सफेद सच: ओमप्रकाश चौटाला व नीतीश कुमार में क्या खिचड़ी पकी, न यहां कुर्मी न वहां जाट, पढ़ें हरियाणा की और भी खबरें

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला व बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बीच मुलाकात हुई लेकिन अब राजनीति की बात की जाए तो बिहार में जाट नहीं हैं और हरियाणा में कुर्मी। आइए हरियाणा के साप्ताहिक काम सफेद सच में ऐसी ही खबरों पर नजर डालते हैं।

Kamlesh BhattTue, 03 Aug 2021 02:04 PM (IST)
ओम प्रकाश चौटाला व नीतीश कुमार की फाइल फोटो।

जगदीश त्रिपाठी, हिसार। हरियाणा के पांच बार मुख्यमंत्री रहे चौधरी ओमप्रकाश चौटाला का बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गुरुग्राम स्थित अपने आवास पर भोजन करना चर्चा का विषय है। नीतीश कुमार स्वयं चौटाला के आवास पर पहुंचे थे। अब भोजन हुआ होगा तो बात भी हुई होगी। जाहिर है कि पारिवारिक बातें तो हुई होंगी, लेकिन कुछ ऐसी राजनीतिक बातें भी हुई होंगी, दोनों ने बाजरे और धान के भाव पर तो चर्चा नहीं ही की होगी। लेकिन राजनीति की बात हुई भी होगी तो क्या हुई होगी, दोनों अपने अपने प्रदेश में एक-दूसरे को मदद कर सकेंगे, ऐसा लगता तो नहीं है। फिर मोदी से बैर लेकर नीतीश कुमार चौटाला से क्यों जुड़ेंगे? बिहार में जाट मतदाता हैं नहीं, जिन पर चौटाला प्रभाव डाल सकते हों। चौटाला को भी कोई फायदा नीतीश नहीं पहुंचा पाएंगे, क्योंकि बिहार में उनकी स्वजातीय कुर्मी मतदाताओं पर पकड़ है, लेकिन हरियाणा में कुर्मी नहीं हैं।

मनोहर अच्छे, पर नवीन नायक

ओलिंपिंक के सेमीफाइनल में भारतीय महिला हाकी टीम के पहुंचने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने महिला टीम को बधाई दी, लेकिन यह जोड़ने से नहीं चूके कि टीम में नौ खिलाड़ी हरियाणा से हैं। हालांकि उन्होंने अपनी छोरियों की प्रशंसा की, लेकिन यह नहीं कहा कि हमारी छोरी ने सात गोल न रोके होते तो टीम न जीतती। दूसरी तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने हद कर दी। पुरुष टीम को बधाई देते हुए कहा कि खुश हूं कि तीनों गोल पंजाब के खिलाड़ियों ने किए। यानी अगर अन्य प्रदेशों के खिलाड़ियों ने किए होते तो खुश न होते। यह बात अलग है कि जब हाकी टीमों को कोई स्पांसर करने को तैयार नहीं था तो वह ओडि़सा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक थे, जिन्होंने स्पांसर किया। दोनों टीमों को उत्तम व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं, जिसके बेहतर परिणाम सामने हैं, लेकिन औरों की तरह श्रेय लेने के लिए उन्होंने शोर नहीं मचाया।

कुछ तो मजबूरियां रहीं होगी

इंटरनेट मीडिया पर अब भाजपा के पक्ष में बैटिंग करने वालों में एक अति आक्रामक नाम और जुड़ गया है, हेमंत सिंह फौगाट का। दिलचस्प यह भी कि हेमंत भाजपा नेता नहीं हैं। अभी दस-पंद्रह दिन पहले तक जबरदस्त कांग्रेसी होते थे। हुड्डा के घनघोर समर्थक, लेकिन इधर न जाने क्या हुआ किया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल और प्रधानमंत्री मोदी की जय जयकार करने लगे। हेमंत नेता भले न हों. लेकिन हरियाणा में इंटरनेट मीडिया की जानी मानी पर्सनाल्टी हैं। जब तक हुड्डा के लिए घनघोर बैटिंग कर रहे थे, तब तक वह हुड्डा के विरोधियों के निशाने पर थे। अब भाजपा के विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं, लेकिन हिसार के रहने वाले हेमंत को फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वह टाकिंग प्वाइंट पहले भी थे, अब भी हैं। हेमंत ने पाला क्यों बदला, पता नहीं- लेकिन कुछ तो मजबूरियां रहीं होंगी, वरना यूं ही कोई बेवफा नहीं होता।

जाएं तो जाएं कहां

चौधरी बीरेंद्र सिंह को सात साल हो गए कांग्रेस से भाजपा में आए हुए। उनके साथ न ट्रेजेडी हुई, न कामेडी। लेकिन आजकल चिंतित हैं। उनके विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उचाना पर उप मुख्यमंत्री दुष्यंत का कब्जा है। गठबंधन रहा तो उनके परिवार के किसी सदस्य को टिकट नहीं मिलेगा। हिसार लोकसभा सीट से उनके पुत्र बृजेंद्र सिंह सांसद हैं। दुष्यंत को हराकर जीते थे। गठबंधन होने पर जजपा को भाजपा ने एक भी लोकसभा सीट दी, जो गठबंधन धर्म के अनुसार देनी ही पड़ेगी तो वह हिसार होगी, क्योंकि दुष्यंत वहां से सांसद रह चुके हैं। ऐसी स्थिति में चौधऱी साहब कभी ओमप्रकाश चौटाला के साथ चार-चार घंटे चर्चा करते हैं तो उनके समर्थक आम आदमी पार्टी के सुशील गुप्ता से नजदीकी बना रहे हैं। सुशील जब कांग्रेस में होते थे तो चौधरी साहब के प्रिय होते थे। लोग कहते हैं कि चौधरी साहब सोच रहे हैं- जाएं तो जाएं कहां?

 

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