Tokyo Paralympics:झज्जर के तीन खिलाड़ी पैरालिंपिक में दिखाएंगे दमखम, PM मोदी ने भी बढ़ाया खिलाड़ियों का हौंसला

24 अगस्त से टोक्यो में पैरालिंपिक खेलों का आयोजन होने जा रहा है। इन खेलों में झज्जर के तीन खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। पीएम मोदी ने खिलाड़ियों से वीडियो काफ्रेंसिंग के जरिये बात कर खिलाड़ियों का हौंसला बढ़ाया।

Umesh KdhyaniTue, 17 Aug 2021 08:37 PM (IST)
24 अगस्त से 5 सितंबर तक टोक्यो में होगा पैरालंपिक

जागरण संवाददाता, झज्जर। टोक्यो में आयोजित पैरालिंपिक में जिले के तीन खिलाड़ी अपना दमखम दिखाएंगे। बता दें कि मंगलवार को इन सहित सभी खिलाड़ियों का हौंसला बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खिलाड़ियों से आनलाइन बातचीत की। साथ ही शुभकामनाएं व बधाई दी। जिला के तीन खिलाड़ियों का चयन होने पर खुशी का माहौल है। जिनमें गांव अकेहड़ी मदनपुर निवासी राहुल जाखड़ शूटिंग में, गांव माछरोली निवासी रामपाल हाई जंप में व बहादुरगढ़ की गली नंबर तीन राधा कालोनी निवासी योगेश डिस्कस थ्रो में भाग लेंगे।

तीनों खिलाड़ी कड़ा अभ्यास करते हुए पसीना बहा रहे हैं, ताकि देश के लिए मेडल हासिल कर सकें। पहले टोक्यो ओलंपिक में जिले के पांच खिलाड़ियों ने भाग लिया। वहीं अब टोक्यो पैरालंपिक में जिले के तीन खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। देशभर के कुल 54 खिलाड़ी नौ खेलों में भाग लेते हुए पैरालंपिक में अपनी प्रतिभा दिखाने को तैयार है। 24 अगस्त से 5 सितंबर तक आयोजित टोक्यो पैरालंपिक को लेकर जिले के तीनों खिलाड़ियों से लोगों को उम्मीद है। जो देश को मेडल दिलाकर नाम रोशन करें।

पांच साल की उम्र में पोलियो से ग्रस्त होने के बाद पैरालंपिक तक का सफर

विश्व में द्वितीय रैंकिंग हासिल करने वाले गांव अकेहड़ी मदनपुर निवासी राहुल जाखड़ पैरालंपिक के लिए पसीना बहा रहा है। राहुल जाखड़ ने बताया कि पैरालंपिक में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत की और हौसला बढ़ाया। फिलहाल वे दिल्ली में शूटिंग का अभ्यास कर रहे हैं। राहुल जाखड़ के भाई राजेश जाखड़ ने बताया कि राहुल जब पांच साल का था तो वह पोलियो ग्रस्त हो गया था। जिसके कारण उसके एक पांव में दिक्कत है। इसके बाद भी राहुल ने कभी हार नहीं मानी। अपनी पढ़ाई करता रहा। राहुल की ड्राइंग अच्छी होने के कारण प्राइवेट स्कूल में ड्राइंग टीचर भी बना। इसके बाद परिवार के साथ अपनी गुरुग्राम में कंपनी में काम किया। करीब पांच साल पहले वहां पड़ोस के ही एक युवक शूटिंग करता था, उसके साथ राहुल भी गया। जहां पर शूटिंग के प्रति राहुल का रुझान बढ़ा।

पैरालंपिक शूटर राहुल जाखड़।

इसी दौरान इंदौर से स्नातक करके वापस लौटते समय कई साथी मिले, उन्होंने भी राहुल का हौसला बढ़ाया। जिसके बाद राहुल ने परिवार वालों के समक्ष शूटिंग करने की इच्छा जाहिर की। राजेश ने बताया कि राहुल की इस इच्छा पर पूरे परिवार ने सहमति जताई। साथ ही उन्होंने खुद कहा था कि जो काम करों पूरी लग्न से करना ताकि उसमें अपनी अलग पहचान व नाम कमा सके। इसके बाद राहुल ने शूटिंग शुरू की और लगातार राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेलों में जीत हासिल करता गया। राहुल ने पेरू के लीमा में आयोजित वर्ल्ड कप में पी-3 पिस्टल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता और 2019 में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप के पी1-10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके अलाव भी अनेक मेडल अपने नाम कर चुका है। अब पैरालंपिक में गोल्ड मेडल के लिए निशाना लगाएगा।

मां की प्रेरणा से शुरू किया डिस्कस थ्रो का अभ्यास और आज पैरालंपिक की तैयारी

डिस्कस थ्रो में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बाद अब बहादुरगढ़ की गली नंबर तीन राधा कालोनी निवासी योगेश पैरालंपिक की तैयारी में जुटे हुए हैं। करीब चार साल पहले डिस्कस थ्रो के अभ्यास की शुरूआत करने वाले योगेश राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत चुके हैं। योगेश ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017 में पढ़ाई के साथ-साथ डिस्कस थ्रो का अभ्यास करना आरंभ किया था। शुरूआत में उनकी मां मीना देवी ने डिस्कस थ्रो के लिए प्रेरणा बनने का काम किया। मां ने खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि शुरूआत में अभ्यास के दौरान थकान भी अधिक होती थी, लेकिन लगातार अभ्यास से अच्छी तैयारी की और मेडल भी अपने नाम किए।

 

पैरालंपिक डिस्कस थ्रो खिलाड़ी योगेश।

योगेश ने बताया कि उनके पिता ज्ञानचंद ने भी उनका अभ्यास करवाने के लिए पूरा समर्थन किया। जिसकी बदौलत 2018 में पंचकूला में आयोजित नेशनल खेलों में गोल्ड मेडल, 2018 में आयोजित बर्लिन ओपन ग्रैंडप्रिक्स में गोल्ड मेडल, 2018 में इंडोनेशिया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में चौथा स्थान, 2019 में फरीदाबाद में आयोजित हरियाणा स्टेट गेम में गोल्ड मेडल, 2019 में आयोजित पेरिस ओपन ग्रैंडप्रिक्स में गोल्ड मेडल, 2019 में दुबई में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल व 2021 में बेंगलुरु में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया।

खेलते समय कटा था हाथ, फिर भी नहीं मानी हार और हाई जंप में बनाई पहचान

टोक्यो पैरालंपिक में चयनित गांव माछरोली निवासी रामपाल पिछले करीब 7-8 वर्षों से हाई जंप का अभ्यास कर रहे हैं। उनके भाई रामकेश ने बताया कि उनके पिता वेदप्रकाश एक किसान हैं। जब रामपाल करीब 4 साल का था तो खेल रहा था। इसी दौरान वह गंडासे के पास चला गया। खेलते-खेलते गंडासे में अपना हाथ दे दिया और इसी दौरान बिजली भी आ गई। बिजली आते ही गंडासा चल पड़ा, जिसके कारण उनका हाथ कट गया। शुरूआत में परिवार ने आर्थिक तंगी भी झेली। लेकिन रामपाल करीब 7-8 साल पहले अपने अन्य साथियों व खिलाड़ियों के साथ खेल रहा था। तब उन्होंने अच्छा हाई जंप लगाया। जिसे देखते हुए उसके साथियों ने हाई जंप की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित किया।

 

पैरालंपिक हाई जंप खिलाड़ी रामपाल।

रामपाल ने अपनी प्रतिभा निखारने के लिए सामान्य खिलाड़ियों के साथ भी अभ्यास किया और अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद रामपाल का हौसला बढ़ता गया। एशियार्ड गेम्स में सिल्वर मेडल भी हासिल किया। पिछली बार भी रामपाल पैरालंपिक में भाग लेने गए थे, लेकिन छठा स्थान मिला। फिलहाल वे खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं और पैरालंपिक के लिए तैयारी कर रहे हैं।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
You have used all of your free pageviews.
Please subscribe to access more content.
Dismiss
Please register to access this content.
To continue viewing the content you love, please sign in or create a new account
Dismiss
You must subscribe to access this content.
To continue viewing the content you love, please choose one of our subscriptions today.