Kisan andolan: अकाली दल के प्रदर्शन के कारण झाड़ौदा बार्डर फिर से किया बंद, मेट्रो ट्रेनों के ठहराव पर भी राेक

किसान आंदोलन में पंजाब के किसानों के साथ अब राजनीतिक दल भी सक्रिय भूमिका में आ रहे हैं। कांग्रेस कानूनों का विरोध कर रही है तो अकाली दल भी जनता का रुझान जानने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है।

Manoj KumarFri, 17 Sep 2021 06:20 AM (IST)
26 जनवरी के बाद गत सात मार्च को खोला गया था झाड़ौदा बार्डर, अब फिर से बंद किया

जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़। अकाली दल के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने झाड़ौदा बार्डर बंद कर दिया है। मेट्रो में पगड़ीधारियों व कुर्ता पायजामा पहने तथा संदिग्ध व्यक्तियों का प्रवेश रोक दिया गया। पंडित श्रीराम मेट्रो स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव रोक दिया गया। बहादुरगढ़ सिटी व ब्रिगेडियर होशियार सिंह मेट्रो स्टेशन पर काफी गहन चेकिंग व पूरी पूछताछ के बाद ही यात्रियों को प्रवेश दिया गया। इससे दोनों स्टेशनों पर स्थिति बार-बार बिगड़ रही है। अकाली दल के कार्यकर्ता भी दिल्ली जाने के लिए काफी हंगामा करते रहे लेकिन भारी पुलिस बल व अर्धसैनिक बल जवानों की तैनाती के कारण मेट्रो स्टेशनों में प्रवेश नहीं दिया गया। तनाव बढ़ता देख बहादुरगढ़ मेट्रो स्‍टेशन को बंद ही कर दिया गया।

किसी भी स्थिति में अकाली दल कार्यकर्ताओं को दिल्ली में प्रवेश रोका जा रहा है। दिल्ली के अन्य बार्डर खोले तो गए हैं लेकिन यहां पर पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवान तैनात हैं। अकाली दल कार्यकर्ताओं व पंजाब नंबर के वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। अकाली दल कार्यकर्ताओं की वजह से झाड़ौदा बार्डर बंद होने से दिल्ली जाने वाले आम लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वीरवार रात से ही वो दूसरे रास्तों का सहारा लेकर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। मेट्रो यात्रियों को भी ट्रेन पकड़ने में काफी देरी हुई। इससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बहादुरगढ़ में मेट्रो स्‍टेशन के बाहर खड़ी पुलिस

तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुक्रवार को अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने काला दिवस मनाने का निर्णय ले रखा है। इसी के चलते वीरवार से ही पंजाब से भारी संख्या में अकाली कार्यकर्ता बार्डरों पर पहुंचने शुरू हो गए थे। झाड़ौदा समेत अन्य बार्डरों से उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी लेकिन रह रहकर पंजाब से वाहन आते रहे और दिल्ली जाने का प्रयास करते रहे। ऐसे में देर रात को पुलिस ने झाड़ौदा बार्डर सील कर दिया। बैरिकेड लगाकर व ट्रक-ट्राले खड़े करके यह बार्डर सील कर दिया। शुक्रवार सुबह जैसे ही नौकरीपेशा लोग बार्डर से दिल्ली जाने लगे तो इसे बंद पाकर उन्हें परेशानी हुई।

पुलिस द्वारा ट्रक लगाकर रोका गया झाड़ौदा बार्डर

इसके बाद दूसरे बार्डरों व कच्चे रास्तों से वे दिल्ली निकले। इससे उन्हें परेशानी हुई। इतना ही नहीं अकाली दल कार्यकर्ताओं का मेट्रो से भी दिल्ली में प्रवेश बंद कर दिया गया। बहादुरगढ़ के ब्रिगेडियर होशियार सिंह, बहादुरगढ़ सिटी व पंडित श्रीराम मेट्रो स्टेशन से कुर्ता पायजामा पहने, पगड़ीधारी व संदिग्ध लोगों का प्रवेश बंद कर दिया गया। किसान आंदोलन के बीच स्थित पंडित श्रीराम मेट्रो स्टेशन पर तो ट्रेनों का ठहराव ही बंद कर दिया गया। इससे बहादुरगढ़ के दो अन्य स्टेशनों पर अकाली दल कार्यकर्ता काफी संख्या में पहुंचे लेकिन यहां पर पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवानों ने उनका प्रवेश बंद कर दिया।

बता दें कि बीते नौ महीने से टिकरी बार्डर और झाड़ौदा बार्डर बंद है। बीच बीच में झाड़ौदा बार्डर को खोल दिया जाता है, मगर टिकरी बार्डर को बंद करने के लिए जो दीवार बनाई गई थी, वहां घास उग आई है। बार्डर बंद होने से यंहा के उद्यमियों को करीब 20 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर का नुकसान हो चुका है। उद्यमी बार्डर खुलवाने के लिए कोर्ट और मानवाधिकार में याचिका लगा चुके हैं। मगर कुछ बात नहीं बन रही है। बार्डर खुलवाये जा सकें इसके लिए हरियाणा सीएम मनोहर लाल ने बैठक भी की थी। मगर दो दिन पहले हुई इस बैठक के दौरान ही सीएम मनोहर लाल की तबीयत बिगड़ गई थी। इसे लेकर किसी तरह का कोई फैसला नहीं लिया जा सका।

सीएम मनोहर लाल भी बार्डर खुलवाना चाहते हैं मगर आंदोलनकारियों के उग्र रवैये के कारण वे इस तरह के किसी भी कदम को उठाने से बच रहे हैं। झाड़ौदा बार्डर जरूर खुला रहता है मगर टिकरी बार्डर के बंद होने से व्‍यापार पूरी तरह से ठप हो चुका है। बहादुरगढ़ में दिल्‍ली से आने वाले उद्यमियों को बहुत परेशानी हो रही है तो लेबर वर्ग भी यहां से पलायन कर गया है। कई छोटी कंपनियां बंद हो चुकी हैं। इसलिए आंदोलनकारियों के आंदोलन के कारण उद्यमी और बहादुरगढ़ में बहुत से गांव परेशानी झेल रहे हैं।

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को 26 सितंबर को दस महीने पूरे हो जाएंगे। आंदोलन को लेकर अभी तक पक्ष और विपक्ष की मिली जुली प्रतिक्रिय आ रही है। 26 जनवरी को लाल किले पर झंडा फहराने के बाद आंदोलन पतन की ओर था, मगर ऐन वक्‍त पर राकेश टिकैत के आंसुओं ने ऐसा काम किया कि आंदोलन को हरियाणा और पंजाब के लाेगों ने ऐसी हवा दी कि ये आग अभी तक जल रही है। राकेश टिकैत आंदोलन को लीड कर रहे हैं तो गुरनाम सिंह चढूनी भी अपना वर्चस्‍व बनाने में जुटे हुए हैं। सरकार ने 26 जनवरी को हुए प्रकरण के बाद आंदोलनकारियों से बात करना बंद कर दिया है।

बहादुरगढ़ में दो मेट्रो स्टेशन और झाड़ौदा बार्डर बंद होने से भटकते रहे यात्री

बहादुरगढ़: झाड़ौदा बार्डर बंद होने से यात्री दिन भर भटकते रहे। बहादुरगढ़ सिटी व पंडित श्रीराम मेट्रो स्टेशन बंद होने से भी यात्री खासे परेशान रहे। मेट्रो न मिलने की वजह से यात्रियों ने दूसरे साधनों में सवार होकर कच्चे व छोटे रास्तों से दिल्ली आवागमन किया। यात्रियों की परेशानी उनके चेहरों पर साफ झलक रही थी। बहादुरगढ़ निवासी मयंक ने बताया कि उसे सिटी सेंटर जाना था। प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेना था। मगर वह मेट्रो स्टेशन बंद होने की वजह से दूसरे वाहनों में जाने पर मजबूर है।

उसे भी पता नहीं किया व समय पर परीक्षा के लिए पहुंच पाएगा या नहीं। काफी परेशान इधर उधर भटक कर दूसरे साधनों का पकड़ने का प्रयास किया। यात्री अंकुर ने बताया कि वह इंद्रलोक स्टेशन पर जाने को बहादुरगढ़ सिटी मेट्रो स्टेशन पर आया था। मगर झाडोदा बॉर्डर बंद होने और मेट्रो स्टेशन बंद होने की वजह से अब अपने साथी को ही यहां पर बुलाया है। अब वह बॉर्डर पर वैसे ही मिल कर अपना काम करेगा। इसके अलावा कुछ यात्री ड्यूटी पर भी नहीं जा सके। बहादुरगढ़ निवासी हरिओम शर्मा ने बताया कि उसे दिल्ली ड्यूटी पर जाना था, मगर वह मेट्रो स्टेशन बंद होने की वजह से दिल्ली नहीं जा सका। इस कारण उसे घर ही लौटना पड़ा।

 

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