कोरोना काल का असर, छात्रों पर इस साल बढ़ेगा पढ़ाई का बोझ, दो-दो कक्षाओं की करनी होगी पढ़ाई

भौतिक रूप से संचालित कक्षाओं में बच्चा जितना सीख पाते थे वह ऑनलाइन में नहीं सीख पाए।

10 महीने तक स्कूल बंद रहे अब स्कूल खुल गए हैं तो बच्चों के सामने नई समस्या आ खड़ी हुई है। इस साल बच्चों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ सकता है। क्योंकि कई स्कूल अपने यहां बच्चों को एक साथ दो-दो कक्षाओं को पढ़ाने की तैयारी कर चुके हैं।

Manoj KumarMon, 22 Feb 2021 01:59 PM (IST)

हिसार, जेएनएन। कोरोना काल में 10 महीने तक स्कूल बंद रहे, अब स्कूल खुल गए हैं तो बच्चों के सामने नई समस्या आ खड़ी हुई है। इस साल बच्चों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ सकता है। क्योंकि कई स्कूल अपने यहां बच्चों को एक साथ दो-दो कक्षाओं को पढ़ाने की तैयारी कर चुके हैं। इसमें अगर बच्चा दूसरी कक्षा में था उसे आगे की कक्षा में बढ़ाया तो जा रहा है साथ ही उसे पिछली कक्षा का सिलेबस भी शिक्षक पढ़ाएंगे। यह तरीका इसलिए अमल में लाया जा रहा है क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई जरूर हुई मगर बच्चों को अधिक कुछ समझ नहीं आया।

क्योंकि भौतिक रूप से संचालित कक्षाओं में बच्चा जितना सीख पाते थे वह ऑनलाइन में नहीं सीख पाए। इसके साथ ही ऑनलाइन कक्षाएं भी आधा घंटे से लेकर एक घंटे तक ही चली। ऐसे में सबकुछ सीमित था। ऐसे में स्कूल संचालकों का निर्णय है कि वह आगे की कक्षाओं में पिछली कक्षा का सिलेबस भी पढ़ाएं। ऐसे में दो-दो कक्षाओं की पढ़ाई बच्चों को करनी होगी।

छोटे बच्चे सबसे अधिक हुए हैं प्रभावित

यह प्रक्रिया कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों के साथ अधिक अपनाई जा रही है क्योंकि छोटे बच्चों को डिजिटल माध्यम पर पढ़ाई कराना काफी मुश्किल था और कई बच्चों ने तो हकीकत में पढ़ाई पूरी ही नहीं की। हालांकि इनमें से किसी भी बच्चे को फेल नहीं किया गया बल्कि उन्हें पास कर दिया गया। मगर पढ़ाई न कर पाने के कारण वह उस कक्षा में कमजोर हो सकते हैं, इसीलिए एक साथ पढ़ाई कराने का फैसला लिया गया है।

सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य अधर में

प्राइवेट स्कूल अपने-अपने स्तर से परिवर्तन कर रहे हैं मगर सरकारी स्कूलों में अभी तक कोई परिवर्तन नजर नहीं आ रहा है। अवसर एप पर बच्चों की परीक्षा ली जा रही है, जबकि बच्चे पहले ही ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर अधिक खुश नहीं है। शिक्षा विभाग के सामने भी यही समस्या है कि छोटे बच्चों को किस प्रकार से आगे बढ़ाया जाए। अभी तक शिक्षा विभाग की तरफ से कोई खास निर्देश भी नहीं आए हैं।

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