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बूंदाबांदी आते ही तिरपाल लेकर गेहूं ढकने दौड़ पड़े मजदूर व आढ़ती

बूंदाबांदी आते ही तिरपाल लेकर गेहूं ढकने दौड़ पड़े मजदूर व आढ़ती

- खुले में पड़े गेहूं को सुरक्षित रखना चुनौती बरसात में भीगने का डर

JagranWed, 21 Apr 2021 07:00 AM (IST)

- खुले में पड़े गेहूं को सुरक्षित रखना चुनौती, बरसात में भीगने का डर फोटो : 20 जेएचआर 14, 15, 16

जागरण संवाददाता, झज्जर :

मंगलवार दोपहर का समय था और आसमान में बादल छाए हुए थे। देखते ही देखते हल्की बूंदाबांदी ने दस्तक ही दी कि झज्जर अनाज मंडी में मौजूद मजदूर व आढ़ती तिरपाल लेकर दौड़ पड़े। हर कोई खुले आसमान के नीचे रखे गेहूं को तिरपाल से ढकने का प्रयास कर रहा था। ताकि बरसात आए तो गेहूं ना भीगे। हालांकि बरसात नहीं हुई और गेहूं भीगने की तो स्थिति भी नहीं आई। इस दौरान किसान गेहूं से भरी ट्रालियां भी लेकर आ रहे थे। वहीं, तिरपाल ढकने से पहले मजदूर गेहूं को बोरियों में भरने व ट्रकों में लोड करने का काम कर रहे थे। इधर, बूंदाबांदी को आता देख सभी गेहूं को ढकने में जुट गए।

बॉक्स : स्थिति यह है कि अनाज मंडी में गेहूं की बंपर आवक है। सैकड़ों क्विटल गेहूं खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है। ऐसे में बरसात आती है तो गेहूं भीगने का डर आढ़तियों को भी सता रहा है। मौसम विभाग ने भी 20 अप्रैल तक मौसम परिवर्तनशील रहने व बूंदाबांदी की संभावना जताई हुई थी। इसको लेकर आढ़ती पहले ही सचेत दिखाई दिए। वहीं आसमान में छाए बादलों के कारण आढ़तियों ने गेहूं को सुरक्षित रखने की तैयारी की हुई थी। लेकिन, जिला मुख्यालय स्थित अनाज मंडी सहित अन्य खरीद केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे लगे गेहूं के ऊंचे-ऊंचे ढेर को सुरक्षित रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। आढ़तियों का कहना है कि उठान काफी धीमा चल रहा है। जिस कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर बरसात आती है तो गेहूं भीगने की स्थिति में नुकसान भी हो सकता है। इसलिए, उन्होंने गेहूं का उठान तेज करने की मांग की। इधर, शेड्यूल के अनुसार किसानों के गेहूं की खरीद हो रही है। चंडीगढ़ मुख्यालय से जारी शेड्यूल के अनुसार जिन किसानों का नाम आता है, उनका टोकन काटा जा रहा है। अनाज मंडी में गेहूं की आवक अधिक होने के कारण स्थिति यह है कि अनाज मंडी के गेट के बाहर भी गेहूं उतरवाना पड़ा। हालांकि, आढ़ती ने गेहूं को बारदाने में डाल दिया ताकि लोड करवाया जा सके। उठान तेज करने के लिए अधिकारियों के समक्ष भी बात रखी जा चुकी है, लेकिन, तमाम तरह के प्रयासों के बाद समाधान नहीं हो पाया है।

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