आखिर क्यों संयुक्त किसान मोर्चे ने भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी को किया निलंबित

यदि सारी कड़ियां जोड़ें तो स्पष्ट हो जाता है कि संयुक्त किसान मोर्चा नहीं चाहता कि ऐसा कोई संदेश जाए कि वह किसी राजनीतिक दल के नेता को भाव देने के पक्ष में है न ही अपुष्ट आरोप लगाने वालों का साथ देने के पक्ष में है।

Sanjay PokhriyalThu, 15 Jul 2021 09:42 AM (IST)
संयुक्त किसान मोर्चे ने गुरनाम सिंह चढ़ूनी को निलंबित किया

जगदीश त्रिपाठी, हिसार। भारतीय किसान यूनियन के चढ़ूनी गुट के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी को तो संयुक्त किसान मोर्चे ने निलंबित कर दिया, लेकिन पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के विरुद्ध कुछ आंदोलनकारियों द्वारा लगाए जा रहे कथित आरोपों पर चर्चा तक नहीं की? इससे यह प्रश्न उठने लगा है कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन में भागीदार संगठनों के बीच समन्वय के लिए बनाया गया संयुक्त किसान मोर्चा प्रदेश के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर लगाए गए आरोपों को सत्य नहीं मानता अथवा वह उन लोगों को अपने साथ नहीं मानता, जो आरोप लगा रहे हैं।

वैसे दोनों बाते भी हो सकती हैं, क्योंकि कुछ लोगों का कहना है कि मनीष ग्रोवर को घेरने के पीछे एक निर्दलीय विधायक की साजिश है। वह विधायक भी कभी भाजपा के कार्यकर्ता होते थे। उनका काफी प्रभाव भी था और भाजपा के एक बड़े नेता को उनको वरदहस्त भी था। लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। टिकट उनके प्रतिस्पर्धी को मिल गया, हालांकि वह हार गया और निर्दलीय लड़े नेता जी जीत गए। उन्होंने भाजपा सरकार को समर्थन देने के बदले कैबिनेट में मंत्री पद की भी मांग की। नहीं मिला। शायद संचुक्त मोर्चे को यह बात भी पता चल चुकी हो।

यदि मनीष ग्रोवर पर लगे आरोपों की सत्यता पर बात करें तो उनपर आरोप है कि वह जब हिसार में हुई भाजपा की बैठक से अपने घर रोहतक लौट रहे थे तो उन्होंने घेराव कर रहे आंदोलनकारियों की तरफ अश्लील इशारे किए। ग्रोवर इस बात से स्पष्ट इन्कार करते हैं। उनकी गाड़ी में उनके साथ हांसी के विधायक मनोज भयाना भी थे।

वह भी कहते हैं कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं देखा। इसके बावजूद जो लोग मनीष ग्रोवर के घर के समीप रोहतक शहर में टेंट लगाकर धरने पर बैठे हैं, उनका कहना है कि जब तक मनीष ग्रोवर माफी नहीं मांग लेंगे, वे हटने वाले नहीं। लेकिन मनीष ग्रोवर का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। उनपर दबाव बनाया जा रहा है और वह माफी कतई नहीं मांगेंगे। जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे प्रमाण दें। लेकिन दूसरा पक्ष प्रमाण दे नहीं रहा है। प्रशासन ने भी घटना की जांच कराई लेकिन कथित घटनास्थल के इर्दगिर्द लगे सीसीटीवी फुटेज में मनीष ग्रोवर की गाड़ी तो जाती दिख रही लेकिन ऐसा कोई अपकृत्य करते नहीं दिख रहे।

यह भी उल्लेखनीय है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि जब कथित आंदोलनकारियों के आरोपों के विरोध में सामाजिक संगठन मुखर हुए हैं। भाजपा के नेता तो आरोपों को असत्य बता ही रहे हैं, रोहतक के बहुत से व्यापारिक, सामाजिक संगठनों ने मनीष ग्रोवर पर लगे आरोपों को अविश्वसनीय बताते हुए उन्हें समर्थन दिया है। दूसरी तरफ अब तक संयुक्त किसान मोर्चे के किसी नेता ने इस घटना पर कुछ भी नहीं कहा है।

चढ़ूनी का निष्कासन जिस बयान के कारण किया गया है, उसके एक दो आगे-पीछे की ही हिसार की भी कथित घटना है। वैसे चढ़ूनी पर कार्रवाई के पीछे भी कुछ लोग कह रहे हैं कि उन्होंने अपने बयान में स्वर्गीय चौधरी भजनलाल, स्वर्गीय चौधरी बंसीलाल और ओमप्रकाश की चौटाला को तो किसान विरोधी बताया, लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार का जिक्र नहीं किया। ओमप्रकाश चौटाला का नाम लेने से निश्चित रूप से आंदोलन के एक प्रमुख चेहरे राकेश टिकैत क्षुब्ध हुए होंगे, क्योकि उन्हें चौटाला परिवार का करीबी माना जाता है।

वैसे चढ़ूनी पर पहले भी हुड्डा के प्रति साफ्ट कार्नर के आरोप लगते रहे हैं। उधर, मनीष ग्रोवर हुड्डा के प्रबल विरोधी हैं। सिर्फ इसलिए नहीं कि वह भाजपा के नेता हैं। वह रोहतक में हुड्डा को चुनौती देने वाले प्रमुख नेता भी हैं। संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं को यह बात भी पता तो होगी ही। यदि सारी कड़ियां जोड़ें तो स्पष्ट हो जाता है कि संयुक्त किसान मोर्चा नहीं चाहता कि ऐसा कोई संदेश जाए कि वह किसी राजनीतिक दल के नेता को भाव देने के पक्ष में है न ही अपुष्ट आरोप लगाने वालों का साथ देने के पक्ष में है।

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