आंदोलनकारियों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की बढ़ाई चिंता, कोरोना संक्रमण फैलने का सता रहा डर

कैंप लगाने के बाद भी टेस्ट कराने व वैक्सील लगवाने को आगे नहीं आ रहे आंदोलनकारी

आंदोलनकारियों की इस बढ़ती संख्या ने प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। यहां पर प्रशासन को कोरोना संक्रमण बड़े स्तर पर फैलने का डर सता रहा है। उधर किसान नेता सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि कोरोना महामारी की आड़ में सरकार आंदोलन समाप्त करना चाह रही है।

Manoj KumarFri, 23 Apr 2021 08:00 AM (IST)

बहादुरगढ़, जेएनएन। तीन कृषि सुधार कानूनों को रद कराने की मांग को लेकर चल आंदोलन में दोबारा से आंदोलरकारियों की संख्या बढ़ने लगी है। गदर आंदोलन के स्थापना दिवस समारोह के बाद भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहा के बैनर तले भारी संख्या में किसान मोर्चे पर आ डटे हैं। आंदोलनकारियों की इस बढ़ती संख्या ने प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। यहां पर प्रशासन को कोरोना संक्रमण बड़े स्तर पर फैलने का डर सता रहा है। उधर, किसान नेता सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि कोरोना महामारी की आड़ में सरकार आंदोलन को समाप्त करना चाह रही है।

यहीं वजह है कि न तो आंदोलनकारी मास्क लगा रहे हैं और ना ही टेस्ट करा रहे हैं और ना ही वैक्सीन लगा रहे हैं। वैक्सीननेशन को लेकर पहले एसडीएम और वीरवार को डीसी ने भी किसान नेताओं से बातचीत की है, मगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। हालांकि किसान नेताओं ने आश्वासन तो दिया है लेकिन शुक्रवार को प्रशासन की ओर से लगाए जाने वाले कैंप से साफ पता चलेगा कि आंदोलनकारी कोरोना को लेकर संजीदा हैं या नहीं। यानी वे वैक्सीन लगवाने और टेस्ट कराने आते हैं या नहीं।

उधर, किसान नेता आंदोलनकारियों की बढ़ती संख्या से काफी गदगद हो गए हैं। भाकियू एकता उगराहा के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह आंदोलन में भारी संख्या में महिलाओं के एकत्रित होने से खुश हैं। उन्होंने महिलाओं को ही संगठन का नेतृत्व सौंपने के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं के भारी संख्या में आने से अब यह आंदोलन एक पारिवारिक आंदोलन बन गया है।

खतरे से पूरी तरह अवगत, कोरोना संकट को रोकने की बनाई जा रही योजना

भाकियू एकता उगराहा के महिला संगठन की नेता कुलदीप कौर कुसा ने कहा कि उनका संगठन कोरोना संकट को रोकने की योजना बना रहा है। वे खतरे से अवगत हैं। आवश्यक सावधानी बरती जा रही है। कृषि के संरक्षण के साथ-साथ जीवन और मृत्यु का मामला भी है। मगर नए कृषि सुधार कानूनों का हमला इस कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है। नए कृषि कानूनों की तरह कोरोना वायरस का हमला सरकार की गलती है। इसलिए आंदोलनकारी इन दोनों हमलों से महफूज रहकर अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे और जीत हासिल करके रहेंगे।

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