Hisar Pollution Reports: देश में सबसे अधिक प्रदूषित रहने वाले हिसार में पिछले दो महीनों से स्वच्छ हवा

देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में हिसार का नाम आगे आता है। मगर पिछले दो महीनों से वायु की गुणवत्ता अच्छी बनी हुई है। इस मानसून सीजन में वायु की गुणवत्ता हिसार में ग्रीन जोन और येलो जोन तक सीमित रही है।

Manoj KumarWed, 15 Sep 2021 01:26 PM (IST)
हरियाणा में इस मानसून सीजन में पौधोरापण और बारिश का दिख रहा प्रदूषण पर प्रभाव

जागरण संवादाता,हिसार। हिसार में प्रदूषण पिछले कुछ वर्षों से अधिक हो गया है। हालात यह हैं कि सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में हिसार का नाम आगे आता है। मगर पिछले दो महीनों से वायु की गुणवत्ता अच्छी बनी हुई है। इस मानसून सीजन में वायु की गुणवत्ता हिसार में ग्रीन जोन और येलो जोन तक सीमित रही है। जबकि एनसीआर के दूसरे क्षेत्रों में स्थिति खतरे के निशान तक भी पहुंच गई थी। अगर पिछले सात दिनों का ही एयर क्वालिटी इंडेक्स देख लें तो 70 माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर से कम पीएम 2.5 दर्ज किया गया है। इस बार वायु गुणवत्ता कम होने का कारण इस मानसून सीजन में जमकर पौधोरापेण अभियान का चलना और बारिश के कारण कम होना बताया जा रहा है। प्रदूषण को अधिक से अधिक पौधारोपण से कम किया जा सकता है। हलांकि यहां वनीय क्षेत्र कम होने के कारण दिक्कत आती है।

हिसार मे यह है वनीय क्षेत्र की स्थिति

देश की राष्ट्रीय फारेस्ट पालिसी के अनुसार हर जिले के कुल क्षेत्रफल का एक तिहाई हिस्से में वनीय क्षेत्र होने चाहिए। मगर हिसार में लगातार वनीय क्षेत्र कम हो रहा है। फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार हिसार में 3983 वर्ग किलोमीटर ज्योग्राफिकल एरिया है। अगर इसका एक तिहाई यानि 33 फीसद हिस्सा निकालें तो अभी भी हिसार में 1256 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन की उपलब्धता होनी चाहिए। सिर्फ यह नहीं बल्कि हरियाणा ने भी 2006 में पॉलिसी बनाई जिसके अनुसार हर जिले में 20 फीसद क्षेत्र में हरियाली होनी चाहिए, मगर इस नियम के अनुसार देखें तो अभी भी हिसार में 738 वर्ग किलामीटर वनीय क्षेत्र की दरकार है। इतने बड़े क्षेत्र को वनीय क्षेत्र बनाना वन विभाग से लेकर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्योंकि लगातार कम होती जमीन वनीय क्षेत्र को निगलती जा रही है। पौधारोपण अभियान भी महज स्कूलों या कुछ संस्थाओं के हिस्से ही रह गया है। जिसके कारण अब हिसार में 1.45 फीसद क्षेत्र में ही हरियाली शेष रह गई है।

लगातार कम होते वनीय क्षेत्र का लोगों पर इंपेक्ट

1- पिछले वर्ष हिसार शहर के वासियों ने 550 से भी अधिक एयर क्वालिटी इंडेक्स देखा है, जिसमें इतना प्रदूषण हो गया जिसके कारण लोगों की सांस तक घुटने लगी थी। बुजुर्गों और बच्चों को स्मॉग से बचाने के लिए प्रशासन ने घर पर रहने की सलाह दी है। अगर पेड़ होते तो इन हालातों पर काबू पाया जा सकता था। क्योंकि पेड़ प्रदूषण को अवशोषित करने का काम करते हैं। यह कोई नई कहानी नहीं है बल्कि कई बार तो हिसार का एयर क्वालिटी इंडेक्ट दिल्ली से भी अधिक चला जाता है।

2- वनीय क्षेत्र काफी कम होने के कारण हिसार में बारिश और तापमान के बीच का संतुलन भी पिछले कुछ वर्षों में बिगड़ा है। इस साल अधिक पश्चिमी विक्षोभ की बारिश लोगों को नसीब हुई मगर फिर भी तापमान 22 वर्षों का रिकार्ड तोड़कर 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पिछले 20 वर्षों में वर्षा का आंकड़ा देखने पर हमें पता चलता है कि मानसून में भी हमें कम ही बारिश मिल रही है। इसके साथ ही पेड़ नहीं है तो आद्रता भी बढ़ कर गर्मी का एहसास करा रही है।

3- हिसार में सबसे अधिक एचएयू व जीजेयू में अधिक घनत्व वाले पेड़ लगे हैं, यहां तापमान लेने पर चार से पांच डिग्री सेल्सियस का अंतर आता है, इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि पेड़ गर्मी को कम करने का भी काम करते हैं।

विकास की भेंट चल रहे हजारों पेड़

1- शहर में एयरपोर्ट बनाने का प्रोजेक्ट जोरो शोरो से चल रहा है, इस प्रोजेक्ट में शहर में बड़े हिस्से में 200 वर्ष पुराने पेड़ तक काटे जाने प्रस्तावित हैं। इस पर दावा किया जा रहा है कि जो पेड़ कटेंगे उसके एवज में पेड़ लगाए जाएंगे मगर एक पौधे से पेड़ बनने में 20 वर्ष का समय लगता है ऐसे में 20 वर्षों तक लोगों का क्या होगा इस पर जवाब किसी के पास नहीं है।

2- शहर को चारों तरफ से बड़े-बड़े हाइवे से जोड़ दिया गया है। लोगों के लिए यह सुविधाजनक भी हैं मगर इनके निर्माण में हजारों विकसित पेड़ों की बली दी जा चुकी है। प्रशासन के कुछ विभाग अभी भी विकास का राग अलापते हुए पेड़ों पर हर दिन आरी चला रहे हैं। यह पेड़ों और इंसानों के रेशियों का भी ध्यान नहीं रख रहे।

हिसार में वनीय क्षेत्र की स्थिति

ज्योग्राफिकल एरिया- 3983 वर्ग किलोमीटर

बहुत घने वन- 0.00

कम घने वन- 11.86 फीसद

खुले वन- 45.78 फीसद

कुल वनीय क्षेत्र - 57.64

कुल हरियाली- 1.45 फीसद

शहर में हरियाली--

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय- 35 फीसद

गुरू जंभेश्वर तकनीकि विश्वविद्यालय- 25 फीसद

नगर निगम- 15 फीसद

सेक्टर- 20 फीसद

फैक्ट----

- एक आदमी एक दिन व एक सांस में तीन लीटर ऑक्सीजन लेता है।

- हवा में 22 लीटर ऑक्सीजन व अन्य भाग में अन्य गैसें होती हैं।

- एक दिन में मनुष्य 22 हजार बार सांस लेता है इस हिसाब से 17.43 लाख लोग 38.36 अरब सांसें लेते हैं, जिसके लिए 38.36 अरब लीटर ऑक्सीजन की जरूरत है।

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