शिक्षक हत्‍याकांड : रातभर नहीं सोए बच्चे, अभिभावकों से पूछते रहे अब उन्हें पढ़ाने कौन आएगा

फतेहाबाद में हिसार के शिक्षक की हत्‍या के बाद मंगलवार को स्‍कूल में कोई भी बच्‍चा नहीं पहुंचा

अध्यापक मर्डर मामले में बच्चों के मन में अनेक सवाल उठ रहे है जिनका जवाब अभिभावक भी नहीं दे पा रहे है। रातभर बच्चे सोए नहीं और इसी मामले की जानकारी बार-बार पूछते रहे। जब भी बच्चे की आंख खुलती तो एक ही सवाल पूछते कि अब उन्हें पढ़ाएगा

Manoj KumarTue, 02 Mar 2021 05:39 PM (IST)

फतेहाबाद/भट्टूकलां [सुरेश सोलंकी] शिक्षा के मंदिर में आने वाले हर बच्चे को सवालों का जवाब मिलता है और वो ज्ञानी होकर इसी स्कूल से निकलता भी है। लेकिन सोमवार को अध्यापक मर्डर मामले में बच्चों के मन में अनेक सवाल उठ रहे है जिनका जवाब अभिभावक भी नहीं दे पा रहे है। रातभर बच्चे सोए नहीं और इसी मामले की जानकारी बार-बार पूछते रहे। जब भी बच्चे की आंख खुलती तो एक ही सवाल पूछते कि अब उन्हें पढ़ाएगा कौन। मंगलवार को स्कूल में एक भी बच्चा नहीं आया, हालांकि स्कूल प्रशासन की तरफ से छुट्टी नहीं की गई थी। स्कूल का पूरा स्टाफ आया लेकिन दिनभर वो प्रांगण में बैठे मायूस ही नजर आए। अपने साथी अध्यापक की अपने ही स्कूल में मर्डर होने का चित्रण उनकी आंखों में बार-बार आ रहा है। स्कूल में आए अध्यापक किसी को भी बताने को तैयार नहीं है वहीं ग्रामीण भी चुप्पी साधे हुए है।

सोमवार दोपहर को हिसार जिले के गांव दड़ौली निवासी 32 वर्षीय अध्यापक जितेंद्र की स्कूल में घुसकर दो बदमाशों ने गाली मारकर मर्डर कर दिया। जिस समय घटना हुई उस समय स्कूल में एक भी बच्चा नहीं था। लेकिन घटना बढ़ी थी ऐसे में हर किसी के पास सूचना भी पहुंच गई। मंगलवार को भी गांव में दहशत रही इसी कारण अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। राजकीय मॉडल प्राथमिक संस्कृति विद्यालय रामसरा में 7 अध्यापकों की नियुक्ति थी। जिसमें गांव दड़ौली निवासी जेबीटी जितेंद्र की हत्या के चलते मंगलवार को छह अध्यापक स्कूल प्रांगण में पहुंचे। घटना बेहद दर्द भरी थी, हर स्टाफ सदस्य के बच्चों में इसका बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गांव रामसरा में भी बच्चों की संख्या आधे से कम रही। इस विद्यालय में 21 कर्मचारी कार्यरत हैं जहां 355 बच्चों ने अपना दाखिला करवाया हुआ है। सोमवार को इस विद्यालय में 340 के करीब विद्यार्थी आए थे। लेकिन इस घटना के चलते मंगलवार को यहां करीब 170 बच्चे आए। स्कूल प्रिंसिपल कमला देवी व अध्यापक लीलू राम ने बताया कि प्राथमिक स्कूल में जिस तरह अध्यापक की हत्या हुई उसके बाद इस स्कूल में भी बच्चे कम ही पढ़ने के लिए आए है।

अभिभावक भी सहमें हुए

गांव रामसरा निवासी बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे तो रात भर सोए ही नहीं। कुछ बच्चे तो यह भी कह रहे हैं कि उनके अध्यापक की स्कूल में क्यों हत्या की गई। यह बात उनके बच्चों के दिमाग में भी असर डाल रही है। इसके अलावा कई बच्चे तो ये कह रहे थे कि अगर वो स्कूल में होते तो उन्हें भी गोली लग सकती थी। सुरक्षा दृष्टि से देखा जाए तो यहां राजकीय प्राथमिक मॉडल संस्कृति स्कूल की दीवार भी कम है। ऐसे में चारदीवारी को फांदकर कोई भी अंदर प्रवेश कर सकता है।

-- -- -- स्कूल की छुट्टी नहीं की गई थी बल्कि बच्चे आए नहीं। स्कूल में बड़ी वारदात होने के कारण सहमें हुए है। हम भी सहमें हुए है ऐसे में बच्चों पर भी असर पड़ा है। अब अभिभावकों से बात करके बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कहेंगे। अगर बच्चे स्कूल नहीं आएंगे तो पढ़ाई पर असर पड़ेगा।

सुरेश कुमार

मुख्याध्यापक राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक स्कूल रामसरा।

 

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