कौशल वर्धन से महिलाएं छू रही स्वावलंबन की ऊंचाई, झज्‍जर में करीब 400 महिलाएं बनी आत्‍मनिर्भर

महिलाओं के हौसलों की इस उड़ान का पंख लगाने के लिए उन्हें पहले तैयार किया जाता है। ताकि अपने आत्मनिर्भरता के आसमान में अधिक से अधिक ऊंचाई तक उड़ान भरें। इसी उद्देश्य से महिलाओं को कौशल वर्धन की ट्रेनिंग दी जाती है।

Manoj KumarThu, 28 Oct 2021 12:44 PM (IST)
महिलाओं को सिलाई, जूट के बैग बनाना, डेकोरेशन व पकवान तैयार करने आदि की दी जा रही ट्रेनिंग

जागरण संवाददाता,झज्जर : कौशल वर्धन की सीढ़ी चढ़कर महिलाएं स्वावलंबन की ऊंचाई छू रही हैं। महिलाओं के हौसलों की इस उड़ान का पंख लगाने के लिए उन्हें पहले तैयार किया जाता है। ताकि अपने आत्मनिर्भरता के आसमान में अधिक से अधिक ऊंचाई तक उड़ान भरें। इसी उद्देश्य से महिलाओं को कौशल वर्धन की ट्रेनिंग दी जाती है। जिसमें महिलाओं को सिलाई, जूट के बैग तैयार करना, डेकोरेशन व खाद्य सामग्री के अलग-अलग पकवान तैयार करने से संबंधित जानकारी बारीकी से समझाई जाती है।

ताकि महिलाएं इस जानकारी का ना केवल संग्रह करें, बल्कि इसके इस्तेमाल से खुद का काम शुरू करके दूसरी महिलाओं के लिए भी मिसाल पेश करे। जिसके सफल परिणाम भी सामने आने लगे हैं। जिनकी बदौलत महिलाएं अब खुद का काम शुरू करके स्वयं तो आत्मनिर्भर बन रही हैं, साथ ही दूसरी महिलाओं को भी रोजगार देकर उन्हें भी आर्थिक रूप से मजबूत किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाती है।

कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा अब तक करीब 400 से अधिक महिलाओं को सिलाई, जूट के बैग तैयार करना, डेकोरेशन व खाद्य सामग्री के अलग-अलग पकवान बनाने आदि की ट्रेनिंग दी गई है। महिलाओं ने अपनी रूचि अनुसार इनमें से अलग-अलग विषय की ट्रेनिंग ली। महिलाओं को निशुल्क ट्रेनिंग देकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हालांकि कोरोना महामारी के कारण पिछले कुछ समय से महिलाओं की ट्रेनिंग नहीं हो पाई। अब कोरोना महामारी का असर खत्म होने लगा है।

अब जल्द ही फिर से महिलाओं को ट्रेनिंग देने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ट्रेनिंग देने से पहले ऐसी महिलाओं का चयन किया जाता है, जिन्हें वास्तव में ट्रेनिंग की जरूरत है और वे आगे चलकर इसका सदुपयोग करेंगे। करीब एक तिहाई से अधिक महिलाएं ट्रेनिंग लेकर अपना काम भी शुरू कर चुकी हैं।

आपस में जोड़कर व्यापार बढ़ाने पर फोकस

ट्रेनिंग के बाद सभी को आपस में जोड़कर भी व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। एक-दूसरे के उत्पादों को भी प्रमोट किया जाता है। साथ ही दो या दो से अधिक महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को मिलाकर आकर्षक रूप में तैयार करके अच्छी कीमतों पर बेचा जाता है। इसलिए उन सभी के उत्पादों को ध्यान में रखते हुए आपस में जोड़ा जाता है। जिससे कि एक दूसरे को काम मिले ओर व्यापार भी बढ़े। इसके लिए समय-समय पर लगने वाले नेशनल व अन्य मेलों की भी जानकारी दी जाती है। जहां पर महिलाएं भाग लेकर अपने उत्पादों को अलग पहचान दे पाएं।

कृषि विज्ञान केंद्र में गृह विज्ञान की वरिष्ठ विस्तार विशेषज्ञ प्रोफेसर कुसुम राणा ने बताया कि वे महिलाओं को वे महिलाओं को जूट के बैग बनाने व डेकोरेशन संबंधित ट्रेनिंग देती है। साथ ही सिलाई भी सिखाई जाती है। उन्होंने पिछले करीब पांच साल में करीब 400 महिलाओं को ट्रेनिंग दी है। जिनमें से करीब 150 महिलाओं ने खुद का काम शुरू किया है। कुछेक ने तो दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दिया है।

-महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। जिससे कि महिलाओं को अपना कौशल बढ़ाने का मौका मिल सके। इसके बाद महिलाएं खुद का काम भी शुरू करती हैं। जिससे कि वे आर्थिक रूप से मजबूत होकर आत्मनिर्भर भी बनती है।

डा. उमेश शर्मा, वरिष्ठ संयोजक, कृषि विज्ञान केंद्र, झज्जर।

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