पशुओं में बीमारियों की पहचान के लिए मशीनों की छोटी किट बनाकर फील्ड में पहुंचाएगा हिसार का लुवास

कंपनी जियोनॉमिक्स व बायोसाइंस क्षेत्र में एक अग्रणी कंपनी है जो मानव व पशुओं की बीमारियों के निदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कार्य कर रही है। इन शोधों के जरिए अलगी जेनरेशन के कैंसर तक को डाइग्नोज करने वाली छोटी किट्स तैयार करने का काम चल रहा है।

Manoj KumarFri, 15 Oct 2021 09:50 AM (IST)
लुवास का उद्देश्य है कि गांव के पास ही पशुओं को बीमारियों में त्वरित उपचार मिले।

जागरण संवाददाता, हिसार। पशुओं में बीमारियों की पहचान के लिए अभी तक भारत में रिसर्च संस्थानों में ही बड़ी-बड़ी मशीनों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। मगर जिलों में स्थित विभिन्न पशुचिकित्सालयों में यह सुविधा नहीं हैं। पशुपालकों की अक्सर मांग रहती है कि बीमारियां डाइग्नोज करने की मशीनें गांव के पास तक पहुंचनी चाहिए ताकि पशुओं को गंभीर बीमारियों में बिना समय गवाए उपचार मिले। पशुपालकों की यह समस्या अब अधिक दिन तक नहीं रहेगी, क्योंकि लाला लाजपत राय पशु-चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पहले ही एक कंपनी के साथ समझौता कर चुका है।

कोविड के कारण यह कार्य धीमा पड़ा मगर अब फिर से तैयारी तेज कर दी गई है। दोनों संस्थान एक साथ रिसर्च तो करेंगे साथ ही बीमारियां डाइग्नोज करने वाली छोटी-छोटी किट्स भी बनाएंगे। यह किट्स सरकारी और प्राइवेट दाेनों पशु चिकित्सालयों तक पहुंचाना उद्देश्य है। लुवास का उद्देश्य है कि गांव के पास ही पशुओं को बीमारियों में त्वरित उपचार मिले। इसके साथ ही लुवास उन बीमारियों से लड़ने वाली वैक्सीन भी तैयार कर सके।

अगले जेनरेशन के कैंसर तक में मिलेगी मदद

यह कंपनी जियोनॉमिक्स व बायोसाइंस क्षेत्र में एक अग्रणी कंपनी है जो मानव व पशुओं की बीमारियों के निदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कार्य कर रही है। इन शोधों के जरिए अलगी जेनरेशन के कैंसर तक को डाइग्नोज करने वाली छोटी किट्स तैयार करने का काम चल रहा है। पांच वर्ष तक इस एमओयू के तहत दोनों संस्थान काम करेंगे। यह बिल्कुल ऐसा ही है जैसे अगर हमें शुगर की बीमारी में रक्त की जांच करानी हो तो छोटी-छोटी किट्स के जरिए आज असानी से करा सकते हैं।

आपस में डाटा भी करेंगे साझा

लुवास स्थित विभिन्न विभागों में पशुचिकित्सा विज्ञान संबंधित विशेष सुविधाएं एवं विशेषज्ञ उपलब्ध हैं और भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के विशेषज्ञ संयुक्त परियोजनाओं पर मिलकर कार्य करेंगे ताकि शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं जुटाई जा सकें। इसमें कंपनी तकनीक के साथ विश्वविद्यालय के साथ डाटा भी साझा करेगी ताकि आगे नई-नई बीमारियों की चेन को पहचाना जा सके।

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