भाई के शौक को बना लिया जुनून, सिरसा की 10वीं की छात्रा ने नेशनल में साधा गोल्ड पर निशाना

सिरसा की तान्या तीरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर पर धाक जमा चुकी है। अभी 10वीं की छात्रा है। छोटी सी उम्र में नेशनल लेवल पर चार गोल्ड मेडल जीत चुकी है। हरियाणा की अंडर 14 टीम में भी शामिल है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने महाराष्ट्र जाना था।

Umesh KdhyaniFri, 25 Jun 2021 03:40 PM (IST)
सिरसा में तीरंदाजी की प्रैक्टिस करती तान्या वर्मा।

जागरण संवाददाता, सिरसा। बड़ा भाई शौक-शौक में तीरंदाजी सीखने लगा तो तानिया वर्मा भी साथ जाने लगी। कोच आरएस नेहरा ने कहा कि तानिया भी अपने भाई के साथ आ जाएगी। कुछ समय बाद भाई तो आइआइटी के लिए सीकर चला गया परंतु तानिया ने अपना प्रशिक्षण जारी रखा।

तीन साल की अथक मेहनत के बाद तानिया तीरंदाजी में पारंगत होती गई। वायुसेना केंद्र स्थित केंद्रीय विद्यालय नंबर एक की छात्रा तानिया राष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड जीत चुकी है। इसके साथ ही अंडर-14 की हरियाणा टीम में भी उसका चयन हो गया। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए महाराष्ट्र जाना था। परंतु कोरोना संक्रमण के चलते यह प्रतियोगिता टल गई।

दसवीं कक्षा की छात्रा इन दिनों अपने पिता रतन सिंह, जोकि विद्युत निगम में जेई हैं, के साथ सुबह अभ्यास करने जाती है। कोच विपिन कंबोज उसे प्रशिक्षण दे रहे हैं। तान्या वर्मा ने बताया कि जब वह अपने भाई देवांशू के साथ मैदान में जाती तो दूसरे बच्चों को तीरंदाजी करते देखकर उसकी भी इच्छा हुई की वो इस खेल में भाग ले। धीरे धीरे प्रैक्टिस करते हुए उसके खेल में निरंतर सुधार होता गया।

लंबी है खिताबों की फेहरिस्त

उसने बताया कि 2019 में केंद्रीय विद्यालय द्वारा आयोजित नेशनल गेम में चार गोल्ड जीते। केंद्रीय विद्यालय द्वारा आयोजित होने वाली स्कूल गेम फेडरेशन आफ इंडिया की नेशनल प्रतियोगिता को क्वालिफाई किया और आल इंडिया में नौवां रैंक हासिल किया। सब जूनियर ट्रायल में उसका हरियाणा टीम में अंडर 14 में चयन हुआ। 

तीरंदाजी के साथ पढ़ाई में भी अव्वल

तान्या वर्मा के पिता रतन सिंह का कहना है कि उसकी बेटी पढ़ाई में भी अव्वल है और उसकी ए प्लस ग्रेड आती है। तीरंदाजी में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। पहले उसे आरएस नेहरा, राकेश वर्मा ने प्रशिक्षण दिया, वर्तमान में विपिन कंबोज प्रशिक्षण दे रहे हैं। रतन सिंह ने बताया कि उनका लक्ष्य है कि बेटी तीरंदाजी में अच्छा प्रदर्शन करे और देश का नाम रोशन करें। बेटी के अभ्यास के लिए वे सुबह छह बजे उसके साथ ग्राउंड में जाते हैं और बाद में अपनी ड्यूटी करते हैं।

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