पंजाब के किसान नेता बोले, हमें कोरोना नहीं, दादरी के विधायक ने कहा कोरोना हो तो घर पर इलाज करो

किसान अभी भी कोरोना को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं

बूटा सिंह ने अजीब बात कही कि कोरोना तो भाजपा के कहने पर चलता है। पश्चिम बंगाल में रैली करनी थी तो कोरोना को दिल्ली में छोड़ दिया। पिछले साल जब लॉकडाउन लगा तब सरकार कहती थी कि हमारे पास वैक्सिन और वेंटीलेटर नहीं है।

Manoj KumarFri, 07 May 2021 09:40 AM (IST)

बहादुरगढ़, जेएनएन। काेरोना संक्रमण भीषण हो गया है, मगर फिर भी टीकरी बॉर्डर के मंच से वक्ताओं के सुर में वास्तविक स्थिति की गंभीरता नहीं सुनाई देती। फिर चाहे कोई जनप्रतिनिधि हो या किसान संगठन का नेता। आंदोलन के मंच से पंजाब के किसान नेता एवं संयुक्त मोर्चा के सदस्य बूटा सिंह ने कहा कि सरकार झूठ फैला रही है कि किसान बॉर्डर पर कम हो गए हैं।

हमारे दो काफिले जल्द चलेंगे। एक शंभू बॉर्डर से और दूसरा खनौरी बॉर्डर से। शंभू बॉर्डर से किसान सिंधु बॉर्डर पहुंचेंगे और खनौरी बॉर्डर से टीकरी बॉर्डर पर आएंगे। किसानों ने जब भारत बंद किया तब पूरा भारत बंद का सभी ने समर्थन दिया। उन्होंने सभी संगठनों से पंजाब व हरियाणा से बॉर्डरों पर फिर जमघट लगाने की अपील का आह्वान किया। हरियाणा व पंजाब में जो लॉकडाउन लगा हुआ है उसको देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने फैसला किया है कि आठ मई को दुकानें खुलवाएंगे, क्योंकि जब हमने भारत बंद का एलान किया था तब दुकानदारों ने हमारा समर्थन किया था।

बूटा सिंह ने अजीब बात कही कि कोरोना तो भाजपा के कहने पर चलता है। पश्चिम बंगाल में रैली करनी थी तो कोरोना को दिल्ली में छोड़ दिया। पिछले साल जब लॉकडाउन लगा तब सरकार कहती थी कि हमारे पास वैक्सिन और वेंटीलेटर नहीं है। अब एक साल निकल गया तब भी देश के वही हालत हैं। आक्सीजन की कमी है और वेंटीलेंटर नहीं है। किसानों को कोरोना हो भी गया तो वे कोरोना से बच जाएंगे मगर कृषि कानूनों से किसानों का ज्यादा नुकसान होगा। किसी भी किसान को कोरोना नही है।

375 किसानों की जान गई, लेकिन पश्चिम बंगाल की एक युवती को छोड़कर किसी की कोरोना से मौत नहीं हुई। वहीं दादरी के विधायक सोमबीर सांगवान ने कहा कि पूरे देश की खाप पंचायतें आंदोलन में साथ हैं। आने वाले समय में देश के अंदर वही राज करेगा जिसके साथ किसान है। किसान कभी भी नहीं हारे। उन्होंने कहा कि किसी को कोरोना होता है तो अपने घर पर इलाज करो। अस्पताल मत जाओ। सरकार को अभी भी कृषि कानून वापस ले लेने चाहिए।

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