Tokyo Olympics: विकासकृष्ण के काम न आई प्रो बॉक्सिंग तकनीक, तीसरे ओलंपिक में हाथ लगी निराशा

भिवानी के मुक्केबाज विकासकृष्ण का टोक्यो ओलंपिक में सफर खत्म हो गया है। एक बार फिर आंख के पास लगे कट ने उन्हें परेशान किया। मैच देखने के लिए खेल प्रेमियों उत्साह था। लेकिन उनकी हार ने लोगों को निराश किया।

Umesh KdhyaniSat, 24 Jul 2021 06:12 PM (IST)
बॉक्सिंग कोच बोले, स्कोरिंग के गेम में विकास बढ़त नहीं ले पाए।

जागरण संवाददाता, भिवानी। शनिवार का दिन विकास के लिए अच्छा नहीं रहा। इसे विकासकृष्ण की यादव की किस्मत कहें या कुछ और पर यह सच है कि तीसरे ओलंपिक में पदक की आस उनके हाथ से खिसक गई। परिवार के सदस्यों और खेल प्रेमियों को उनसे टोक्यो ओलंपिक में पदक की बहुत उम्मीद थी लेकिन खेल प्रेमियों को निराशा ही मिली।

विकास की हार से निराश सबकी जुबान पर यही था कि विकास अपना नेचुरल गेम नहीं खेल पाए। जिस जापानी बॉक्सर को उन्होंने ओलंपिक क्वालिफायर में हराया था, उसी से हार गए। जापानी बॉक्सर ओकाजावा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और वह मैच निकालने में कामयाब हो गया। उनकी हार में उनकी आंख के पास लगा कट विलेन साबित हुआ और उनका ओलंपिक में सफर खत्म हो गया।

मुक्केबाजी के माहिरों ने बताया, क्यों हारे विकासकृष्ण

मुक्केबाजी स्कोरिंग का गेम, विकास इसमें पिछड़ा 

मुक्केबाजी कोच संदीप सिंह ने कहा कि मुक्केबाजी स्कोरिंग का गेम है। अपने मुकाबले में विकासकृष्ण ने प्रोफेशनल मुक्केबाजी की तकनीक को अपनाया जो सफल नहीं हो पाई। प्रतिद्वंद्वी जापानी मुक्केबाज स्कोरिंग करने में कामयाब रहा। यूं कह सकते हैं कि विकास का दिन अच्छा नहीं रहा। हालांकि विकास ने प्रयास अच्छे किए लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। 

विकास अपनी आदत अनुसार नहीं खेल पाया

मुक्केबाजी कोच संजय श्योराण ने कहा कि  विकास हमेशा प्रतिद्वंद्वी पर हावी होकर खेलता है। उसने प्रयास भी किया लेकिन जापानी मुक्केबाज उससे दूरी बना कर खेलता रहा और उसने अंक लेने पर ध्यान दिया। स्कोरिंग के इस गेम में विकास बढ़त नहीं ले पाया और उसी जापानी मुक्केबाज से हार गए जिसको ओलिंपिक क्वालीफाई मुकाबले में पांच शून्य से हराया था। 

तीसरे ओलंपिक में भी किस्मत ने नहीं दिया साथ

मुक्केबाजी कोच विष्णु भगवान ने कहा कि  विकास यादव का दिन अच्छा नहीं रहा। उसकी आंख के निचले हिस्से पर कट भी लग गया था। इससे भी उसका खेल प्रभावित रहा। चाहे जो हो, वह खेल प्रेमियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए। विकास का यह तीसरा ओलिंपिक रहा। जिसमें किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। विकास की तैयारी अच्छी थी और सबको विकास से बहुत ज्यादा उम्मीद थी। 

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