ट्रायल की सफलता तय करेगा पैरा एथलीट मजदूर की बेटी आकाशदीप का सपना, पांच बार की है गोल्‍ड मेडल विजेता

आकाशदीप की बचपन में बाजू कट गई थी मगर उसने हार नहीं मानी और खेलों में नाम कमा रही है

पैरा गेम्‍स के ट्रायल गुरुग्राम के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में 27 फरवरी से शुरू होने हैं। लंबी कूद व 100 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी देश के लिए खेलने का सपना पाले हुए है। उसके पिता नछत्तर सिंह मजदूरी करते हैं

Manoj KumarFri, 26 Feb 2021 05:51 PM (IST)

डबवाली (सिरसा) जेएनएन। राज्य स्तर पर 5 बार स्वर्ण पदक जीत चुकी आकाशदीप कौर को पैरा ओलंपिक की राष्ट्रीय स्तरीय प्रतिस्पर्धा के लिए ट्रायल का बुलावा आया है। ट्रायल गुरुग्राम के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में 27 फरवरी से शुरु होने हैं। लंबी कूद व 100 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी देश के लिए खेलने का सपना पाले हुए है। उसके पिता नछत्तर सिंह मजदूरी करते हैं तो मां गुरमीत कौर रसोई तक सीमित है। चार बहन-भाईयों में दूसरे स्थान पर है। बड़ी बहन विवाहिता है।

जबकि दो छोटे भाई हैं। डबवाली के मॉडल संस्कृति राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक में 12वीं की छात्रा है। ट्रायल में कामयाबी के लिए वह मैदान में पसीना बहा रही है। हर रोज शाम को 4 से 6 बजे तक अभ्यास करती है। ट्रायल पर आने वाला खर्च डबवाली निवासी समाजसेवी अशेाक सिंगला तथा प्रवीण सिंगला ने उठाया है। दोनों ने छात्रा को 5100 रुपये की आर्थिक मदद मुहैया करवाई है।

सहेली ने दिखाया था मैदान

आकाशदीप महज 8 वर्ष की थी। नरमा चुगाई के लिए फीटर रेहड़ा पर सवार होकर जा रही थी। उसके बाएं हाथ में बंधी चुनरी फीटर की बेल्ट में आ गई। हादसे के कारण उसकी पूरी बाजू काटनी पड़ी थी। 5वीं में हुई तो उसकी सहेली रमन ने उसे खेलने के लिए प्रेरित किया। वह उसके साथ मैदान में पहुंची, वहां बच्चों को खेलते देखा तो उसका हौंसला बढ़ा। उसने प्रेक्टिस शुरु की। उसकी सफलता की बुनियाद सहेली की प्रेरणा बनी है। खेतू राम सेठी मैमोरियल स्पोट्र्स क्लब ने उसके सपनों को उड़ान दी।

नहीं रुका गोल्ड का सफर

वर्ष स्थान पदक

2017 कुरुक्षेत्र गोल्ड

2018 पंचकूला गोल्ड

2018 रोहतक गोल्ड

2019 जींद डबल गोल्ड

2019 हिसार डबल गोल्ड

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आकाशदीप 12वीं कला संकाय की छात्रा है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ट्रायल के लिए उसे गुरुग्राम का न्यौता आया है। किराया, ट्रैक सूट या अन्य सामान उपलब्ध करवाने के लिए सिंगला ब्रदर्ज ने मदद दी है। साथ ही इस बेटी की शिक्षा या खेल का खर्च भी खुद वहन करने की इच्छा जताई है। उम्मीद है कि ट्रायल में सफल होकर छात्रा अपना सपना जरुर साकार करेगी।

जितेंद्र शर्मा, प्रधानाचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, डबवाली

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