दिल्ली के झाड़ौदा बॉर्डर खुलवाने के लिए ग्रामीणों ने लगाया जाम, राकेश टिकैत के खिलाफ की नारेबाजी

झाड़ौदा बॉर्डर खुलवाने के लिए मौके पर प्रदर्शन करते किसान

ग्रामीणों ने कहा कि झाड़ौदा में करीब 16000 एकड़ जमीन है। यहां सब्जियों की फसल बर्बाद हो रही है। बॉर्डर बंद होने से जो गोभी ₹10 प्रति किलो के हिसाब से बिकती थी आज वो 50 पैसे प्रति किलो के हिसाब से भी नहीं बिक रही है।

Manoj KumarMon, 01 Mar 2021 12:35 PM (IST)

बहादुरगढ़, जेएनएन। दिल्ली के गांव झाड़ौदा के किसान बॉर्डर बंद होने से सोमवार सुबह बिफर गए और गांव के बस स्टैंड पर जाम लगा दिया। भारी संख्या में महिलाओं और ग्रामीणों ने यहां जाम लगाकर प्रदर्शन किया। स्‍थानीय किसानों ने राकेश टिकैत और बॉर्डर पर डटे किसानों के खिलाफ नारेबाजी की। झाड़ौदा के ग्रामीणों का कहना है कि बॉर्डर जाम कर दिए जाने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। दोपहर दो बजे तक भारी तनाव बना रहा। मौके पर आला अधिकारी पहुंचे जिन्‍होंने तीन दिन में बॉर्डर खुलवाने का समय मांगा। इस आश्‍वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला।

किसान ओमप्रकाश, संजय , सुरेंद्र आदि ने बताया कि झाड़ौदा में करीब 16000 एकड़ जमीन है। यहां सब्जियों की फसल बर्बाद हो रही है। यहां पर गोभी की फसल मुख्य होती है। जो गोभी ₹10 प्रति किलो के हिसाब से बिकती थी आज वो 50 पैसे प्रति किलो के हिसाब से भी नहीं बिक रही है। गांव का बॉर्डर बंद होने से हरियाणा दिल्ली आने जाने के लिए कैब गांव के खेतों के रास्ते से आ जा रहे हैं। इससे उड़ती धूल पर फसल पर जमा हो रही है जिससे गोभी की फसल खराब हो रही है।

सब्जियों की फसल खराब हो रही है। इससे उनको नुकसान सामना करना पड़ रहा है उन्होंने बताया कि 49 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से खेती की जमीन ली है। गोभी की फसल खराब होने की वजह से उन्हें बंटाई कर पैसे भी नहीं मिल पा रहे हैं। इसी वजह से उनमें आक्रोश है।  इसीलिए किसान बॉर्डर जल्द से जल्द खुलवाने की मांग कर रहे है। किसानों का कहना है कि जब तक बॉर्डर नही खोलेंगे, तब तक जाम नहीं खोलेंगे। झाड़ौदा बॉर्डर पर अब वैक्लिपक रास्‍ता भी बंद करने के कारण राहगीर भी परेशान हुए। लोग पैदल ही दिल्‍ली की ओर निकल लिए।

बता दें कि टिकरी बॉर्डर और सिंघु बॉर्डर पर मुख्‍य रास्‍ते जाम हैं। इसके चलते स्‍थानीय लोग लंबे समय से परेशान है। उनका कहना है कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू किए गए किसान आंदोलन के बॉर्डर जाम से उन्‍हें परेशानी हो रही है। बहादुरगढ़ में कई छोटी फैक्ट्रियां भी बंद हो चुकी हैं तो बहुत से लोगों को रोजगार भी छिन चुका है।

 

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