Parali problem solution: सिरसा में धान की पराली में गेहूं का दाना सही हो रहा अंकुरित, काम आई समझदारी

सिरसा जिले में अनेकों किसान धान की पराली का खेतों में प्रबंध कर गेहूं की बिजाई कर रहे है। जिन किसानों ने धान की पराली में गेहूं की बिजाई की है। गेहूं के दाने सही तरीके से अंकुरित हो रहे हैं।

Manoj KumarPublish:Thu, 18 Nov 2021 08:33 AM (IST) Updated:Thu, 18 Nov 2021 08:33 AM (IST)
Parali problem solution: सिरसा में धान की पराली में गेहूं का दाना सही हो रहा अंकुरित, काम आई समझदारी
Parali problem solution: सिरसा में धान की पराली में गेहूं का दाना सही हो रहा अंकुरित, काम आई समझदारी

जागरण संवाददाता, सिरसा। पराली जलाना कोई समाधान नहीं है, समझदारी दिखाई जाए तो यह फायदेमंद साबित हो सकती है। सिरसा जिले में अनेकों किसान धान की पराली का खेतों में प्रबंध कर गेहूं की बिजाई कर रहे है। जिन किसानों ने धान की पराली में गेहूं की बिजाई की है। गेहूं के दाने सही तरीके से अंकुरित हो रहे हैं। इससे दूसरे किसान भी प्रेरणा लेकर पराली में गेहूं की बिजाई कर रहे हैं। जिले में गेहूं की सबसे अधिक 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई होती है।

कई सालों से कर रहे हैं पराली का प्रबंध

गांव शाहपुर बेगू के किसान राजाराम ने बताया कि पराली न जलाकर प्रबंध करने का कार्य किया जा रहा है। किसान पराली में गेहूं की सीधी बिजाई कर सकते हैं। खेत में गेहूं की सीधी बिजाई किसान कर रहे हैं। गेहूं का दाना भी सही अंकुरित हो रहा है।

-- किराये पर दे ले सकते हैं कृषि यंत्र

पराली को भूमि में मिलने के लिए एप के माध्यम से किसान कृषि यंत्र किराये पर दे व ले सकेंगे। कृषि विभाग ने इसके लिए फार्म एप लांच की है। विभाग के अधिकारी किसानों को एप डाउनलोड करवाने का कार्य करवा रहे हैं। विभाग द्वारा अनुदान पर किसानों को कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए हैं। जिसके तहत सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, हैपी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, मल्चर, कटर कम सपरेडर, रोटावेटर, जीरों टिल ड्रिल मशीन, रोटरी स्लेशर, रिवरसीबल एम बी प्लो मशीन उपलब्ध करवाई है। इसी के साथ कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गये हैं। जिससे धान की पराली का प्रबंध किया जा सके।

--- पराली जलाने से बढ़ता है प्रदूषण

कृषि उपनिदेशक डा. बाबूलाल ने बताया कि पराली जलाने से जहां प्रदूषण बढ़ता है, इसी के साथ भूमि की उपजाऊ शक्ति कमजोर होती है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जमीन में मिलाने से कार्बनिक पदार्थ बढ़ाते हैं। जिससे मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ जाती है। नाइट्रोजन और सल्फर तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है। पौधों के अन्य आवश्यक पोषक तत्व जैसे फास्फोरस, कैल्शियम, पोटाशियम, मैगनिशियम को बढ़ाते हैं।