National Achievement Survey: माक टेस्ट में दिखी अव्यवस्था, तीसरी, पांचवीं के बच्चे नहीं भर सके ओएमआर शीट

तीसरी पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थी ओएमआर शीट ही नहीं भर सके क्योंकि ओएमआर शीट लगातार क्रमांक से 90 प्रश्नो की दी गई जबकि प्रश्न तीसरी में 15 पांचवीं में 18 आठवी व दसवीं में 60 प्रश्न ही थे।

Rajesh KumarSat, 23 Oct 2021 03:52 PM (IST)
नेशनल एचीवमेंट सर्वे का मॉक टेस्ट आयोजित किया गया।

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। तीसरी, पांचवीं, आठवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए नेशनल एचीवमेंट सर्वे का मॉक टेस्ट आयोजित किया गया। इसमें काफी खामियां नजर आई। तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थी ओएमआर शीट ही नहीं भर सके, क्योंकि ओएमआर शीट लगातार क्रमांक से 90 प्रश्नो की दी गई जबकि प्रश्न तीसरी में 15, पांचवीं में 18, आठवी व दसवीं में 60 प्रश्न ही थे। दूसरा ओएमआर में क्रमांक 1, 2, 3, 4 थे जबकि प्रश्न पत्रों में क, ख, ग और घ व ए, बी, सी, डी में दिये थे। इसके चलते काफी समय लग गया। इसके अलावा प्रश्न पत्रों में प्रत्येक विषय के बाद क्रमांक 1 से शुरू किये गये थे। एक विषय में एक से 17 तक प्रश्न थे तो अगले विषय में भी एक से ही सीरिज शुरू की हुई थी,18 से नहीं। जिस कारण बच्चे इसे सही तरीके से नहीं भर सके। प्रश्न पत्र में जिसका सीरियल नंबर 15 या 16 था तो ओएमआर शीट में वह 60 या 62 भी था। ऐसे में विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सुबह उपलब्ध करवाया गया दसवीं का प्रश्न पत्र

यह बात हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान सुरजीत दुसाद, जिला सचिव देशराज माचरा व राज्य उपमहासचिव कृष्ण नैन ने प्रैस ब्यान जारी कर कही। अध्यापक नेताओं ने बताया कि शिक्षा विभाग की तरफ से दसवीं का प्रश्न पत्र भी विभाग की तरफ से सुबह उपलब्ध कराया गया, जिस कारण पेपर देरी से शुरू हुआ। प्रश्न पत्र की फोटो खींचकर उसे विद्यालयों में मेल कराई गई, जिसके बाद एक-एक प्रश्न पत्र की फोटोस्टेट स्कूलों की तरफ से कराई गई। इसमें काफी समय लग गया। हजारों रुपये फोटोस्टेट के लगे जबकि विभाग ने अभी तक कोई बजट नहीं दिया हैं। लापरवाही की पोल खोलते हुए उन्होंने बताया कि इस टेस्ट में कई प्रश्न तो ऐसे थे, जिनको बार-बार रिपीट किया गया था। अब दूसरा मॉक टेस्ट 29 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। उसके बाद 12 नवंबर को फाइनल सर्वे के लिए परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस सर्वे का सबसे बड़ा दुर्भाग्य तो यह है कि अधिकारी, शिक्षक या विद्यार्थी में से किसी को यही नहीं मालूम की यह पेपर है या सर्वे हैं। ना ही इस सर्वे के लक्ष्य, उद्देश्य बारे ही जागरूक किया गया, इसलिए यह लक्ष्यों को छू ही नहीं पाएगा।

सर्वे में शामिल है सभी स्कूलों के बच्चे

अध्यापक नेताओं ने कहा कि इस सर्वे में सरकारी व प्राइवेट सभी स्कूलों के बच्चे शामिल हैं। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को इसके परिणाम से डराये जाने का माहौल है जबकि प्राइवेट स्कूल इसे अपने स्कूल की साख बचाने व साख बढ़ाने के हथियार की तरह देख रहे है इसलिए इस सर्वे में भी सक्षम, सक्षम2.0, ऑनलाईन शिक्षा, ऑनलाईन कोर्स व मेगा सर्वे की तरह सिर्फ जनता का बजट हजम कर झूठे आंकड़े ही इकट्ठे किये जाने की गुंजाइश हैं। ऑफलाइन सर्वे करने के कारण अध्यापक संघ ने जहां इसे ठीक माना है वहीं वस्तुनिष्ठ प्रश्नावली, जो उत्तर को मात्र 4 विकल्पों में फिक्स कर देती है व सोचने के लाखों तरीकों पर रोक लगाती है, की भी आलोचना की।

सभी सर्वे फार्म/पेपर समय रहते स्कूल पहुंचाए जाए

अध्यापक संघ मांग करता है कि सर्वे के लिए सभी शिक्षकों को विश्वास में लिया जाए व उन पर विश्वास भी किया जाए। सर्वे फार्म ऑफलाइन व विषयनिष्ठ होना चाहिए। इसके खर्च की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है इसलिए सभी सर्वे फार्म/पेपर  समय रहते प्रिंट होकर स्कूलों में पहुंचाए जाए ताकि इस बार की तरह अफरा-तफरी का माहौल ना बने। हो चुके सर्वे का बजट जारी किया जाए। सर्वे के परिणामों को शिक्षा विभाग बेचने व बेरोजगारों को रोजगार ना देने की तरह प्रयोग ना करते हुए सरकारी स्कूलों में जनशिक्षा को बढ़ाया जाए। कोई भी सर्वे व्यक्ति विशेष को टारगेट नहीं करता बल्कि सामुहिक व्यवस्थागत कमजोरियों को पहचान कर सुधार के लिए होता है, इस सर्वे का प्रयोग भी इसी की भावना के अनुरूप किया जाए। संगठन ने सभी 100 प्रतिशत बच्चों के व पूरे समय प्रात: साढ़े 8 बजे से दोपहर अढ़ाई बजे तक ऑफलाइन स्कूल लगाने की मांग भी की।

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