Weather Update: हरियाणा में ठंड ने तोड़ा चार सालों का रिकार्ड, हिसार में दर्ज हुई सबसे ठंडी रात

पहाड़ से आई बर्फीली हवा ने चार साल बाद नवंबर में हरियाणा में ठंडी रातों का रिकार्ड तोड़ दिया है। अभी तक प्रदेश में नवंबर में सबसे ठंडी हिसार की रात रही है यहां तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था।

Rajesh KumarSat, 27 Nov 2021 05:26 PM (IST)
हरियाणा में ठंड ने तोड़ा चार सालों का रिकार्ड।

वैभव शर्मा, हिसार। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा ने प्रदेश में नवंबर काे सीजन का सबसे ठंडा महीना बनाने का काम किया है। इस माह में सर्वाधिक कम 6.3 डिग्री सेल्सियस रात्रि तापमान दर्ज किया गया। इस प्रकार की ठंड चार साल बाद पड़ी है। इसके साथ ही अभी तक तापमान में कमी जारी है। रातें ठंडी होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 40 वर्षों का औसत रात्रि तापमान भी इस तापमान से अधिक है। नवंबर में हिसार की ठंड ने पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कई शहरों के रात्रि तापमान को पीछे छोड़ दिया। रातों को ठंड का असर अभी तक जारी है। शुक्रवार को हिसार में सामान्य से तीन डिग्री कम रहकर 8.5 डिग्री सेल्सियस रात्रि तापमान दर्ज किया गया। नवंबर में ठंड अधिक पड़ने का कारण मौसम विज्ञानी बारिश न होने से जोड़ रहे हैं

नवंबर की रातों में अधिक ठंड पड़ने का यह है कारण

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. मदन खिचड़ बताते हैं कि वर्तमान में प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हो रहा है। बल्कि सभी ईरान ईराक से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के रास्ते हिमाचल प्रदेश होते हुए हिमालय की तरफ जा रहे हैं। जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है। इसके बाद पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली हवा मैदानी क्षेत्रों को ठंडा कर रही हैं। अक्सर पश्चिमी विक्षोभ के मैदानी क्षेत्रों में आने और अरब सागर से आई नमीयुक्त हवा मिलकर बारिश करती हैं तो तापमान बढ़ भी जाता है। मगर इस बार अरब सागर में मजबूत साइक्लोनिक सर्कुलेशन नहीं बन रहा। यहां पर पूर्व में हवा चली तो गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कुछ स्थानों पर बारिश हुई। मगर इससे आगे यह हवा सक्रिय नहीं हुईं। हालांकि आम दिनों की तुलना में सर्दी के मौसम में हरियाणा तक अरब सागर या बंगाल की खाड़ी से कम ही हवा पहुंच पाती है क्योंकि हरियाणा काफी ऊपर स्थित है। वहीं प्रदेश तक पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव भी नहीं पहुंचा। लिहाजा कोई वेदर सिस्टम न बनना भी तापमान गिरने का एक कारण रहा।

क्या होता है पश्चिमी विक्षोभ

पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यरेखा-क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली वह बाह्य- उष्ण कटिबंधीय आंधी है जो सर्दी में भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भागों में अकस्मात मैदानी क्षेत्रों में बारिश तो पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी ले आती है। यह बारिश मानसून की बरसात से भिन्न होती है। बाह्य-उष्णकटिबंधीय आंधियां विश्व में सब जगह होती हैं। इनमें नमी सामान्यत: ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच जाती है, जबकि उष्ण कटिबंधीय आंधियों में आर्द्रता निचले वायुमंडल में बनी रहती है। भारतीय महाद्वीप में जब ऐसी आंधी हिमालय तक जा पहुंचती है तो नमी कभी-कभी बारिश के रूप में बदल जाती है। यह ईरान ईराक अफगानिस्तान होते हुए भारत में प्रवेश करते हैं। हर माह में पश्चिमी विक्षोभ चार से पांच आते हैं।

पिछले पांच वर्षों में नवंबर में सबसे ठंडे दिन

20 नवंबर 2021- 6.3

22 व 29 नवंबर 2020- 6.4

12 नवंबर 2019- 8.8

7 नवंबर 2018- 7.5

24 नवंबर 2017- 5.5

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