Progressive Farmer: भिवानी के किसान सब्जी की फसल में ले रहे रूचि, बचा रहे पानी

भिवानी के गांव रोहनात निवासी किसान आजाद गिल ने बताया कि उन्होंने छह एकड़ में आलू की फसल की बिजाई की है। उन्होंने बताया कि रोहनात क्षेत्र में नहरी पानी की कमी है। अब यहां के किसान पानी की बचत के लिए जागरूक होने लगे हैं।

Naveen DalalPublish:Wed, 24 Nov 2021 08:49 AM (IST) Updated:Wed, 24 Nov 2021 08:49 AM (IST)
Progressive Farmer: भिवानी के किसान सब्जी की फसल में ले रहे रूचि, बचा रहे पानी
Progressive Farmer: भिवानी के किसान सब्जी की फसल में ले रहे रूचि, बचा रहे पानी

राजेश कादियान, बवानीखेड़ा: भिवानी के गांव रोहनात के किसान खेतों में सिंचाई के पानी की बचत को लेकर जागरूक होते जा रहे हैं। यहां के किसानों ने अब अन्य फसलों की बजाए सब्जी की फसल उगाने में रूचि लेनी शुरू कर दी है। सब्जी के उत्पादन से जहां ये किसान थौड़े समय में ही लाखों की आमदनी करने में जुटे हुए हैं। वहीं अन्य क्षेत्र के किसानों के लिए भी प्रेरणा श्रोत बने हुए हैं। ध्यान रहे की गांव रोहनात के किसान पहले हरी मिर्च, गाजर व हरा धनिया आदि सब्जी का उत्पादन किया करते थे। अब यहां के किसानों ने आलू की सब्जी उत्पादन पर भी जोर दे दिया है। अबकि बार काफी किसानों का आलू उत्पादन की ओर रूझान बढ़ा है।

आलू की बुआई स्पेशल मशीन से की जाती है

गांव रोहनात निवासी किसान आजाद गिल ने बताया कि उन्होंने छह एकड़ में आलू की फसल की बिजाई की है। उन्होंने बताया कि रोहनात क्षेत्र में नहरी पानी की कमी है। अब यहां के किसान पानी की बचत के लिए जागरूक होने लगे हैं और धीरे-धीरे सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ने लगे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार ही छह एकड़ में आलू की बिजाई की है। उन्होंने बताया कि आलू की फसल दो सिंचाई के दौरान ही करीब तीन माह में तैयार हो जाती है। उन्होंने बताय कि एक एकड़ की फसल में 12 क्विंटल आलू का बीज लगाता है। जबकि पैदावार 150 क्विंटल तक होती है। उन्होंने बताया कि आलू की बुआई स्पेशल मशीन के द्वारा की जाती है।

गांव रोहनात निवासी किसान आजाद गिल आलु की फसल को निहारते हुए।

आमदनी के साथ-साथ पानी की बचत

हालांकि आलू की बिजाई के दौरान जमीन को तैयार करने के लिए कई बार जुताई की जाती है। उन्होंने बताया कि आलू की फसल की अच्छी पैदावार के लिए वे देशी खाद के साथ-साथ डीएपी एवं यूरिया का भी प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ की बिजाई के दौरान मशीन का मालिक करीब 3500 रुपये किराए के रूप में वसूलता है। उन्होंने बताया कि हालांकि आलू की बिजाई के दौरान प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपये का खर्चा आता है। अगर पैदावार ठीक होती है तो तीन माह के दौरान किसान लाखों रूपये की आमदनी कर सकता है। उन्होंने बताया कि पहले भी इस क्षेत्र में हरी मिर्च, गाजर, पालक व हरा धनिया आदि की सब्जियां उगाई जाती हैं। अब धीरे-धीरे यहां के किसानों का अन्य सब्जियों के उत्पादन की ओर रूझान बढ़ता जा रहा है ताकि उन्हें अच्छी आमदनी तो हो साथ-साथ पानी की बचत भी की जा सके।