International Olympic Day 2021: पढि़ए कुश्‍ती में देश के लिए पहला ओलंपिक पदक जीतने वाली साक्षी मलिक की कहानी

साक्षी मलिक ने कहा ओलंपिक ऐसा मंच है जहां से खिलाड़ी की किस्मत बदल जाती है। देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी का सपना रहता है। 2016 रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइ किया तो दृढ़ निश्चय किया था कि देश के लिए पदक जीतना है।

Manoj KumarWed, 23 Jun 2021 10:51 AM (IST)
रोहतक की साक्षी मलिक ने ओलंपिक में वो कारनामा कर दिखाया था जिसे कोई महिला पहलवान न कर सकी थी

रोहतक [ओपी वशिष्ठ] कोई भी खिलाड़ी जब खेलना शुरू करता है तो उसके खेलने के पीछे कई मकसद होते हैं। मगर सोचिए जब कोई महज एक रोमांच के लिए खेलना शुरू करे और ओलंपिक में पदक जीत लाए तो कैसा हो। मगर कई बार रोमांच ही जुनून बन जाता है और बुलंदी पर पहुंचता है। ऐसा ही एक उदाहरण रोहतक की साक्षी मलिक ने पेश किया था। कोई वक्‍त था जब हवाई जहाज में बैठकर घूमने की चाह से साक्षी मलिक ने कुश्ती खेलना शुरू किया।

जब कुश्ती खेलनी शुरू की तो ओलंपिक के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बस इतना सुना था कि विदेशों में कुश्ती खेलने का मौका मिले तो हवाई जहाज से सफर करने का अवसर भी मिलता है। धीरे-धीरे पदक जीतने लगी तो पता चला कि खिलाड़ी के लिए ओलंपिक में भाग लेना एक सपना होता है। फिर ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने का लक्ष्य साधकर मेहनत की और रियो ओलंपिक में यह मुकाम हासिल किया। ओलंपिक में पदक जीतने के बाद इसकी अहमियत का पता भी चला।

मूल रूप से जिले के गांव मोखरा निवासी साक्षी मलिक ने बताया कि ओलंपिक ऐसा मंच है, जहां से खिलाड़ी की किस्मत बदल जाती है। देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी का सपना रहता है। 2016 रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइ किया तो मन में दृढ़ निश्चय किया था कि देश के लिए पदक जीतना है। इसलिए दिन-रात मेहनत कर खुद को ओलंपिक के लिए तैयार किया। खिलाड़ी की ताकत का सही आंकलन भी ओलंपिक में ही होता है। चूंकि ओलंपिक में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों के साथ मुकाबला होता है। रियो ओलंपिक में जब पहले मुकाबला हार गई तो एक बार सपना टूटता दिखा। लेकिन जिस पहलवान से हार हुई, वो फाइनल में पहुंची तो रैपचेंज से दोबारा अवसर मिला, जिसे किसी भी कीमत पर मैं खोना नहीं चाहती थी। इस मुकाबले में अपना सबकुछ झोंक दिया, जिसका परिणाम सकारात्मक रहा और देश के लिए कांस्य पदक हासिल करने में सफल हो गई।

पदक का रंग बदलना चाहती थी, किस्मत ने साथ नहीं दिया

साक्षी मलिक का कहना है कि टोक्यो ओलंपिक में पदक का रंग बदलना चाहती थी, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। उनके भारवर्ग में सोनम मलिक ने क्वालीफाइ किया है। उनसे पदक की बड़ी उम्मीद है। सोनम को देश के लिए पदक जीतने के लिए अग्रिम शुभकामनाएं हैं। फिलहाल मेरा 2022 में होने वाले कामनवेल्थ गेम्स की तैयारियों पर फोकस है। साथ ही, ओलंपिक के लिए एक प्रयास और किया जाएगा ताकि पदक का रंग बदला जा सके।

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