कुछ कार्यक्रमों तक ही सिमटा बैंड बाजे का क्रेज

पुराने दौर में बिना बैंड बाजे फीकी लगती थी शादियों की रौनक

JagranSun, 17 Oct 2021 08:25 AM (IST)
कुछ कार्यक्रमों तक ही सिमटा बैंड बाजे का क्रेज

फोटो : 39 और 40

पुराने दौर में बिना बैंड बाजे फीकी लगती थी शादियों की रौनक

संवाद सहयोगी, हांसी : आज के दौर में हम आधुनिक चीजों को अपनाने में इतना व्यस्त हैं कि उन चीजों को भुलाते जा रहे है जो हमारे पूर्वजों की बड़ी यादगार चीजें रही है। आधुनिक युग की तरक्की के चलते पुराने दौर की जो यादें आ भी हमारे सामने है धीरे-धीरे कम होती जा रही है। एक समय वो भी था जब विवाह शादियों में बैंड-बाजे वाले अपनी मधुर धुन से चार चांद लगाने का काम करते थे। बिना बैंड बाजे के शादियों में रंग नहीं जमता था। यहीं नहीं लोगों को शादियों से चार-चार महीने पहले एडवांस बुकिग करनी पड़ती थी।

पिछले करीब दस सालों से लोग पुरी तरह से डीजे की ओर डायवर्ट हो चुके है। आज बहुत कम ऐसी शादियां होती है जहां बैंड-बाजे वाले नजर आते है। हांसी बैंड एसोसिएशन के प्रधान बलवंत बुमराह बताते हैं कि वे 1983 से वे इस लाइन में है। पहले महिनों पहले एडवांस बुकिग की जाती थी। लोग शादियों के लिए आस-पास के गांव के अलावा हिसार, भिवानी, रोहतक, जींद से लोग आते थे। परंतु आज के समय में सबसे ज्यादा मंदी उनके काम में आई है। उन्होंने बताया शादी से पहले सात बाने होते थे और सात दिन पहले बैंड के लिए पार्टी भेजी जाती थी। इसके अलावा निकासी और फिर ढुका का कार्यक्रम होता था। परंतु आज एक दिन में सारा काम पूरा कर लिया जाता है। पहले वे शादियों के सीजन में एक महीने में अलग-अलग शिफ्टों में 60 से 70 शादियां अटेंड करते थे परंतु आज मात्र 15 से 20 प्रोग्राम भी मुश्किल से हो पाते हैं। एक शादी में 21 से 31 बैंड वाले व्यक्ति जाते थे।

कई खाप लगा चुकी डीजे पर प्रतिबंध

ज्यादातर युवा डीजे पसंद करते हैं, वहीं कई खापों के प्रतिनिधी डीजे पर बैन लगा चुके हैं। कई गांव में डीजे बजाने पर जुर्माना राशि भी निर्धारित की गई है। प्रशासन की ओर से भी बार-बार तेज आवाज में डीजे बजाने से चालान किए जा रहे है। वहीं डीजे के कारण ध्वनि प्रदुषण भी फेल रहा है। अक्सर देखने में आता है कि शादियों में लड़ाई-झगड़े का कारण भी डीजे ही होता है।

कोरोना ने किया बुरा हाल : बलवंत

मस्ताना बैंड आनर बलवंत बताते हैं कि आज के दौर में सबसे ज्यादा मंदी का असर उनके काम पर पड़ा है। कुछ सालों से डीजे के चलते काम कम था और अब कोरोना ने बिल्कुल काम खत्म कर दिया है। यदि यहीं हालात रहे धीरे-धीरे सभी काम छोड़ने पर मजबूर होंगे।

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