भारत में बढ़ने लगा ग्‍लैंडर्स का खतरा, 17 राज्यों के 22130 सैंपल हिसार में जांचे, 139 पशु मिले संक्रमित

साल दर साल बढ़ रही है अश्व प्रजातियों में ग्लैंडर्स की खतरनाक बीमारी, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक रिस्क

साल 2020 में हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) के पास अश्व प्रजातियों (घोड़ा खच्चर गधे) के जानवरों के देश के 17 राज्यों से 22130 सैंपल आए। जिनमें 139 संक्रमित पशु मिले जिन्हें वैज्ञानिक तरीके से मारा गया।

Manoj KumarTue, 13 Apr 2021 04:54 PM (IST)

हिसार [वैभव शर्मा] पशुओं से इंसानों में फैलने वाली जानलेवा वायरस जनित बीमारी ग्लैंडर्स का प्रभाव अश्व प्रजातियों में बढ़ रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2020 में हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) के पास अश्व प्रजातियों (घोड़ा, खच्चर, गधे) के जानवरों के देश के 17 राज्यों से 22130 सैंपल आए। जिनमें 139 संक्रमित पशु मिले, जिन्हें वैज्ञानिक तरीके से मारा गया। ग्लैंडर्स को लेकर सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश में सामने आ रही है। यहां पिछले साल उत्तर प्रदेश से 11 हजार 704 सैंपल हिसार स्थित‍ एनआरसीई भेजे गए जिसमें से 76 पशु संक्रमित पाए गए। हालात यह हैं कि इस साल भी उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक सैंपल आ रहे हैं और पशु संक्रमित भी मिल रहे हैं। हाल ही में बहराइच से आया सैंपल भी ग्लैंडर्स ग्रसित पाया गया था। जो घोड़ी संक्रमित मिली हैं उसमें से अधिकांश का प्रयोग शादी में किया जाता था। यह आंकड़े बताते हैं कि वायरस जनित बीमारियां हमारे इर्द-गिर्द प्रसारित हो रही हैं। ग्लैंडर्स की यह स्थिति तब है जब 7 माह तक लॉकडाउन के कारण सैंपल जांच के लिए आ नहीं पाए।

विभिन्न राज्यों में यह है ग्लैंडर्स की स्थिति  

राज्य- सैंपल टेस्ट हुए- संक्रमित मिले

उत्तर प्रदेश- 11704- 76

हरियाणा- 2117- 8

पंजाब- 790- 1

हिमाचल प्रदेश- 802- 7

उत्तराखंड- 390- 10

दिल्ली- 613- 5

जम्मू कश्मीर- 972- 7

मध्य प्रदेश- 900- 8

गुजरात- 1344- 8

महाराष्ट्र- 799- 9

राजस्थान- 1198- 0

चंडीगढ़- 4- 0

आंध्रप्रदेश- 36- 0

छत्तीसगढ़- 111- 0

कर्नाटक- 98- 0

पश्चिम बंगाल- 22- 0

बिहार- 230- 0

कुल- 22130- 139

दूसरे देशों से भी एनआरसीई के पास आते हैं सैंपल

एनआरसीई में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी अश्व प्रजातियों के खून के सैंपल जांच के लिए अाते हैं। निदेशक डा. यशपाल के निर्देशन में चल रहे इस केंद्र के विज्ञानियों ने ही ग्लैंडर्स जांच की तकनीकि और किट विकसित की है। वरिष्ठ विज्ञानी डा. हरिशंकर सिंघा बताते हैं कि ग्लैंडर्स फ्री राज्यों को करने का लक्ष्य रखा गया है जिस पर कार्य किया जा रहा है। कई राज्यों को प्रारंभिक जांच के लिए प्रशिक्षित भी किया गया है। हाल ही में पंजाब में जालंधर, शहीद भगत सिंह नगर से भी संक्रमित पशु मिले।

ग्लैंडर्स क्या है

ग्लैंडर्स एक जूनोटिक बीमारी है। जो घाेड़ाें की प्रजातियाें में एक जानलेवा संक्रामक राेग है। इसमें घाेड़े, खच्चर या गधों की नाक से खून बहना, सांस लेने में तकलीफ, शरीर का सूख जाना, पूरे शरीर पर फाेड़े या गाठें अादि लक्षण हैं। यह बीमारी दूसरे पालतू पशुअाें में भी पहुंच सकती है। यह बीमारी बरखाेडेरिया मैलियाई नामक जीवाणु से फैलती है। यह बीमारी हाेने पर घाेड़े काे वैज्ञानिक तरीके से मारना ही पड़ता है। यह बीमारी पशु में मिलने पर उस क्षेत्र के लोगों का स्वास्थ्य, पशुओं की जांच आदि की सर्विलांस की जाती है।

भारत सरकार ने एनआरसीई को प्रशिक्षण का दिया है प्रोजेक्ट

देश को ग्लैंडर्स बीमारी से मुक्त करने के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र यानि एनआरसीई ने सबसे पहले केन्द्र सरकार के कृषि विभाग को करीब कुछ वर्ष पहले प्रस्ताव भेजा था। केंद्रीय मत्स्य व पशु पालन मंत्रालय गठित होने के बाद इस प्रोजेक्ट को पास किया। अब एनआरसीई इसी प्रोजेक्ट के तहत देशभर के पशु चिकित्साधिकारियों को प्रशिक्षित कर रहा है ताकि उनके राज्यों में अगर जानवरों में ग्लैंडर्स की समस्या दिखे तो बिना समय व्यर्थ किए सैंपल लैब में टेस्ट हों और पशु को वैज्ञानिक तरीके से समाप्त किया जा सके।

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