बेटा बोला- मां तुम नहीं चला पाओगी साइकिल, 10 किलोमीटर रेस में भाग ले मां रही अव्‍वल, अब कर रही जागरूक

स्वीटी मलिक 35 हजार से अधिक किलोमीटर साइकिल पर यात्रा कर चुकी हैं, पोषण के प्रति जागरूक कर रही हैं

रोहतक के पुलिस अधीक्षक ने 10 किलोमीटर कि साइकिल रेस करवाई थी। जिसमें करीब दो हजार प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में ना केवल भाग लिया बल्कि अव्वल भी रही। तब से स्‍वीटी साइकिल पर ही लोगों को जागरूक करने का काम कर रही है।

Manoj KumarSun, 11 Apr 2021 04:31 PM (IST)

झज्जर, जेएनएन। बच्चों व महिलाओं में जब कमजोरी दिखी तो खुद साइकिलिस्ट स्वीटी मलिक खुद ही जागरूकता का पाठ पढ़ाने के लिए साइकिल पर सवार होकर निकल पड़ी। अब वे पूरे हरियाणा प्रदेश में लोगों को पोषण के बारे में जागरूक करने के लिए साइकिल पर यात्रा करेंगे। इसकी शुरूआत रविवार को रोहतक से की। पहले दिन वे साइकिल पर सवार होकर रोहतक से झज्जर पहुंची। वहीं बीच रास्ते में उनके मायके गांव डीघल में भी स्वागत किया गया। मलिक ने बताया कि वे सुनारिया स्थित डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में पढ़ाती हैं। इस दौरान जब उन्हें बच्चों में व महिलाओं में कमजोरी देखी तो यह निर्णय लिया।

इससे पहले भी वे साइकिल पर यात्रा करके विभिन्न सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक करने का काम कर चुकी हैं। इसके लिए उन्हें अनेक स्थानों पर सम्मान भी मिला। अब उनका उद्देश्य लोगों को पोषण के बारे में जागरूक करना है, खासकर महिलाओं व बच्चों को। ताकि वे खानपान का ध्यान रखें और स्वस्थ रहें। स्वीटी मलिक के साथ उनके पति स्वास्थ्य विभाग में हेल्थ इंस्पेक्टर रविंद्र मलिक भी पहुंचे। स्वीटी मलिक की शादी सोनीपत जिले के भैंसवान खुर्द में हुई थी और फिलहाल वे रोहतक में रहती हैं।

बेटे की मनाही को टीस मानकर बनी साइकिलिंग चैंपियन

स्वीटी मलिक बताती हैं कि वर्ष 2017 के दौरान एक दिन वह रसोई में काम कर रही थी। इसी दौरान उनका बेटा प्रिंस मलिक वहां पर आया। प्रिंस ने कहा कि एक साइकिल रेस होनी है, जिसमें वह भाग लेना चाहता है। इस पर स्वीटी ने खुद साइकिल रेस में भाग लेने की इच्छा जाहिर की। लेकिन बेटे ने कहा कि उनकी उम्र अधिक है और वे भाग नहीं ले पाएंगी। अगर भाग लिया तो उनको शर्मिंदा भी होना पड़ सकता है, यह कहकर बेटे ने रेस में भाग ना लेने के लिए कहा। इसके बाद स्वीटी मलिक के मन में भी टीस जगी। लेकिन घर में एक साइकिल होने के कारण उनका इस प्रतियोगिता में भाग लेना मुश्किल था। फिर भी उन्होंने अपने पति रविंद्र मलिक से कहा कि उन्हें हर हाल में साइकिल रेस में भाग लेना है और साइकिल चाहिए।

इस पर रविंद्र मलिक ने पड़ोसियों से साइकिल लाकर दी। जिस साइकिल के साथ स्वीटी रेस में प्रतिभागी बनी और अपनी दोस्त की स्कूटी का हेलमेट पहना। स्वीटी बताती है कि उस समय के रोहतक के पुलिस अधीक्षक ने 10 किलोमीटर कि साइकिल रेस करवाई थी। जिसमें करीब दो हजार प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में ना केवल भाग लिया, बल्कि अव्वल भी रही। इसके बाद उन्हें अपने अंदर छिपी साइकिलिंग की प्रतिभा का भी पता लगा। इसके बाद वे कई नेशनल प्रतियोगिताएं भी जीत चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वे पंजाब में आयोजित नेशनल साइकिलिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल व कर्नाटक में आयोजित नेशनल हर्डल रेस में सिल्वर मेडल भी जीत चुकी हैं। हालांकि इससे पहले वे बीमार भी रहती थी। साइकिलिंग शुरू करने के बाद उनके स्वास्थ्य पर भी अच्छा रहने लगा है।

मायके में किया स्वागत

जब स्वीटी मलिक ने बताया कि लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए उन्होंने रोहतक से झज्जर तक साइकिल पर यात्रा की। इस दौरान विभिन्न गांवों में ग्रामीणों को पोषण के प्रति जागरू किया। बीच रास्ते में उनके मायके गांव डीघल पहुंची। जहां ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्वीटी ने बताया कि उन्होंने मायके में भी लोगों को पोषण के प्रति जागरूक किया और खानपान का ध्यान रखने के लिए कहा। सभी ने उनकी इस पहल की सराहना की। स्वागत करने वालों में उनके पिता राजेंद्र सिंह अहलावत व मां शकुंतला देवी, पूर्व सरपंच हंसा प्रधान, गगना पहलवान, प्रवीण अहलावत, अहलावत खाप के प्रधान जयसिंह अहलावत, सूर्जे, बलजीत, राजवंती, प्रवीण संजय, सुदेश, मंजू, सचिव अहलावत, जिले सिंह, पूनम व आशा आदि शामिल रही। स्वीटी ने कहा कि उनके दादा स्व. हिम्मत सिंह अहलावत भी उनके लिए प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं।

जागरूकता के लिए चलाती रहती है अभियान

स्वीटी मलिक ने बताया कि वह जागरूकता के लिए लगातार साइकिल पर चलकर जागरूक करती रहती हैं। इससे पहले भी वे जागरूकता के लिए करीब 35 हजार किलोमीटर का सफर तय कर चुकी हैं। इस दौरान वे पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्त भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि विषय पर जागरूक करती हैं। इस अभियान में उनके पति स्वास्थ्य विभाग में हेल्थ इंस्पेक्टर रविंद्र मलिक भी पूरा सहयोग करते हैं। वे साइकिलिंग के दौरान केवल हरियाणा ही नहीं दूसरे प्रदेशों में भी जागरूक कर चुकी हैं।

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