाददाता, झज्जर :

जिला बाल कल्याण परिषद कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों का सहारा बनते हुए उन्हें हर संभव सहयोग देगी। यह जानकारी उपायुक्त एवं अध्यक्ष जिला बाल कल्याण परिषद झज्जर जितेंद्र कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के तत्वावधान में जिला इकाई नियमानुसार कार्य करेगी। आपदा के इस दौर में जिन बच्चों के माता-पिता कोरोना की भेंट चढ़े तो परिषद उन बच्चों की पालक बनते हुए सहयोग करेगी। इस बारे में कोई भी जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल कर दी जा सकती है। जिला बाल कल्याण अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि किसी भी बच्चे के भविष्य को खराब नहीं होने दिया जाएगा। दरअसल, महामारी का संकट सभी के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी करने वाला है। कोई भी वर्ग महामारी के कहर से अछूता नहीं है। महामारी ने परिवारों के परिवार को लील लिया है। ऐसे भी कई परिवार हैं, जिसमें बच्चों का पालनकर्ता ही कोई नहीं बचा है। ऐसे में बेसहारा बच्चों का भविष्य अंधकार में जाने का खतरा पैदा हो सकता है। परिषद द्वारा चलाए जा रहे होम्स में बच्चों के पालन पोषण की पूरी व्यवस्था हैं। जहां बच्चों को सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जिन बच्चों के अभिभावक इस दुनिया में नहीं हैं उनके जानकार बच्चों के पालन पोषण के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर और नजदीकी जिला बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित बाल भवनों में संपर्क स्थापित कर सूचना दे सकते हैं। सूचना उपरांत कानूनी कार्यवाही पूरी कर ऐसे बच्चों को परिषद सहारा प्रदान करते हुए उनके पालन पोषण की जिम्मेदारी का वहन करेगी। कानूनी प्रक्रिया के तहत ही गोद दिया जाता है बच्चा

उन्होंने बताया कि बेसहारा बच्चे को बिना कानूनी कार्यवाही पूरी किए गोद लेना या देना पूरी तरह गैरकानूनी है। बेसहारा बच्चे को गोद देना या लेना कानूनी प्रक्रिया के तहत आता है। जोकि केंद्र सरकार की एजेंसी केंद्रीय दत्तक ग्रहण एजेंसी कारा की देखरेख में होता है। बच्चा गोद लेने के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और उसके लिए कारा की साइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही बच्चा गोद दिया जाता है।

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