ऑक्सीजन की किल्लतः प्राण की बाजी लगा प्राण वायु दे रहे ये फरिश्ते, फर्ज के आगे घर परिवार सब भूले

हिसार के सेक्टर 27-28 स्थित ऑक्सीजन प्लांट में 24 घंटे कार्य हो रहा है।

हिसार में ऑक्सीजन प्लांट के कर्मचारी घर परिवार को भूल 24 घंटे काम कर रहे हैं। महामारी के इस दौर में ये किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। लोगों की जान बचाने के लिए अपने परिवार से खुद को दूर रख रहे हैं। इनके सेवा भाव को सलाम।

Umesh KdhyaniSat, 01 May 2021 08:58 AM (IST)

हिसार [वैभव शर्मा]। इंटरनेट हो या फोन हर जगह ऑक्सीजन, ऑक्सीजन ऑक्सीजन सबसे अधिक यही शब्द सुनवाई दे रहा है। कोई ऑक्सीजन के अभाव में मर रहा है तो कोई ऑक्सीजन लाने की कोशिश में घंटों लाइन में लगा हुआ है। ऐसे समय में ऑक्सीजन की जरूरत को पूरा करने वाले कर्मचारी और सप्लाई का प्रबंधन करने वाले अफसर किसी फरिश्ते से कम नहीं है।

हिसार के सेक्टर 27-28 स्थित ऑक्सीजन प्लांट में 24 घंटे कार्य हो रहा है। यहां आसपास दो प्लांट हैं, एक प्लांट में ऑक्सीजन तैयार हो रही है तो दूसरे में रिफिलिंग का कार्य किया जा रहा है। यहां से रोजाना दो से ढाई हजार सिलेंडरों में रोजाना ऑक्सीजन भरकर अस्पतालों में पहुंचाई जा रही है। खास बात है कि एक मिनट भी ऑक्सीजन के कार्य को बंद नहीं कर सकते ऐसे में कर्मचारियों ने खुद को अपने फर्ज के आगे नतमस्तक कर दिया है। वह अपने परिवारों, भूख प्यास को को भूल कर सेवाभावना से कार्य कर रहे हैं।

12 मिनट में एक सिलेंडर की कर रहे हैं रिफिलिंग

हालात ऐसे हैं कि प्लांट में जिस स्थान पर सिलेंडरों की रिफिलिंग हो रही है। वहां सैकड़ों की तादाद में ऑक्सीजन सिलेंडर रखे हुए हैं। ऐसे में एक सिलेंडर को भरने में 12 मिनट का समय लग रहा है। दिनभर में 2500 सिलेंडर भरने के लिए 30 हजार मिनट खपते हैं। हालांकि रिफिलिंग के लिए अलग-अलग प्वाइंट बनाए हैं। एक बार से 15 से 20 सिलेंडरों काे एक साथ भरा जा रहा है। इस कार्य में पूरा दिन लग रहा है। हालांकि शिफ्ट के हिसाब से कर्मचारी काम कर रहे हैं। मगर इस प्रयास में कार्य से अधिक लोगों की जान बचाने की प्रेरणा कर्मचारियों में अधिक दिखाई दी।

24 घंटा सातों दिन जारी है काम

गैस रिफिलिंग करने वाला एक कर्मचारी बताता है कि पहले कभी भी इतनी आपाधापी नहीं हुई जितनी अभी दिख रही है। तेजी से काम करना पड़ रहा है। गैस की रिफिलिंग और उठाकर गाड़ियों में अलग-अलग कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों के शरीर से निकलता पसीना इस बात की गवाही देता दिखा कि वह किस ऊर्जा के साथ कार्य कर रहे हैं। यह कार्य अब 24 घंटे सातों दिन चल रहा है। किसी भी सप्लाई में थोड़ी देरी हुई तो मरीज की जान तक जा सकती है।

तीन स्थानों से सप्लाई हो रही है ऑक्सीजन

हिसार में मौजूदा समय में हिसार में करीब 17 मीट्रिक टन ऑक्सीजन बन रही है और इतनी ही सप्लाई हो रही है। इसमें 9 टन ऑक्सीजन जिंदल स्टेनलैस तो बाकी ऑक्सीजन को पानीपत रिफाइनरी और सेक्टर 27-28 स्थित प्लांट से लाया जा रहा है।

बिना सोए लगातार ड्यूटी दे रहे अफसर

ऑक्सीजन प्लांट पर प्रबंधन बहुत जरूरी है। इस कारण से जिन अधिकारियों की जिम्मेदारियां लगी हैं उन्हें हर दम अलर्ट होकर काम करना पड़ रहा रहा है। एक-एक गाड़ी की मॉनीटरिंग, प्लांट संचालन में कोई दिक्कत न आए इसको भी दे रहे हैं और किस अस्पताल को कितना कोटा जाना है यह भी सत्यापन किया जा रहा है। सीनियर ड्रग कंट्रोलर रमनदीप श्योराण और नायब तहसीलदार ललित कुमार मौके पर रात्रि 10 बजे व्यवस्थाएं संभाल रहे थे। यहां अधिकारी बताते हैं कि वह दो बार संक्रमित हो चुके हैं, अब तीसरी बार भी तबीयत खराब है मगर यहां हालात संभालना हमारी प्राथमिकता है। खास बात यह है कि सरकार ने ड्रग कंट्रोलर सुरेश चौधरी को ऑक्सीजन प्रबंधन के लिए नोडल अफसर लगाया मगर उनका फोन भी बंद था और वह ऑक्सीजन प्लांट पर भी नजर नहीं आए।

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