हरियाणा में बंजर ना हो जाए भूमि, मिट्टी में नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी और पानी में विद्युत चालकता ज्‍यादा

झज्‍जर में लैब में जांच के लिए आ रहे मिट्टी के अधिकतर सैंपलों में नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी मिली

झज्‍जर स्थित लैब में आने वाले मिट्टी के सैंपलों में से कुछेक को छोड़कर सभी में नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी मिलती है। स्थिति यह है 95 फीसद से अधिक मिट्टी के सैंपल नाइट्रोजन की पूर्ति वाले नहीं होते। वहीं 85-90 फीसद सैंपलों में फास्फोरस की कमी मिल रही है।

Manoj KumarFri, 09 Apr 2021 12:37 PM (IST)

झज्जर, जेएनएन। हरियाणा के लिए हमेशा ही कहा जाता था कि धरती सोना उगलती है, लेकिन इस फसल रूपी सोने को उलगने के लिए जमीन में सभी पोषक तत्वों का होना भी जरूरी है। जो जिले की मिट्टी में दिखाई नहीं दे रहे। फसलों की अच्छी पैदावार के लिए आवश्यक नाइट्रोजन व फास्फोरस जमीन में नहीं मिल रहे। इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि झज्‍जर जिला मुख्यालय स्थित लैब में आने वाले मिट्टी के सैंपलों में से कुछेक को छोड़कर सभी में नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी मिलती है। स्थिति यह है कि 95 फीसद से अधिक मिट्टी के सैंपल नाइट्रोजन की पूर्ति वाले नहीं होते। वहीं 85-90 फीसद सैंपलों में फास्फोरस की कमी मिल रही है।

कृषि विभाग द्वारा भूमि एवं जल स्वास्थ्य कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की हुई है।

जिसके लिए किसानों को अपनी जमीन की स्थिति का पता लगता रहे। ताकि किसान जमीन के अनुसार ही खेती कर सके और पैदावार बढ़ाने के लिए उचित कदम उठा सके। जिला मुख्यालय स्थित लैब में जांच हुई मिट्टी के सैंपल में से अधिकतर में नाइट्रोजन व फास्फोरस की कमी पाई गई। वहीं करीब 10 फीसद जमीन में पोटाश की कमी भी मिलती है। मिट्टी में मिल रही इन पोषक तत्वों की कमी किसानों की चिंता भी बढ़ा रही है। इसका सीधा असर फसलों पर पड़ता है। इसलिए पैदावार की कमी व जमीन खराब होने का भी डर बना रहता है। इसलिए किसानों को सावधानी बरतते हुए उचित कदम उठाने होंगे।

---जिले में पानी की स्थिति की बात करें तो वह भी अधिक अच्छी नहीं हैं। पानी में विद्युत चालकता अधिक है। सरल भाषा में कहें तो यहां का पानी लवणीय या फिर नमकीन है। इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि लैब में जांच के लिए आने वाले सैंपलों में से करीब 30 फीसद सैंपलों में ही पानी जमीन के लिए अच्छा है। पानी में ईसी (विद्युत चालकता) की मात्रा 7-8 हजार से कम होनी चाहिए। लेकिन यहां के पानी में ईसी की मात्रा 25 हजार से भी अधिक पहुंच जाती है। जो जमीन के लिए अच्छी नहीं है। सात हजार से कम ईसी की मात्रा को ही अच्छा माना जाता है। ईसी की मात्रा जितनी कम होगी, उतना अच्छा होगा।

ऐसे लें पानी के सैंपल

किसानों को पानी के सैंपल लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए। सैंपल के लिए अपने खेत में लगे ट्यूबवेल को चलाकर सैंपल लें। लेकिन यह भी ध्यान रखें कि ट्यूबवेल चलने के तुरंत बाद पानी का सैंपल नहीं लेना चाहिए। जब ट्यूबवेल को चलते हुए करीब एक घंटा बीत जाए, तो पानी का सैंपल लें। इसके बाद सैंपल (500-700 मिली लीटर) पानी को जांच के लिए लैब में लेकर आएं। हालांकि सरकार किसानों के मिट्टी पानी की जांच निशुल्क कर रही है।

ऐसे लें मिट्टी के सैंपल

मिट्टी के सैंपल लेते समय भी किसानों को ध्यान में रखना होगा कि सैंपल एक स्थान से ना लिया जाए। इसके लिए खेत के चारों कोनों का चयन करना चाहिए। चारों कोनों के 20-30 फीट अंदर खेत की तरफ से सैंपल लें। यहां कस्सी लेकर एक कस्सी मिट्टी उठाकर फेंक दें। इसके बाद जो गड्ढा बने उससे मिट्टी का सैंपल लेना चाहिए। यह भी ध्यान रखें कि मिट्टी किसी पेड़ के नीचे से ना ली जाए। हालांकि किसान उस स्थान से मिट्टी ले सकते हैं, खेत में जहां फसलें सबसे कमजोर रहती हैं। पांचों जगह से लिए मिट्टी के सैंपल को मिलाकर उसमें से करीब 500-700 ग्राम मिट्टी के सैंपल को जांच के लिए जाना होगा।

-लैब अटेंडेंट मुकेश ने बताया कि यहां जांच के लिए आने वाले मिट्टी के अधिकतर सैंपलों में नाइट्रोजन व फास्फोरस की काफी कमी मिलती है। कुछेक में ही इनकी मात्रा उचित पाई जाती है। वहीं पानी की बात करें तो 70 फीसद से अधिक सैंपलों में ईसी की अधिकता मिलती है।

-सॉयल टेस्टिंग ऑफिसर झज्जर अशोक चाहार ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए लैब में मिट्टी व पानी के सैंपलों की निशुल्क जांच की जाती है। किसान अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच करवा सकते हैं। इससे उन्हें अपनी जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति का भी पता लग जाएगा।

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