अफसरों को ट्रैक्टर पर बैठाकर चौटाला गांव पहुंचे ताऊ देवीलाल के पोते, फिर लगाई अधिकारियों ने दौड़, ये है मामला

चौटाला गांव में बारिश के चलते एक चौथाई इलाके में बाढ़ जैसे हालात दिखे। लोगों की शिकायत पर रवि चौटाला यहां पहुंचे। अधिकारियों को ट्रैक्टर पर बैठाकर हालात दिखाए। इसके बाद अफसरों ने डीजल पंप लगाकर निकासी शुरू करवाई।

Umesh KdhyaniFri, 30 Jul 2021 08:06 PM (IST)
ट्रैक्टर पर अधिकारियों को बैठाकर चौटाला गांव के हालात दिखाते रवि चौटाला।

संवाद सहयोगी, डबवाली (सिरसा)। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला तथा बिजली मंत्री रणजीत सिंह के पैतृक गांव चौटाला में बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। ग्रामीणों की समस्या का समाधान करने रवि चौटाला गांव में पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर बुलाया और ट्रैक्टर पर बैठाकर पहुंच गए चौटाला गांव। यहां उन्हें हालातों से वाकिफ कराया।

रवि ने ट्रैक्टर का स्टेयरिंग खुद थाम लिया। साथ में नायब तहसीलदार ओमबीर, बीडीपीओ रमेश कुमार, नहर विभाग के एसडीओ आरपी गोदारा, जेई अंकित कुमार को बैठा लिया। ट्रैक्टर से पूरे गांव का निरीक्षण किया। कई जगहों पर उन्होंने पानी के बीचों-बीच ट्रैक्टर रोक लिया। रवि चौटाला ने कहा कि एक चौथाई हिस्सा डूबा हुआ है। अकेले अगुणिया वास में करीब 70 घर डूबे हुए हैं। घरों में दरारें तक आ गई हैं। दोबारा बारिश आ गई तो आधा गांव डूब जाएगा। बाढ़ जैसे हालात पहले ही बन रहे हैं। उन्होंने पानी निकासी करने की मांग के साथ ही चेतावनी दी कि चार घंटे में काम नहीं हुआ तो अधिकारियों को खुद पानी निकालना पड़ेगा। इसके तुरंत बाद अधिकारी हरकत में आए और डीजल पंप लगाकर पानी निकासी शुरू करवा दी। स्टेडियम के पास दो डीजल पंप तथा गांव के जोहड़ के समीप जनस्वास्थ्य विभाग के डीजल पंप के साथ एक अन्य पंप लगाया गया है।

डीजल पंप फिट कर निकासी शुरू कीः बीडीपीओ

बीडीपीओ रमेश कुमार ने कहा कि रवि चौटाला ने ट्रैक्टर पर गांव का निरीक्षण करवाया था। गांव पानी से भरा हुआ था। जोहड़ ओवरफ्लो हो रहे थे। निरीक्षण के बाद एसडीओ तथा जेई ने डीजल पंप फिट करके पानी निकासी शुरू कर दी है।

रवि बोले, भतीजे और ताऊ ने नहीं उठाया फोन 

वरिष्ठ इनेलो नेता रवि चौटाला ने कहा कि भारी बरसात के कारण गांव का एक चौथाई इलाके में पूरी तरह से पानी भर गया है। ग्रामीणों ने समस्या उनके समक्ष उठाई थी। उन्होंने सुबह नौ बजे भतीजे दुष्यंत तथा ताऊ रणजीत सिंह को फोन किया था। वह तो समस्या का स्थायी हल चाहते थे। दोनों ने उनका फोन नहीं उठाया। इसलिए अधिकारियों को बुलाकर मौका दिखाया। ट्रैक्टर के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं था।

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