सालिड वेस्ट और वाहनों का धुंआ हिसार में बढ़ा रहा प्रदूषण

आईक्यू एयर की व‌र्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट-2020 के अनुसार दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित शहरों में है हिसार

JagranSun, 19 Sep 2021 07:51 AM (IST)
सालिड वेस्ट और वाहनों का धुंआ हिसार में बढ़ा रहा प्रदूषण

- आईक्यू एयर की व‌र्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट-2020 के अनुसार दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है हिसार वैभव शर्मा, हिसार

आईक्यू एयर की व‌र्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट- 2020 ने सभी को चिंता में दिया है। हिसार को 50 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल किया गया है। हिसार में बढ़ते प्रदूषण के कई कारण हैं। इसमें बड़ा कारण म्युनिसिपल सालिड वेस्ट से निकलने वाला धुंआ यहां की हवा को प्रदूषित कर रहा है। साथ ही प्रदूषण फैलने का दूसरा कारण वाहन भी हैं। प्रदूषण पर अध्ययन करने वाले विज्ञानी बताते हैं कि उनके शोध में यह दो कारण नजर आए जो साबित करते हैं कि इनसे प्रदूषण हर रोज बढ़ रहा है। तीसरा बड़ा कारण थर्मल प्लांट भी हैं।

गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग में प्रोफेसर नरसी राम बिश्नाई और उनके साथ कुछ अन्य विशेषज्ञों ने हिसार में प्रदूषण पर शोध किया। शोध में पाया गया कि जून माह में पीएम 2.5 और पीएम 10 बढ़ा हुआ था। विज्ञानी इसका कारण थर्मल प्लांट बताते हैं। यहां हरियाणा का सबसे बड़ा 1200 मिलियन वाट के दो प्लांट हैं। जिसमें जमकर कोयला की खपत होती है।

जानिए विभिन्न सेक्टरों पर प्रदूषण का क्या पड़ रहा है असर

स्वास्थ्य पर प्रभाव

स्वास्थ्य पर प्रदूषण के प्रभाव पर गौर करें तो प्रदूषण के कारण साल दर साल अस्थमा, एलर्जी व फैंफड़ों संबंधी रोगी बढ़ते जा रहे हैं। छोटे बच्चों में भी दमा की समस्या सामने आ रही है। सिविल अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार एक महीने में 70 से अधिक लोग अस्थमा के सामने आ रहे हैं। वहीं 40 मरीज हर माह फेफड़ों के रोगों से संबंधित रहते हैं।

बढ़ता शहरीकरण बना समस्या

शहरीकरण बढ़ रहा है, सड़कों के जाल बिछाए जा रहे हैं। आरओबी, आरयूबी जैसे प्रोजेक्टों में तेजी आई है। इन प्रोजेक्टों को बनाने में सबसे अधिक नुकसान उन वर्षों पुराने वृक्षों का होता है जो प्रदूषण के कणों को अवशोषित करने का काम करते हैं। एक वृक्ष औसतन 5000 प्रदूषण के कणों को अवशोषित करता है। हरियाली का कम होना चिता का विषय

प्रदूषण को रोकने में हरियाली बहुत महत्वपूर्ण है। देश की राष्ट्रीय फारेस्ट पालिसी के अनुसार हर जिले के कुल क्षेत्रफल का एक तिहाई हिस्से में वनीय क्षेत्र होना चाहिए, मगर हिसार में वनीय क्षेत्र कम हो रहा है। फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार हिसार में 3983 वर्ग किलोमीटर ज्योग्राफिकल एरिया है। इसका एक तिहाई यानि 33 फीसद हिस्सा निकालें तो अभी भी हिसार में 1256 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन की उपलब्धता होनी चाहिए। सिर्फ यह नहीं बल्कि हरियाणा ने भी 2006 में पालिसी बनाई जिसके अनुसार हर जिले में 20 फीसद क्षेत्र में हरियाली होनी चाहिए। इस नियम के अनुसार देखें तो अभी भी हिसार में 738 वर्ग किलामीटर वनीय क्षेत्र की दरकार है। अब हिसार में 1.45 फीसद क्षेत्र में ही हरियाली शेष रह गई है। हिसार में वनीय क्षेत्र की स्थिति

ज्योग्राफिकल एरिया- 3983 वर्ग किलोमीटर

बहुत घने वन- 0.00

कम घने वन- 11.86 फीसद

खुले वन- 45.78 फीसद

कुल वनीय क्षेत्र - 57.64

कुल हरियाली- 1.45 फीसद शहर में हरियाली

हरियाणा कृषि विवि- 35 फीसद

गुरु जंभेश्वर तकनीकि विवि- 25 फीसद

नगर निगम- 15 फीसद

सेक्टर- 20 फीसद

फैक्ट-

-एक आदमी एक दिन व एक सांस में तीन लीटर आक्सीजन लेता है।

-हवा में 22 लीटर आक्सीजन व अन्य भाग में अन्य गैसें होती हैं।

-एक दिन में मनुष्य 22 हजार बार सांस लेता है इस हिसाब से 17.43 लाख लोग 38.36 अरब सांसें लेते हैं, जिसके लिए 38.36 अरब लीटर आक्सीजन की जरूरत है।

हिसार के प्रदूषण की यह है स्थिति

-वर्ष 2020 का औसतन प्रदूषण 81.1 माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर

-वर्ष 2019 में औसत प्रदूषण 81 माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर वर्ष 2020 में हिसार की औसत एयर क्वालिटी

जनवरी- 78.6

फरवरी- 75.3

मार्च- 57.4

अप्रैल- 63.9

मई- 67

जून- 69.1

जुलाई- 53.8

अगस्त- 49.8

सितंबर- 76.2

अक्टूबर- 134

नवंबर- 133.2

दिसंबर- 114.7

नोट- प्रदूषण के आंकड़े औसत हैं और आईक्यू व‌र्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट- 2020 के अनुसार हैं।

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प्रदूषण के यह हैं मापदंड

डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य- 0-10

अच्छी हवा- 10-12

हल्की खराब हवा-12.1- 35.4

संवेदनशील समूहों के लिए नुकसानदायक- 35.5- 55.4

नुकसानदायक हवा- 55.5- 150.4

बहुत खराब हवा- 150.5- 250.4

खतरनाक स्थिति - 250.4 से अधिक

नोट- संकेतक माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर में हैं।

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