विज्ञानियों और पुरातत्वविदों ने भी माना, 8 हजार साल पहले हिसार से होकर बहती थी सरस्वती नदी

सरस्वती नदी के तट से ही भारतीय सभ्यता की शुरुआत हुई है। शिंदे के अनुसार हरियाणा की मिट्टी उपजाऊ थी और सरस्वती नदी बहने के कारण यहां पानी की कोई कमी नहीं थी। वहीं सिंधु नदी काफी बड़ी नदी थी मगर इसमें बाढ़ बहुत अधिक आती थी।

Manoj KumarThu, 29 Jul 2021 11:59 AM (IST)
नारनौंद की राखीगढ़ी, फतेहाबाद के कुनाल और वनावली की सभ्यता इसी नदी के किनारे विकसित हुई थी

चेतन सिंह, हिसार : हमारे वेदों में सरस्वती नदी का उल्लेख मिलता है। मगर अब यह बात विज्ञानी भी मानते हैं कि प्राचीन समय में हिमालय से निकलने वाली मुख्य नंदी और उसकी सहायक नदियां हरियाणा, राजस्थान से होकर बहती थी और वह अरब सागर में जाकर मिलती है। इसी नदी को सरस्वती नदी कहा जाता था और इसकी सहायक नदियों के अलग-अलग नाम थे जहां प्राचीन सभ्यताएं विकसित हुई। यह कहना है डेक्कन यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर प्रो. वसंत शिंदे का। शिंदे के अनुसार हमारे पूर्वजों ने बसने के लिए ऐसी नदी की तलाश की जो शांत रहती हो और बाढ़ कम से कम आती हो। इसलिए सिंधु के बजाय सरस्वती नदी को चुना गया।

प्रो. शिंदे जैसे पुरातत्विदों मानते हैं कि सरस्वती नदी के तट से ही भारतीय सभ्यता की शुरुआत हुई है। शिंदे के अनुसार हरियाणा की मिट्टी उपजाऊ थी और सरस्वती नदी बहने के कारण यहां पानी की कोई कमी नहीं थी। वहीं सिंधु नदी काफी बड़ी नदी थी मगर इसमें बाढ़ बहुत अधिक आती थी। सरस्तवी नदी सिंधु के मुकाबले शांत नदी थी और इसका पानी काफी मीठा था जो फसलों और मनुष्यों के लिए लिए अमृत था। इससे पता चलता है कि भारतीय सभ्यता की शुरआत यहीं से हुई थी।

हरसैक भी कर चुका है पुष्टि

हिसार स्थित (हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर) के वैज्ञानियों ने हरियाणा में सेटेलाइट और जीआइएस (ग्राफिक इंफोरमेशन सिस्टम) के जरिये रस्तवती की मुख्यधारा और इसकी नदियों की खोज की है। जिसमें पता चलता है रस्वती की कई उपनदिया थीं। इन नदियों के किनारों पर भारतीय सभ्‍यता विकसित हुई थी। हरसैक ने सेटेलाइट के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों का पता लगा है कि जहां मिट्टी में पानी काफी तेजी से रिचार्ज होता है। विज्ञानी बताते हैं कि जहां सरस्तवी बहती थी आज भी वहां का पानी मीठा है। वैज्ञानी बताते हैं कि हिसार का गुजरी महल और राखीगढ़ी सरस्वती से ही निकली उपनदी के किनारे बसाए गए थे। इतना ही नहीं फतेहाबाद में मिली प्राचीन साइट भिरडाना, बनावली और कुनाल भी इसी नदी के किनारे है। हरसैक की इस रिपोर्ट का फायदा पुरात्वविदों को भी होगा क्यूंकि अधिकतर प्राचीन साइट इसी नदी के किनारे हैं।

इस तरह हरसैक को मिली जानकारी

हरसैक के डायरेक्टर डा. वीके आर्य बताते हैं कि सेटेलाइट के जरिये देखने पर कंकड और मिट्टी गहरे नजर की नजर आती है। इन जगहों पर इनफिलट्रेशन रेट अधिक हैं। सेटेलाइट से देखने पर पता चला कि सिरसा और फतेहाबाद में सरस्वती नदी कई किलोमीटर चौड़ी थी। यमुनानगर के आदिबद्री से निकलकर कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा होकर राजस्थान में यह नदी निकल जाती थी। इतना ही हरियाणा के बाकि जगहों में भी इस नदी की उपनदियां मौजूद थी। इसलिए हरियाणा में संभवत इस नदी के आसपास ही हमारे पूर्वजों ने खेती शुरू की। क्यूंकि यहां की जमीन और पानी फसलों के लिए उपयुक्त था।

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