अब गुरुजी के हाथ में नहीं दिखेगी किताब, जल्द इस तकनीक से होगी पढ़ाई

भिवानी के बवानीखेड़ा के मॉडल संस्कृति स्कूल में नई तकनीक जल्द शुरू होगी। अब गुरुजी डिजिटल लैंगवेज लैब में पढ़ाएंगे। 20 छात्रों के बैठने की व्यवस्था है। गुरुजी जिस भी विषय की किताब खोलना चाहेंगे वह किताब बोर्ड पर अपने आप आ जाएगी।

Umesh KdhyaniSat, 24 Jul 2021 03:04 PM (IST)
बवानीखेड़ा के मॉडल संस्कृति स्कूल में डिजिटल लैंगवेज लैब में छात्रों को शिक्षा देतीं प्रधानाचार्या संतोष भाकर।

राजेश कादियान, बवानीखेड़ा (भिवानी)। गुरुजी अब क्लासरूम में छात्रों को ज्ञान बांटने के लिए हाथ में किताब लेकर पन्ने पलटते नजर नहीं आएंगे। राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में शिक्षकों एवं छात्रों को शिक्षा देने के लिए नई तकनीकि का उपयोग होने जा रहा है। इस तकनीक के तहत गुरुजी को चाक से हाथ भी सफेद नहीं करने होंगे।

भिवानी के बवानीखेड़ा कस्बे के राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में नई तकनीक के तहत डिजिटल बोर्ड व डिजिटल लैंग्वेज लैब की स्थापना की गई है। यह नई तकनीक कंप्यूटर के एक क्लिक से आरंभ होगी। डिजिटल बोर्ड पर ही एक क्लिक के माध्यम से गुरुजी जिस भी विषय की किताब खोलना चाहेंगे, वह किताब बोर्ड पर अपने आप आ जाएगी। इतना ही नहीं, पाठ व पृष्ठ संख्या भी खुल जाएगी। इसके अलावा डिजिटल बोर्ड पर अब न तो डस्टर की आवश्यकता है।

तीन भाषाएं, 20 छात्रों के बैठने की व्यवस्था

यह डिजिटल लैंग्वेज लैब एक साथ तीन भाषाओं में काम कर सकती है। इस लैब में संस्कृत, अंग्रेजी व हिंदी भाषा का प्रयोग आसानी से किया जा सकता है। लैब में एक साथ 20 छात्रों को बैठने की व्यवस्था की गई है। सभी छात्रों को अलग-अलग कंप्यूटर भी उपलब्ध करवाए गए हैं। इतना ही नहीं क्लिक के माध्यम से डिजिटल बोर्ड पर परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र व उत्तर कुंजी भी प्रस्तुत की जा सकती है ताकि छात्रों को बोर्ड के माध्यम से ही परीक्षा का सटीक परिणाम हासिल हो सके। हालांकि यह व्यवस्था नेट के माध्यम से ही चल पाएगी। 

सात साल बाद बेटियों की स्कूल में वापसी 

बवानीखेड़ा कस्बे के राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में बेटियों की भी शिक्षा के लिए सात वर्ष बाद वापसी हुई है। इस स्कूल की स्थापना 1952 में की गई थी। वर्ष 2013 तक इस स्कूल में सहशिक्षा की नीति लागू हुई। लेकिन वर्ष 2013 में यहां से बेटियों को कस्बे के ही राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेज दिया गया था। पिछले सात वर्षों से यहां पर केवल बेटे ही शिक्षा ग्रहण किया करते थे। अब सीबीएसई से मान्यता मिलने के बाद यहां पर अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा शुरू की गई है। अंग्रेजी माध्यम में छात्राओं को भी प्रवेश दिया जा रहा है। अब तक 9 बेटियों ने यहां पर दाखिला ले लिया है। 

शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रहीः प्रिंसिपल

प्रधानाचार्या संतोष भाकर ने बताया कि स्कूल में नई तकनीक के माध्यम से डिजिटल बोर्ड व डिजिटल लैब की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि छात्रों को इस नई तकनीक के माध्यम से ही शिक्षा दी जाएगी। स्कूल के शिक्षकों को भी विशेष रूप से ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्कूल की लैबों को चालू कर दिया गया है। 

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