जीना इसी का नाम : कोरोना मरीजों को दे रहे परिवार जैसा माहौल, पीजीआई ICU में तेजी से हो रही रिकवरी

पीजीआइ के आइसीयू में कोविड मरीज ऑक्सीजन से ज्यादा चिकित्सकों के व्यवहार से खुश

आइसीयू में चिकित्सक मरीजों को घर जैसा माहौल देकर बच्चों की तरह देखभाल कर रहे हैं। बुजुर्ग मरीज इस बीमारी को मात देकर तेजी से रिकवरी भी कर रहे हैं। बीते रविवार को चिकित्सकों ने महिला मरीजों के साथ मदर्स-डे सेलिब्रेट किया और शुगर फ्री केक काटकर भी खिलाया।

Manoj KumarWed, 12 May 2021 01:56 PM (IST)

रोहतक [ओपी वशिष्ठ] बेटे तुहाडी मां नू किन्हा प्राउड होना, तुवाडे वरगे डाक्टर ते, मैनू बस छेती ठीक कर के घर भेज दो, रब तुहान्नू ते तुहाडी मावा नू लंबी उम्र बख्शे... यह आशीर्वाद पीजीआइएमएस (पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) रोहतक के आइसीयू में भर्ती 75 वर्षीय कोरोना संक्रमित बुजुर्ग महिला ने उपचार कर रहे चिकित्सकों को दिया है।

आइसीयू में चिकित्सक मरीजों को घर जैसा माहौल देकर बच्चों की तरह देखभाल कर रहे हैं। यहीं कारण है कि बुजुर्ग से बुजुर्ग मरीज इस बीमारी को मात देकर तेजी से रिकवरी भी कर रहे हैं। बीते रविवार को चिकित्सकों ने महिला मरीजों के साथ मदर्स-डे सेलिब्रेट किया और शुगर फ्री केक काटकर भी खिलाया।

चिकित्सकों ने बताया कि पीजीआइ के कोविड आइसीयू में कई बुजुर्ग महिला मरीज भर्ती हैं, जिनकी स्थिति काफी गंभीर है। आखिरी समय में हर इंसान बच्चों के साथ रहना चाहता है ताकि दिल की बातें शेयर कर सके। लेकिन कोविड संक्रमित होने के कारण आइसीयू में परिवार के सदस्य प्रतिबंधित है। बुजुर्ग मरीजों की आंखें बड़ी थकी-थकी और निराशा भरी रहती है। बुजुर्गों की भावनाओं को देखते हुए आइसीयू में उनको चिकित्सक घर-परिवार जैसा माहौल देने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उनको अकेलापन महसूस न होने सके।

महिला मरीजों के साथ मनाया मदर्स-डे

एनेस्थिसिया के चिकित्सक डा. मनोज ने बताया कि उसकी पत्नी श्वेता पूनिया की ड्यूटी पीजीआइ के कोविड आइसीयू में हैं। उनके साथ ही डा. विकास, नीरज भाटी व अन्य चिकित्सक भी हैं। मरीजों की भावनाओं को देखते हुए उन्होंने रविवार को महिला मरीजों के साथ मदर्स-डे सेलिब्रेट किया। बाहर से शु्गर फ्री केक खरीदा और आइसीयू में कटिंग की। इसके बाद बेड पर सभी मरीजों को केस खिलाकर बधाई और शुभकामनाएं दी।

स्वास्थ्य में हो रहा तेजी से सुधार

डा. मनोज ने बताया कि मदर्स-डे और आइसीयू में बेहतर माहौल मिलने से मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। 75 वर्षीय, 70 वर्षीय, 40 वर्षीय महिला मरीज मदर्स-डे मनाने के बाद काफी खुश हैं। उनका कहना है कि ऐसा माहौल तो उनको घर पर भी नहीं मिल पाता। सभी चिकित्सक, नर्स व अन्य स्टाफ बच्चों की तरह उनकी देखभाल करते हैं।

40 वर्षीय महिला तो अब लगभग स्वस्थ हो चुकी है, जो जल्दी यहां से डिस्चार्ज होकर घर में बच्चों के साथ रहना शुरू कर देगी। इसी तरह, बुजुर्ग महिला मरीजों में भी नई ऊर्जा का संचार हो गया है, जिसको लेकर काफी खुश है और उनकी जीने की चाहत बढ़ गई है। अब तो कहने लगी हैं कि जल्दी ठीक कर घर भेज दो ताकि हम परिवार के साथ रह सके।

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