वातावरण में ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए सिरसा में विभाग लगाएगा अब बड़ और पीपल के पौधे

हरियाणा में प्रत्येक जिले में दस-दस हजार पौधे लगाए जाने का दिया गया लक्ष्य

आक्सीजन की बढ़ोतरी के लिए वन विभाग ने दूसरे पेड़-पौधों के साथ ही बड़ और पीपल लगाए जाने का फैसला लिया है। वन विभाग इन दोनों पौधों को सीमित मात्रा में लगाता रहा है लेकिन पहली बार दस-दस हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है।

Manoj KumarMon, 10 May 2021 05:18 PM (IST)

सिरसा, जेएनएन। कोरोना महामारी के इस दौर में पूरे देश में आक्सीजन की कमी गंभीर हालात पैदा कर रही है। वातावरण में आक्सीजन की बढ़ोतरी के लिए वन विभाग ने कदम आगे बढ़ा दिए हैं और अब दूसरे पेड़-पौधों के साथ ही बड़ और पीपल लगाए जाने का फैसला लिया है। अभी तक वन विभाग इन दोनों पौधों को सीमित मात्रा में लगाता रहा है लेकिन पहली बार प्रत्येक जिले को दस-दस हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य दिया गया है।

धार्मिक आस्था के साथ प्राणवायु है दोनों पौधे

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पीपल सबसे अधिक आक्सीजन देता है। बड़ भी अधिक आक्सीजन देने वाले पेड़ की श्रेणी में है। दोनों ही धार्मिक आस्था से भी जुड़े हुए हैं इसलिए इनकी लकड़ी का प्रयोग भी हवन इत्यादि में किया जाता है। उसके पीछे भी अधिक आक्सीजन एक आधार रहता है। धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के साथ ही दोनों पौधों की लंबी आयु है और वर्षों तक मुफ्त आक्सीजन का बड़ा स्रोत है।

तालाब को मिलेगी प्राथमिकता

वन विभाग के अनुसार नर्सरियों में बड़ और पीपल के पौधे हैं। पहले इन्हें ही लगाया जाएगा। प्राथमिकता तालाब व जोहड़ की रहेगी। जिन गांवों में तालाब के अलावा भी मांग आएगी तो भी वहां पौधे लगाए जाएंगे। इस बार प्रयास ज्यादा बड़ और पीपल एक स्थान के आसपास लगाने का रहेगा। निर्धारित दूरी रखकर लाइन में बड़ और पीपल लगाए जाएंगे।

वन्य जीवों के लिए भी बड़-पीपल जरूरी

जिला वन अधिकारी रामकुमार जांगड़ा ने बताया कि वन्य जीवों के लिए भी बड़ व पीपल बहुत जरूरी है। दोनों पर लगने वाले फल को पक्षी खाते हैं और जहां बड़ व पीपल है वहां अधिक पक्षी रहते हैं। इसलिए भी वन विभाग बड़ और पीपल को बढ़ावा दे रहा है।

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