झज्‍जर में वर्चुअल मीटिंग से जुड़कर अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ रहे व्यापारी, चालान का हो रहा डर

आड-इवन को समाप्त करते हुए 9 बजे से 8 बजे तक कारोबार करने का समय दिया गया। जिसमें रविवार के लिए प्रतिबंध का कोई जिक्र नहीं था। लेकिन झज्जर शहर के बाजार में व्यापारियों को दुकान खोलने से ज्यादा चालान का डर सताता है।

Manoj KumarSun, 20 Jun 2021 05:04 PM (IST)
झज्‍जर में पुलिस के आने के बाद चोर बन रहे व्यापारी, भागना पड़ रहा गलियों में

झज्जर, जेएनएन। झज्‍जर में पिछले सप्ताह सरकार के स्तर पर कारोबार में छूट दी गईं। आड-इवन को समाप्त करते हुए 9 बजे से 8 बजे तक कारोबार करने का समय दिया गया। जिसमें रविवार के लिए प्रतिबंध का कोई जिक्र नहीं था। लेकिन, झज्जर शहर के बाजार में व्यापारियों को दुकान खोलने से ज्यादा चालान का डर सताता है। कारण कि पुलिस की टीम दिन भर बाजार में घूमती है। पुलिस से बचने के लिए या तो व्यापारी चोरों की तरह गलियों में घुसते है या फिर उन्हें चालान कटवाना पड़ता है। जबकि, प्रशासनिक स्तर पर जिलाधीश की ओर से ऐसे कोई आदेश है ही नहीं।

व्यापारियों ने एसडीएम शिखा से भी बात की तो उन्होंने भी बताया कि रविवार बंद को लेकर निर्देश नहीं हैं। कुल मिलाकर, इस परिस्थितियों में कारोबारियों का अतिरिक्त नुकसान हो रहा है। यह बात प्रमुखता से रविवार को व्यापारी एकता मंच के बैनर तले आयोजित की गई एक वर्चुअल मीटिंग में निकलकर सामने आईं। जिसमें व्यापारियों ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि बहादुरगढ़, बेरी, बादली आदि क्षेत्रों में कारोबार हो रहा हैं। लेकिन, झज्जर में अलग नियमों को लागू करते हुए परेशान किया जा रहा है।

समस्याओं का समाधान ढूंढ़ रहे व्यापारी : मंच की ओर से आयोजित की गई इस बैठक की अध्यक्षता संयुक्त रूप से व्यापारी नेता गोपाल गोयल शोरे वाले एवं वीरेंद्र यादव ने की। जबकि, संचालक केडी शर्मा एवं विनीत नरूला ने किया। जिन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से कारोबारी अब समर्पित नजर आ रहे हैं। अध्यक्षता कर रहे व्यापारी शहर के प्रमुख चौक पर अपना कारोबार चला रहे हैं। बेशक ही वे दो-दो कैमरा को सड़क की ओर से करते हुए व्यापारियों के लिए लगवाएंगे। साथ ही अन्य को भी प्रेरित करेंगे। ताकि, सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हों।

इधर, व्यापारी नेता जगप्रवेश उर्फ बब्लू ने कहा कि बाजार में चौकीदार लगाए जाने का जिस तरह से रास्ता निकाला जा रहा है। वह काबिले तारीफ है। अगर गांव में चौकीदार लगाए जा सकते हैं तो बाजार में क्यों नहीं। मंडी से प्रधान सुनील राव, काके तलवार, विनीत पोपली आदि ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आर्थिक रूप से इन दिनों में व्यापारी कमजोर हुआ है। खास तौर पर रेहड़ी आदि लगाने वालों को घर की गुजर बसर चलाना मुश्किल हो रहा है। जिन्होंने अपनी दुकान किराए पर ले रही हैं या स्टाफ को वेतन देना है, वह चिंतित है। कुल मिलाकर, इन समस्याओं का हल इसी तरह से निकल सकता है कि कारोबार की स्थिति को बेहतर बनाते हुए व्यापार का समय बढ़ाया जाए।

दिल्ली, रोहतक खरीदारी के लिए जाने वाले व्यापारी बना रहे अलग नीतियां : मीटिंग के दौरान यह भी चर्चा में आया कि कुछ व्यापारी अपनी खरीदारी के लिए दिल्ली या रोहतक जाते है। शायद वह जा भी इसीलिए पाते है क्योंकि, वहां पर छुट्टी नहीं होती। ऐसी स्थिति में वे बाजार बंद रखने की हिमायत करते हैं। जिससे संशय की स्थिति आन बनी हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस-प्रशासन का नाम लेकर गलत सूचनाएं भी प्रसारित हो रही हैं। जो कि उचित नहीं है। इधर, हलवाई एसोसिएशन के प्रधान राजेश सैनी के मुताबिक पशुपालक तो रविवार को भी दूध लेकर बाजार में आते हैं।

ऐसे में अगर एक दिन भी छुट्टी रहेगी तो उनका दूध कहा पर जाएगा। अगर किसान का मंडी में रोज सामान बिकता है तो पशुपालक अपने उत्पाद को कहां पर बेचेगा। यह व्यवस्था को नीतियां बनाने से पहले देखना चाहिए। इधर, व्यापारी नेता ताराचंद भूटानी, वरुण जिंदल, तरुण वधवा, भूषण सलूजा, नीरज पोपली ने कहा कि मौजूदा समय में संगठित होकर कारोबार की बेहतरी के लिए कार्य करना चाहिए।

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